लोकसभा चुनाव 2019: पूर्णिया में 62.5 प्रतिशत मतदान के साथ प्रत्याशियों का भविष्य EVM में बंद

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बिहार के पूर्णिया में दूसरे चरण की वोटिंग जारी है. लोग वोट देने के लिए कतारों में खड़े हैं. बिहार की पूर्णिया लोकसभा सीट पर मतदान शुरू हो गया है. यहां से कांग्रेस पार्टी ने उदय सिंह, जनता दल यूनाइटेड ने संतोष कुमार, बहुजन समाज पार्टी ने जितेंद्र उरब, झारखंड मुक्ति मोर्चा ने मंजू मुरमू और बिहार लोक निर्माण दल ने सनोज कुमार चौहान को चुनाव मैदान में उतारा है. इस सीट पर 23 मई को मतगणना होगी और चुनाव नतीजे घोषित किए जाएंगे. बिहार में सुबह 11 तक वोट‍िंग परसेंटेंज 18 फीसदी रहा.

इसके अलावा बतौर निर्दलीय एमडी अख्तर अली, अनिरुद्ध मेहता, अर्जुन सिंह, अशोक कुमार सिंह, अशोक कुमार साह, डॉ मृत्युंजय कुमार झा, राजीव कुमार सिंह, राजेश कुमार, सुभाष कुमार ठाकुर, शोभा सोरेन और सगीर अहमद इस लोकसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं.

इससे पहले साल 2014 के लोकसभा चुनाव में पूर्णिया सीट से जेडीयू के संतोश कुमार कुशवाहा ने बीजेपी के उदय सिंह को शिकस्त दी थी. संतोष कुमार को 4 लाख 18 हजार 826 वोट मिले थे, जबकि बीजेपी उम्मीदवार उदय सिंह के खाते में 3 लाख 2 हजार 157 वोट आए थे. इसके अलावा कांग्रेस के उम्मीदवार अमरनाथ तिवारी को एक लाख 24 हजार 344 वोट मिले थे और वो तीसरे नंबर पर रहे थे.

अगर पूर्णिया लोकसभा सीट के चुनावी इतिहास पर नजर दौड़ाएं, तो साफ होता कि यहां के वोटर समय समय पर अपना प्रतिनिधि बदलते रहे हैं. साल 1957 में इस सीट से कांग्रेस के टिकट पर फनी गोपाल सेन गुप्ता ने जीत दर्ज की थी. इसके बाद 1962 और 1967 के चुनाव में भी उन्हीं को ही जीत मिली.

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इसके बाद 1971 में कांग्रेस के टिकट पर मोहम्मद ताहिर और 1977 में बीएलडी के लखनलाल कपूर ने जीत हासिल की, जबकि 1980 और 1984 के चुनाव में लगातार दो बार कांग्रेस के टिकट पर माधुरी सिंह ने चुनाव जीता. साल 1989 के चुनाव में जनता दल के टिकट पर यहां से तस्लीमुद्दीन ने बाजी मारी थी. इसके बाद बाहुबली पप्पू यादव ने इस सीट को अपना सियासी गढ़ बना लिया.

साल 1996 के लोकसभा चुनाव में इस सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने चुनाव जीता था. हालांकि 1998 के चुनाव में बीजेपी के जयकृष्ण मंडल ने बाजी मार ली थी. साल 1999 में पप्पू यादव ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में फिर एक बार चुनावी मैदान में उतरे और जीत दर्ज की थी. इसक बाद 2004 और 2009 के चुनाव में बीजेपी के उदय सिंह को जीत मिली थी. साल 2014 के चुनाव में इस सीट से जेडीयू के संतोष कुमार कुशवाहा ने जीत हासिल की थी.

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आपको बता दें कि पूर्णिया पूर्वोत्तर बिहार का सबसे बड़ा शहर है, जहां से नेपाल और पूर्वोत्तर भारत की ओर जाने का रास्ता गुजरता है. वर्तमान में पूर्णिया प्रमंडलीय मुख्यालय है, जिसके अंतर्गत अररिया, पूर्णिया, कटिहार और किशनगंज जिले आते हैं. पूर्णिया सौरा नदी के पूर्वी किनारे पर बसा है.

सीमांचल की राजधानी और मिनी दार्जलिंग के नाम से मशहूर पूर्णिया में आज मतदान होगा। पूर्णिया में कुल 17,53,649 मतदाता हैं। इसमें 9,10,001 पुरुष, 8,43,648 महिला और 68 अन्य हैं। लोकसभा सीट में कुल 1765 मतदान केंद्र हैं। पूर्णिया लोकसभा सीट के अंतर्गत छह विधानसभा सीट आता है। इसमें कटिहार जिले का कोढ़ा विधानसभा क्षेत्र भी है, जबकि पूर्णिया जिला में आने वाला विधानसभा अमौर और बायसी किशनगंज लोकसभा सीट का हिस्सा है। 42 हजार मतदाता पहली बार मताधिकार का प्रयोग करेंगे।

2019 के चुनावी मैदान में 16 प्रत्याशी आजमा रहे किस्मत
संतोष कुशवाहा (जदयू), उदय सिंह (कांग्रेस), जितेन्द्र उरांव (बसपा), मंजू मुर्मू (झामुमो), शोभा सोरेन (निर्दलीय), मृत्युंजय झा (निर्दलीय), अशोक साह (निर्दलीय), सागीर अहमद (निर्दलीय), सनोज चौहान (निर्दलीय), अनिरुद्ध मेहता (निर्दलीय), राजेश कुमार (निर्दलीय), सुभाष ठाकुर (निर्दलीय), राजीव सिंह (निर्दलीय), अर्जुन सिंह (निर्दलीय), अशोक सिंह (निर्दलीय) मो. अख्तर अली (निर्दलीय) मैदान में हैं।

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एक नजर में 2014 लोकसभा चुनाव
2014 के लोकसभा चुनाव में 17 प्रत्याशी मैदान में थे। 24 अप्रैल को 1457 मतदान केंद्रों पर चुनाव हुआ था। जदयू प्रत्याशी संतोष कुशवाहा को कुल 418826 मत मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी पप्पू सिंह को 302157 मत मिले थे। इन दोनों को छोड़ सभी प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गयी थी।

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