विविद्यालयों की स्वायत्तता बरकरार रखने को सरकार कृतसंकल्पित :राज्यपाल

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PATNA RAJBHVAN MEIN C B C S WORKSHOP KO SAMBODHIT KERTE RAJPAL SATTY PAL MALLICK

पटना -‘‘राज्य के सभी विविद्यालयों में जुलाई से स्नातकोत्तर पाठय़क्रमों में च्वाइस बेसड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) लागू होगा। यह सिस्टम देश के केन्द्रीय विविद्यालयों तथा दिल्ली विविद्यालय में लागू है। इसके तहत विद्यार्थियों को अपनी अभिरुचि, आवश्यकता तथा कौशल उन्नयन से जुड़े रोजगारपरक पाठ्यक्रमों को चयन करने की छूट होगी। सीबीसीएस पद्धति के जरिये पाठयक्रमों की स्तरीयता अन्तरराष्ट्रीय अकादमिक प्रचलनों के अनुरूप विकसित होगी। यह सहमति बुधवार को राजभवन में च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) पर आयोजित कार्यशाला में बनी। इसका उद्घाटन राज्यपाल सह कुलाधिपति सत्यपाल मलिक ने किया। कार्यशाला में राज्य के सभी कुलपतियों एवं संकायाध्यक्षों ने भाग लिया।इस मौके पर उन्होंने कहा कि ‘‘बिहार में उच्च शिक्षा के सुधार प्रयासों को और तेज करते हुए इसे गुणवत्तापूर्ण, रोजगारपरक और आधुनिक युग की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जाएगा। राज्यपाल श्री मलिक ने कहा कि बिहार में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सकल नामांकन अनुपात मात्र 14.4 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय अनुपात 24.5 प्रतिशत है। उन्होंने विविद्यालयों में सुशिक्षित, सक्षम एवं कौशलपूर्ण मानव-संसाधनों की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि नयी सार्थक अकादमिक पहलों के साथ-साथ, ठोस रणनीति भी सुधार प्रयासों के लिए बेहद जरूरी है। कार्यशाला को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि विविद्यालयों की स्वायत्तता बरकरार रखने के लिए हम कृतसंकल्पित हैं और यह उम्मीद करते हैं कि विविद्यालय प्रशासन भी स्वतंत्र रूप से अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए समयबद्ध रूप से अपनी कार्य-योजनाओं का कार्यान्वयन करेंगे। राज्यपाल ने कहा कि उच्च शिक्षा क्षेत्र में किसी भी कार्यक्रम के कार्यान्वयन में वे संसाधनों की कमी को आड़े नहीं आने देंगे। कार्यक्रम में प्रख्यात शिक्षाशास्त्री और यूजीसी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. वेद प्रकाश ने कहा कि हमारे विविद्यालयों को भी कम शुल्क पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने कहा कि बिहार जैसे राज्यों में भी काफी कम लागत में उच्च शिक्षा के मानकीकरण से जुड़ी अन्य कई योजनाएं कार्यान्वित हो सकती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज विद्यार्थियों को अपनी अभिरुचि, आवश्यकता तथा कौशल-उन्नयन से जुड़े रोजगारपरक पाठ्यक्रमों को चयन करने की छूट होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सीबीसीएस पद्धति के जरिये पाठयक्रमों की स्तरीयता अन्तर्राष्ट्रीय अकादमिक प्रचलनों के अनुरूप विकसित की जा सकती है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय विविद्यालय, हरियाणा के प्रो. आदित्य सक्सेना ने क्रेडिट ट्रांसफर, कोर कोर्सेज, इलेक्टिव कोर्सेज और सेलेक्टिव स्टडीज तथा स्कील बेस्ड कोर्सेज आदि के बारे में तयपरक जानकारियाँ दी। कार्यशाला के एक सत्र में मैसिव ओपेन ऑन-लाइन कोर्सेज आदि के बारे में भी विश्लेषण परक जानकारी दी गयी। दिल्ली विविद्यालय की शिक्षाशास्त्री डा.ॅ विमल राढ़ ने तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी। कार्यशाला में स्वागत भाषण करते हुए राज्यपाल के प्रधान सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा ने कहा कि राज्यपाल सचिवालय उच्च शिक्षा में सुधार प्रयासों को चरणबद्ध रूप से कार्यान्वित करेगा।

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