लोकसभा चुनाव 2019: दरभंगा की आस में तीन धुरंधरों का टूटा सपना

0
155

दरभंगा की राजनीति में विगत तीन चार दशक से राज कर रहे राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेता व पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री मोहम्मद अली अशरफ फातमी और भाजपा से निष्कासित होकर कांग्रेस में शामिल कीर्ति आजाद 2019 के लोकसभा चुनाव में दरभंगा की राजनीति से बाहर हो चुके हैं। यही हाल जदयू के राष्ट्रीय महासचिव संजय झा का हुआ है। दरभंगा को अपना राजनीतिक केंद्र बना चुके संजय झा भी बेटिकट होने के बाद दरभंगा की राजनीति में नजर नहीं आ रहे हैं। लोगों के बीच र्चचा शुरू हो चुकी है कि दरभंगा की राजनीति के तीन धुरंधर खिलाड़ियों का सपना लोकसभा चुनाव 2019 में टूट चका है। टिकट कटने के बाद दरभंगा लोकसभा सीट पर लगभग तीन दशक तक सांसद चुने गए मोहम्मद अली अशरफ फातमी और कीर्ति आजाद महागठबंधन प्रत्याशी अब्दुलबारी सिद्दीकी के नामांकन तक में नहीं आए। वहीं जदयू नेता संजय झा भी एनडीए प्रत्याशी गोपाल जी ठाकुर के नामांकन में नहीं पहुंचे। एक तरफ राष्ट्रीय जनता दल ने मोहम्मद अली अशरफ फातमी को दरभंगा सीट से बेटिकट ही नहीं किया बल्कि मधुबनी सीट से भी उन्हें प्रत्याशी नहीं बनाया। इसका आक्रोश राजद के इस वरिष्ठ नेता के चेहरे पर कुछ दिन पहले साफ नजर आ रहा था। लेकिन वह तय नहीं कर पा रहे थे कि करें तो क्या करें। उन्हें एक तरफ अपने पुत्र केवटी से राष्ट्रीय जनता दल के विधायक डॉक्टर फराज फातमी का भविष्य दिख रहा था तो दूसरी तरफ तय नहीं कर पा रहे थे कि राष्ट्रीय जनता दल छोड़ने पर या पार्टी से निकाले जाने पर उनकी आगे की स्थिति क्या बनेगी। कमोबेश यही स्थिति भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल दरभंगा के सांसद कीर्ति आजाद के साथ भी दिख रही है। दरभंगा सीट राष्ट्रीय जनता दल के खाते में जाने के बाद कीर्ति आजाद की स्थिति भी फातमी जैसी हो गई है। उन्हें कांग्रेस ने धनबाद से प्रत्याशी बनाया है। फिलहाल वे कई दिनों से दरभंगा में नजर भी नहीं आ रहे हैं। ज्ञात हो कि मो. अली अशरफ फातमी ने मधुबनी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी थी। हालांकि वे दरभंगा से ही चुनाव लड़ना चाहते थे। लेकिन दरभंगा सीट पर असमंजस की स्थिति को भांपते हुए उन्होंने मधुबनी का रुख किया और वहां कई सभा भी कीं। बूथ कमेटी तक का गठन कर लिया। लेकिन मधुबनी सीट वीआईपी के खाते में जाने के बाद उनकी 32 वर्ष की राजनीति अचानक ठहर सी गई। उन्हें विास नहीं हो रहा है कि पार्टी उनके साथ ऐसा करेगी। दरभंगा से वे 4 बार सांसद रह चुके थे। अब वह बसपा के टिकट पर मधुबनी से चुनाव लड़ रहे हैं। राजद ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया है। अब बात करें जदयू नेता संजय झा की तो एक तरह से उन्होंने दरभंगा में आकर लोकसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी थी। हालांकि वह दरभंगा से लगातार जुड़े रहे। लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने से 2 महीने पूर्व उन्होंने क्षेत्र का चप्पा चप्पा छान मारा था। लेकिन दरभंगा सीट भाजपा के खाता में बरकरार रहने पर संजय झा की मेहनत पर पानी फिर गया। उनके विरोधी यह कहते सुने गए कि पांच वर्ष पूर्व भी उन्होंने दरभंगा सीट से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए कार्यालय तक खोल लिया था। लेकिन उस समय भी उन्हें टिकट नहीं मिला था। फिलहाल दरभंगा के इन तीन धुरंधर नेताओं की र्चचा कम होने लगी है और लोग लोकसभा चुनाव 2019 में एनडीए प्रत्याशी गोपाल जी ठाकुर और महागठबंधन प्रत्याशी अब्दुलबारी सिद्दीकी के बारे में र्चचा शुरू कर दिए हैं।

यह भी पढ़े  किसानों-मजदूरों ने किया विधानसभा मार्च

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here