तेजस्वी का परिवार उत्तर भारत का सबसे बड़ा जमींदार: मोदी

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पटना – राज्य के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने लालू परिवार के तार को एक नए घोटाले से जोड़ते हुए कहा कि अगर जमीन हथियाने के सारे मामलों का खुलासा हो जाए तो उनसे बड़ा जमींदार बिहार क्या उत्तर प्रदेश में भी नहीं होगा। संपत्ति के मामले में उत्तरप्रदेश के मुलायम सिंह यादव की तुलना में ज्यादा जमीन लालू परिवार के नाम होगी। उपमुख्यमंत्री श्री मोदी शनिवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उपमुख्यमंत्री ने खुलासा करते कहा कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव लीज के सहारे 255 डिसमिल जमीन के मालिक बन गए। गिफ्ट,पॉवर ऑफ एटॉर्नी, वसीयत और फर्जी कंपनियों के बाद लीज के जरिए करोड़ों की भूमि के मालिक बन गए। दिलचस्प तो यह है कि लीज 33 साल या अधिकतम 60 साल का होता है लेकिन तेजस्वी ने 91 साल (आजीवन ) की लीज लेकर एक तरह से तीन पीढ़ियों के हवाले संपत्ति कर दी। उन्होंने कहा कि लीज की कहानी यह है कि पहले गरीब रिश्तेदारों के नाम से अपना पैसा लगाकर जमीन रजिस्ट्री कराई गई और फिर आजीवन लीज के माध्यम से उस जमीन को तेजस्वी यादव ने अपने कब्जे में कर लिया। 255 डिसमिल की यह जमीन पटना सिटी अनुमंडल के रानीपुर खिड़की, मिरचाई रोड में स्थित है। इसकी कीमत करोड़ों में है। इस 255 डिसमिल जमीन को लालू-राबड़ी ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल 1990-2005 के बीच अपने बड़े भाई (लालू जी के बड़े भाई) स्व. मुकुंद प्रसाद, जो वेटनरी कॉलेज में चतुर्थवर्गीय कर्मचारी थे, के समधियाना में अगल-अलग नाम से अपना पैसा लगाकर खरीदवा दिया और फिर 2012 में उस जमीन को तेजस्वी प्रसाद यादव के नाम पर 91 साल के लिए लीज पर लिखवा लिया। डीड की र्चचा करते उन्होंने कहा कि स्व. मुकुंद प्रसाद के दामाद रजनीकांत सिंह पिता- स्व. रामप्रीत सिंह के नाम से 1991, 2004, 2010, 2012 में कुल 6 डीड के माध्यम से 104.32 डिसमिल खरीदी गई। इसी प्रकार रजनीकांत सिंह के भाई शशिकांत सिंह, रविकांत सिंह एवं रजनीकांत की मां उमा देवी के नाम 4 अलग-अलग डीड के माध्यम से 95.23 डिसमिल जमीन खरीदी गई। रजनीकांत के मामा शिव कुमार सिंह और राम कुमार सिंह पिता-स्व.सीताराम सिंह के नाम से भी 55.66 डिसमिल जमीन 1991 में खरीदी गई। इस कुल 255.21 डिसमिल जमीन को रानीपुर खिड़की, मिरचाई रोड टेंट सिटी, पटनासिटी को 91 साल के लीज पर तेजस्वी यादव ने लिखवा लिया। 13 जून, 2012 को तेजस्वी प्रसाद यादव ने शिव कुमार सिंह (27.66 डिसमिल), राम कुमार सिंह (28 डि.), रजनीकांत सिंह (104.32 डि.), शशिकांत सिंह (39.91 डि.),रविकांत सिंह (27.66 डि.),उमा देवी (27.66 डि) यानि कुल 255.21 डि. जमीन 91 साल के लीज पर लिखवा ली। 255.21 डिसमील जमीन पर 91 वर्ष यानी 1 जून, 2012 से 31 मई, 2101 तक तेजस्वी प्रसाद यादव का कब्जा बना रहेगा। तेजस्वी 110 वर्ष की आयु तक इस जमीन के मालिक बने रहेंगे। श्री मोदी ने कहा कि हद तो यह है कि तेजस्वी ने 55.66 डिसमल जमीन को वार्षिक किराये मात्र 5 हजार रपए तथा 199.55 डिसमिल जमीन 15 हजार वार्षिक किराये पर अपने नाम लिखवा लिया। यानी मात्र 20 हजार रपए प्रति वर्ष किराए पर 91 साल तक (यानी 110 वर्ष की उम्र तक) तेजस्वी इस जमीन के मालिक बने रहेंगे। 91 साल के बाद यदि लीज का नवीकरण नहीं हो पाया तो 1 हजार रुपया प्रति माह की दर से मुआवजा दिया जाएगा और नवीकरण तेजस्वी की मर्जी पर निर्भर करेगा। जबकि स्थिति यह है कि आज उस इलाके में जमीन का किराया 5 रुपये प्रति वर्गफीट है। यानि 255.21 डिसमिल जमीन 1,10,925 वर्ग फीट है। 5 रुपये की दर से यह किराया 5 लाख 58 हजार प्रति वर्ष होना चाहिए परन्तु निर्धारित करवा लिया मात्र 20 हजार रुपये प्रति वर्ष। जमीन का मूल्य लगातार बढ़ता रहता है, परन्तु तेजस्वी यादव बाजार मूल्य कुछ भी हो, 91 साल तक 20 हजार ही किराया देते रहेंगे। आज उस इलाके में जमीन का मूल्य 25-30 लाख रुपये प्रति कट्ठा है परन्तु तेजस्वी करोड़ों की जमीन के आजीवन मालिक मात्र 20 हजार वार्षिक किराया देकर बन गए हैं।श्री मोदी ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करते कहा तक जो जमीन रजनीकांत सिंह के नाम 31 मार्च, 2012 में 16 डिसमिल 5 लाख 12 हजार में नकद खरीद दिखलाई गई वह मात्र 3 माह में 91 साल के लीज पर दिखलायी गयी।आखिर कोई व्यक्ति क्यों पहले लाखों रुपये लगाकर जमीन खरीदेगा और फिर 3 महीने में कौड़ी के भाव जिन्दगी भर के लिए लीज पर दे देगा। वास्तविकता यह है कि अपने काले धन का इस्तेमाल कर पहले अलग-अलग रिश्तेदारों के नाम जमीन रजिस्ट्री कराई गई और फिर 91 साल की लीज मात्र 15 हजार वार्षिक किराये पर तीन पीढ़ी उस जमीन के मालिक बन गए। इस मौके पर प्रदेश उपाध्यक्ष देवेश, प्रदेश प्रवक्ता संजय सिंह टाइगर,मीडिया प्रभारी राकेश सिंह व अशोक भट्ट मौजूद थे।

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