लोक आस्था का महापर्व चैती छठ पर व्रर्तियों ने दिया प्रथम अर्ध्य

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CHAITI CHHATH KE MAUKA PER DIGHA GHAT PER ARGH DEE SARDHALU

राजधानी पटना में छठ व्रतियों में चैती छठ पूजा का उत्साह देखा जा रहा है. शुक्रवार को छठव्रतियों ने घाटों के किनारे अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया. लोक आस्था का महापर्व चैती छठ के प्रथम अर्ध्य के मौके पर पटना के विभिन्न गांगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई.

इस मौके पर हजारों की संख्या में छठ व्रतियों ने अस्तचलगामी भगवाना भास्कर को अर्घ्य प्रदान कर खुद और अपने परिवार की मंगलकामनाएं की. श्रद्धालुओं ने पूरी आस्था और विश्वास के साथ भगवान भास्कर की विशेष पूजा अर्चना की. छठ पर्व को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह चौकस नजर आया. सभी गंगा घाटों पर जहां सशस्त्र बलों की तैनाती देखी गई. वहीं दंडाधिकारी भी मौजूद.

अस्त होते सूर्य को आस्था के साथ नमस्कार करने की पौराणिक प्रथा है. सूर्य उपासना का पर्व सूर्य षष्ठी व्रत के अवसर पर चैती छठ हो अथवा कार्तिक छठ, प्रथम अ‌र्घ्य के दिन व्रतधारी अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर मंगल कामना किया. इस लोक आस्था के पर्व पर इस प्रथा से वह कहावत मिथ्या साबित होती है, जिसमें कहा गया है कि सभी उगते सूर्य को ही नमस्कार करते हैं.

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आस्था के इस कठिन तप करने वाले लोग छठी मइया से पुत्र के साथ ही बेटी की भी कामना करते हैं. छठ पूजा में महिलाओं द्वारा गाये जाने वाले छठ गीत- ‘रुनुकी-झुनुकी बेटी मांगी ले, पढ़ल पंडित दामाद..’ के भाव से स्पष्ट प्रतीत होता है कि महिलाएं छठ मइया से सुंदर, सलोनी बेटी के साथ योग्य दामाद की कामना करती हैं.देव सूर्य नगरी में देश के कोने कोने से पहुंचे लाखो व्रतियों ने भगवान सूर्य का अर्ध्य दिया.दोपहर 12 बजे से ही अर्घ्य देने का सिलसिला शुरू हो गया था जो देर रात तक जारी रहा.हर तरफ छठी मईया गीत सुनाई दे रही थी.

औरंगाबाद नगर : बिहार की राजधानी पटना में चैती छठ के अवसर पर शुक्रवार को पूरे दिन निर्जला रहने के बाद छठ व्रतियों ने पूजा सामग्री के साथ छठ घाटों पर पहुंच कर अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को अर्ध दिया व पूजा अर्चना की. वहीं, रात में कोसी भरने का अनुष्ठान किया. श्रद्धालु अपने घरों व छठ घाटों पर रात में कोसी भरे और शनिवार की सुबह पुन: छठ घाटों पर पहुंचकर पूजा करेंगे व उदयीमान सूर्य को अर्घ देंगे. इसके बाद घर में अन्य देवी-देवताओं की पूजा करने के बाद पारण कर छठ व्रत का समापन करेंगे. अपने परिजनों, मित्रों को प्रसाद ग्रहण करेंगे.

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