लोजपा के भीतर भी उठने लगे सवाल

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file photo

उम्मीदवारों के चयन को लेकर अब तक सबसे आास्त रही लोकजनशक्ति पार्टी भी अब तीन-तेरह के फेर में पड़ते जा रही है। ऐसा राज्य में पल-पल बदलती राजनीतिक स्थितियों के बीच नेक-टू-नेक फाइट को लेकर होने लगा है। चुनाव समिति की हुई बैठक में चंद सवालों के घेरे में लोकजनशक्ति पार्टी भी आ गई है। खासकर लोजपा की कुछ लोकसभा सीटें जहां वह विशेष रूप से आास्त थी। स्थिति यह है कि लोजपा की सबसे सुरक्षित हाजीपुर लोकसभा सीट पर ही प्रश्न खड़े हो गये हैं। पहले तो इस सीट पर केन्द्रीय मंत्री श्री पासवान को लड़ाने की बात चल रही थी। लेकिन उनकी पत्नी के मना करने पर यहां से अन्य उम्मीदवार की खोज शुरू हुई। सूत्र बताते हैं कि काफी मंथन के बाद लोजपा की तरफ से राज्य के पशुपालन मंत्री पशुपति कुमार पारस को लेकर यह फैसला हो गया कि वे चुनाव लड़ेंगे। लेकिन कल चुनाव समिति की हुई बैठक के बाद भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व तक पशुपालन मंत्री श्री पारस के बहुत दमदार उम्मीदवार होने का फीड बैक नहीं आया है। समाधान में एक बार फिर से केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान को चुनावी समर में उतरने का आग्रह भी किया जा रहा है। लेकिन अंतिम फैसला लोजपा संसदीय बोर्ड को लेना है।राजग के बीच मुंगेर लोकसभा क्षेत्र को लेकर भी नये सवाल उठाये जा रहे हैं। लोजपा की सहमति के साथ मुंगर लोकसभा जदयू के कोटे में जाने की बात सामने आई। यहां से जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन ऊर्फ ललन सिंह को उम्मीदवार बनाने की बात भी चल रही है। सवाल यह उठाया जा रहा है कि लोजपा से ली गई मुंगेर सीट के बदले अन्य सीट देने की जिम्मेवारी भी जनता दल यू की है। यहां भाजपा के द्वारा नवादा लोकसभा सीट आखिर क्यों दी जाए ? इस खास वजह से नवादा लोकसभा पर भी संशय के बादल हैं। खास कर भाजपा नेतृत्व द्वारा यह कहे जाने के बाद कि सभी केन्द्रीय मंत्री चुनाव लड़ेंगे। लोजपा अभी खुद वैशाली और खगड़िया लोकसभा को लेकर उम्मीदवारी की संभावना से जूझ रही थी। उस पर ये नये संकट कुछ फेर-बदल के साथ भी उभर सकते हैं। ज्ञात हो कि गत लोकसभा चुनाव 2014 में वैशाली से लोजपा की टिकट पर रामा सिंह और खगड़िया से महबूब अली कैसर चुनाव जीतने वाले फिलवक्त लोजपा से दूरी बनाये बैठे हैं। ऐसे में इन लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारी के संशय से निकलने की जुगत में जुटी लोजपा के सामने कुछ नये सवाल भी उभर कर आये हैं जिन्हें राजग के केन्द्रीय नेतृत्व को सुलझाना शेष है

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