विधानसभा चुनाव-2020:भाजपा के लिए ’अपनों‘‘ को संभालना बड़ी चुनौती

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लोकसभा चुनाव में तो भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व ने सीटिंग उम्मीदवार समेत जीत के कुछ प्रबल उम्मीदवारों को टिकट कटने पर किसी तरह समझा लिया था। उस समय मुद्दा नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने का था। किंतु विधानसभा चुनाव में भाजपा को अपने इन प्रबल दावेदारों को संभालना एक बड़ी चुनौती होगी।पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा के छह सीटिंग सांसदों की टिकट काटनी पड़ी थी। भाजपा आलाकमान ने दिल्ली से दूत भेजकर सीटिंग सांसदों को समझाया, उन्हें ऑफर भी दिया गया। उस ऑफर पर क्या हो रहा है वंचित भाजपा के नेता ही बेहतर बता सकते हैं। 2015 के विधानसभा चुनाव में भाजपा-लोजपा-रालोसपा-हम के बीच समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत भाजपा 159, लोजपा 40, रालोसपा 23 व हम 21 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। फिलहाल प्रदेश में जो राजनीतिक परिस्थतियां बन रहीं हैं उसे देखते हुए भाजपा को फिर सिमटना पड़ेगा। तात्पर्य है कि लोकसभा चुनाव की तर्ज पर यदि विधानसभा चुनाव में समझौता होगा तो भाजपा को 160 से घटकर 100 के आसपास आना पड़ सकता है। ऐसे में भाजपा के जिन पांच दर्जन से अधिक उम्मीदवारों ने वर्ष 2015 में ताल ठोका था उन्हें दावेदारी से पीछे हटना पड़ेगा। भाजपा के जो नए प्रदेश अध्यक्ष बनेंगे उनके सामने अपने दावेदारों को संभालना एक बड़ी चुनौती होगी। अलबत्ता भाजपा के सीटिंग उम्मीदवारों के सामने कोई परेशानी नहीं दिख रही है। 53 सीटिंग विधायकों में एक-दो को छोड़कर सभी की खैरियत नजर आ रही है।जदयू के सामने भाजपा की तरह मुश्किलें नहीं हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में जदयू ने 101 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे। अगले चुनाव में जदयू के साथ ऐसी ही स्थिति बने रहने की संभावना है। यानी जदयू में विक्षुब्धों की संख्या कम होगी, जबकि भाजपा अपनी स्थिति खुद समझ सकती है। एक तरफ केन्द्रीय स्तर पर भाजपा का कुनबा दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। हालिया लोकसभा चुनाव में भाजपा 303 तक पहुंच गई है पर बिहार में भाजपा प्रतिनिधियों का मामला सिकुड़ता जा रहा है। 23 से 17 पर आ गया है। हालांकि बिहार में भाजपा के सदस्य लगातार बढ़ रहे हैं। भाजपा ने ताजा सदस्यता अभियान के तहत 32 लाख नए सदस्य जोड़े हैं जो पूरे देश में प्रतिशत के हिसाब से रिकार्ड है। लक्ष्य के तहत भाजपा को 15 लाख नए सदस्य बनाने थे, किंतु यहां 32 लाख नए सदस्य बनाए गए। बिहार में पहले से भाजपा के 56.5 लाख सदस्य थे। नए सदस्य जुड़ने से 88.5 लाख नए सदस्य बन गए हैं। आधिकारिक सदस्यों की संख्या आगे जारी की जाएगी। 2015 के विधानसभा चुनाव में जीत महागठबंधन के हाथ लगी थी, किंतु भाजपा को सभी पार्टियों से अधिक वोट मिले थे। भाजपा ने मत प्रतिशत में जदयू, राजद व कांग्रेस तीनों को परास्त किया था। भाजपा को कुल 24.4 प्रतिशत मत मिले थे और उसके 53 उम्मीदवार जीत पाए। इसके बाद राजद को 18.4 प्रतिशत मिले थे पर उसे 80 सीटों पर जीत हासिल हुई। जदयू को 16.8 फीसद मत मिले और उसके 71 उम्मीदवार बाजी मार ले गए। कांग्रेस को 6.7 फीसदी मत मिले थे, किंतु उसके 27 उम्मीदवार जीते। बिहार में मत प्रतिशत अधिक हासिल कर भी भाजपा राजद व जदयू से पीछे रही। मौजूदा लोकसभा चुनाव में भी भाजपा को पिछले विधानसभा चुनाव की तर्ज पर वोट मिले। वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को जिस तरह मत मिले उस तरह उसके सहयोगी लोजपा, रालोसपा व हम को नहीं मिले। भाजपा को सहयोगी दलों ने मतों के मामले में साथ नहीं दिया। पिछले विधानसभा चुनाव में लोजपा 40 सीटों पर चुनाव लड़ी और उसे महज 4.8 प्रतिशत मिले। यदि सीट की बात करें तो उसे 40 में से मात्र 2 सीटें मिलीं। रालोसपा ने कुल 23 सीटों पर भाग्य आजमाया था। उसे 2.3 फीसदी मत मिले थे और कुल दो सीटें वह ले पायी। जीतन राम मांझी की अगुवाई वाली हम ने 21 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे, अकेले मांझी जी चुनाव जीत पाए। ऐसे में भाजपा को महागठबंधन के सामने हार का सामना करना पड़ा।

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