विशेष राज्य के लिए जनप्रतिनिधि इस्तीफा दें

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NCP OFFICE ME TARIQE ANWAR KA PRESS CONFRENCE

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी(राकांपा) के राष्ट्रीय महासचिव सह लोकसभा में पार्टी के नेता तारिक अनवर ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिये जाने की मांग को पूरा करने के मामले में उदासीनता बरतने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिया गया तो एक तय समय सीमा के अंदर दलगत भावना से ऊपर उठकर बिहार के सभी सांसदों और विधायकों को त्याग पत्र दे देना चाहिए। आज केन्द्र और बिहार में राजग की ही सरकार है और ऐसे अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने के लिए आगे आना होगा। विशेष राज्य का दर्जा मिलने से प्रदेश का चहुंमुखी विकास होगा। श्री अनवर सोमवार को पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में राज्य कार्यकारिणी की विस्तारित बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2000 में जब बिहार का विभाजन हुआ था उस समय भी नीतीश कुमार केन्द्र की राजग सरकार में प्रभावी मंत्री थे। आज वह प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। केन्द्र में प्रभावी मंत्री रहते हुए भी श्री कुमार ने बिहार का विभाजन कर अलग झारखंड राज्य बनाये जाने के बाद बिहार को विशेष सहायता दिलाये जाने के लिए कोई भी पहल नहीं की। विभाजन के बाद बिहार को होने वाले नुकसान के एवज में विशेष राज्य का दर्जा और विशेष पैकेज देने की घोषणा की गयी थी, लेकिन अभी तक यह नहीं हो सका है। इसके बाद जब श्री कुमार ने वर्ष 2005-06 में राजग की ओर से बिहार की कमान संभाली थी। उस समय केंद्र में संयुक्त प्रगतिशिल गठबंधन की सरकार थी। केन्द्र की तत्कालीन संप्रग सरकार ने रघुराम राजन की अध्यक्षता में एक कमेटी बनायी थी, जिसने पाया कि विकास के पायदान पर बिहार सबसे निचले स्तर के राज्यों में शामिल है, लेकिन विशेष राज्य का दर्जा के लिए जो मानक है उसे पूरा नहीं करता। इसके बावजूद श्री कुमार इस मांग को लेकर राजनीति करते रहे और प्रदेश के करोड़ों लोगों से हस्ताक्षर लेकर केन्द्र को भेजा था। श्री अनवर ने कहा कि बिहार जैसे पिछड़े राज्य को विशेष राज्य का दर्जा मिलना चाहिए ताकि प्रदेश में उद्योग धंधे लगाये जा सकें तथा रोजगार के अवसर सृजित हो सके। मुख्यमंत्री श्री कुमार को प्रधानमंत्री से बिहार के लिए उनकी ओर से घोषित किये गये एक लाख 65 हजार करोड़ रुपये का विशेष पैकेज दिये जाने की भी मांग करनी चाहिये। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि सभी जनप्रतिनिधियों को दलगत भावना से ऊपर उठकर बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाये जाने के लिए केन्द्र पर दबाव बनाने के उद्देश्य से एक निश्चित समय सीमा के अंदर इस्तीफा कर देना चाहिए । अब केन्द्र से सिर्फ जुबानी आश्वासन से काम चलने वाला नहीं है, ठोस निर्णय लेने का समय आ गया है।

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