वह मंजर याद कर आज भी कांप जाते हैं लोग

0
121

गत वर्ष 14 जनवरी, 2017 की शाम को याद कर सिहर जाते हैं रानीघाट और महेन्द्रू के वाशिंदे। जैसे ही गंगा पार नौका हादसे की जानकारी इस पार लोगों को मिली, चारों ओर अफरा-तफरी, चीख-पुकार मच गयी थी। प्रशासनिक हलके से लेकर आम नागरिकों के बीच सनसनी फैल गयी थी। उस हादसे में 24 लोगों की मौत हुयी थी। एसडीआरएफ और जिला प्रशासन के लोग हादसे के तीन दिनों बाद तक गंगा में शव की तलाश करते रहे। गत वर्ष पतंग उत्सव के बाद शाम करीब साढ़े छह बजे संबलपुर दियारा से पटना की ओर लौटने के क्रम में नौका हादसा हो गया था। नाव में तीस से अधिक लोग सवार थे। इस हादसे में बच्चे गुलबी घाट निवासी युवक कल्लू ने हादसे के दूसरे दिन बताया था कि नाव पर तीस से अधिक करीब चालीस लोग सवार थे। नाव गंगा पार से खुली ही थी कि जेनरेटर के नीचे के पटरे से नाव में पानी भरने लगा था। कुछ लोग नाब पर सेल्फी भी ले रहे थे। जैसे ही नाव में पानी भरने की जानकारी लोगों को मिली थी कि अफरातफरी मच गयी थी। नाविक नाव को दोबारा तट पर ले जाने का प्रयास कर रहा था। बगल में एक अन्य नाव लगी हुयी थी। अफरातफरी के बीच लोग नाव से कूदने लगे थे जिसमें नाव डूब गयी थी। कुछ लोग गंगा में मदद की गुहार लगा रहे थे। हादसे को लेकर प्रशासनिक विफलता की बातें भी सामने आयीं थीं। मौके पर एक वोट लोगों के बचाव में दिखा लेकिन पर्याप्त साधन के नहीं रहने से वोट पर सवार लोग कम लोगों को ही बचा सके थे। दस लोगों को बचाया गया था। कुछ लोग तैर कर तट तक पहुंच गये थे। घटना के बाद देर शाम तक शवों की तलाश में पटना और छपरा प्रशासन लगा रहा। इधर, लॉ कॉलेज घाट पर लोगों की भीड़ एकत्र थी। इसी तरह का नजारा पीएमसएच में था। घाट से अस्पताल तक लोग अपनों को ढूंढ रहे थे। इस हादसे को लेकर लोगों ने प्रशासन को जमकर कोसा। घाट पर और अस्पताल में इस घटना को लेकर लोगों में खासी नाराजगी देखी गयी थी। महेन्द्रू से लेकर पीएमसीएच तक लोग अपनों की तलाश में भागे फिर रहे थे। प्रशासन ने मौके की नजाकत को देखते हुए गांधी मैदान के करगिल से महेन्द्रूू मुहल्ले के गांधी चौक से वाहन परिचालन बंद कर दिया था। प्रशासनिक और सहायता में जुटे लोगों के वाहन व एम्बुलेंस को छोड़ किसी भी वाहन का परिचालन उस क्षेत्र प्रतिबंधित कर दिया गया था। पटना और सारण पुलिस और प्रशासन के छोटे से बड़े सभी अधिकारी अपने अपने क्षेत्र के गंगा तट पर लापता लोगों की तलाश में जुटे रहे। इस हादसे में कुल 24 जानें गयी थीं। बच्चे, महिला भी हादसे का शिकार बने थे। हादसे का शिकार हुए लोगों में अधिकतर लॉ कॉलेज घाट, रानी घाट और महेन्द्रू के थे। हादसे की शाम को याद कर महेन्द्रू, रानी घाट निवासी अनिल कांप उठते हैं। उनके मुताबिक उनके मुहल्ले के लोग गंगा पार गये थे। जैसे ही हादसे की खबर मिली, जिनके घर के लोग गंगा पार गये थे वहां रोने-चीखने की आवाजें आने लगी थीं। लोग एक को शांत कराने का प्रयास करते तो दूसरी ओर चीत्कार होने लगती थी। जिन घरों के लोग गत वर्ष हादसे का शिकार बने उनके लिए जब-जब मकर संक्रांति का त्योहार आएगा, उन्हें अपने के खोने की यादें आएंगी। अनिल के मुताबिक हादसे में जान गंवाने वालों के घर मकर संक्रांति नहीं मनायी जाएगी।

यह भी पढ़े  पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुनाथ झा के निधन पर नेताओं ने दी श्रद्धांजलि , आज होगा राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here