लालू परिवार में कलह पार्ट 3: तेजप्रताप ने ताजा कर दी मुलायम परिवार में सत्ता संघर्ष की याद

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कई तरह के संकटों और कानूनी झंझटों में उलझे लालू प्रसाद यादव के परिवार के लिए अब एक और नई परेशानी खड़ी हो गई है। पार्टी में सम्मान-अपमान के मुद्दे पर तेजप्रताप यादव के तल्ख तेवर ने उत्‍तर प्रदेश (यूपी) के मुलायम सिंंह यादव परिवार की उस याद को ताजा कर दिया है, जब करीब साल भर पहले अखिलेश यादव ने सत्ता में वर्चस्व के लिए पिता समेत परिवार के सारे सदस्यों को दरकिनार कर दिया था।

तेजप्रताप भी लालू एवं राबड़ी के बड़े पुत्र हैं, लेकिन परिवार ने छोटे पुत्र तेजस्वी यादव को राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाया है। तेजप्रताप के ताजा स्टैंड को भी राजनीतिक विश्लेषक लालू परिवार में सत्ता संघर्ष के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, पार्टी के शीर्ष नेता पार्टी में विवाद और परिवार में तकरार जैसी बात से इनकार कर रहे हैं। खुद तेज प्रताप और तेजस्वी ने भी ऐसी आशंकाओं को खारिज किया है, लेकिन ताजा प्रकरण ने राजद के विरोधी दलों को परिवार पर हमले के लिए हथियार थमा दिया है, इससे किसी को इनकार नहीं हो सकता है।

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सियासी विरोधियों को मिला मौका

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) व जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के नेता लंबे समय से लालू परिवार में ऐसी ही तकरार का इंतजार कर रहे थे। अनायास ही तेजप्रताप ने उन्हें मौका प्रदान कर दिया है। हो सकता है दोनों भाइयों में किसी तरह का मतभेद नहीं हो और पार्टी में तेजप्रताप के मान-अपमान का मुद्दा भी सुलझा लिया जाए, लेकिन इतना तय है कि विरोधी दलों के नेता चौकन्ने हो गए हैं। अब लालू परिवार की प्रत्येक गतिविधि में खामियां तलाशने की कोशिश होगी और छोटी सी बात को भी बतंगड़ बनाने के मौके लपके जाएंगे। लालू प्रसाद की अनुपस्थिति में विपक्ष के सारे हमले दोनों भाइयों को ही झेलने पड़ेंगे।

सवालों के घेरे में जनाधार की सुरक्षा

लालू ने तीन दशक के प्रयास से बिहार में जो जनाधार तैयार किया है, वह पुत्रों के हाथों में कितना सुरक्षित रहेगा, इसपर सवाल उठने तय हैं। भाजपा और जदयू जैसे मजबूत सियासी दल राजद के आधार वोट पर प्रहार करने को तैयार हैं। विरोधियों को इसमें कामयाबी भी मिल चुकी है। वर्ष 2005 से लालू के चुनावी प्रदर्शन में आई गिरावट इसका प्रमाण है। 1995 में 167 सीटों पर अकेले जीत दर्ज करने वाला राजद 2010 में 22 सीटों पर सिमट गया था।

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पहले से ही कम नहीं मुसीबतें

चारा घोटाले में फंसने के बाद से लालू परिवार की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कुछ मामलों में सजा हो चुकी है। कुछ में सुनवाई जारी है। खुद लालू कई तरह की बीमारियों से ग्रस्‍त होकर इलाज के लिए जमानत पर छह हफ्ते के लिए बाहर आए हैं। पार्टी में भी कई काम अटके हैं। संगठन विस्तार का काम भी अभी अधूरा है। रेलवे होटल टेंडर घोटाला और आय से अधिक संपत्ति मामले में तेजस्वी यादव समेत परिवार के कई सदस्यों पर जांच एजेंसियों की तलवार लटकी हुई है। ऐसे में मुसीबतों में इजाफे का लालू परिवार पर नकारात्मक असर से इनकार नहीं किया जा सकता है।

 

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