लालू की विरासत बचाये रखना तेजस्वी के लिए आसान नहीं

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राजद में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। लालू प्रसाद खुद जेल में हैं। बच्चों पर भी कानून की तलवार लटकी हुई है। केन्द्र और बिहार में विरोधी दलों की सरकार है। कुल मिलाकर कहें तो राजद में सब कुछ विपरीत दिशा में चल रहा है। ऐसे में लालू के छोटे बेटे तेजस्वी के सामने पिता की विरासत को बचाकर रखना आसान नहीं है। राजद प्रमुख लालू प्रसाद जेल में हैं। इधर, राजद के सामने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के रूप में दो बड़ी चुनौतियां सामने हैं। राजद के सीनियर नेताओं ने अभी तो अपनी एकजुटता प्रदर्शित की है। लेकिन ये कब तक रहेगी, इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्योंकि राजद के सीनियर नेताओं को तेजस्वी में वो करिश्मा नहीं दिख रहा है, जो लालू प्रसाद में है। इसके साथ ही राजद को लालू के इस बार जेल जाने के बाद वो हमदर्दी नहीं मिल पा रही है, जो इससे पहले राजद को मिला करती थी। जाहिर है कि बिहार में बड़ी सियासी ताकत होने के बावजूद राजद के लिए इस बार की चुनौतियां पहले से कठिन हैं। ऐसे में लालू के घोषित उत्तराधिकारी तेजस्वी यादव के लिए आगे की राह आसान नहीं लग रही है। दूसरी ओर बिहार में शीर्ष पर पहुंचने की कोशिश में जुटी भाजपा और विस्तार की जुगत में जुटे जदयू की टकटकी लालू की अनुपस्थिति में राजद के आधार वोटों पर लगी है। राजद समर्थक इस बात से खुश हो सकते हैं कि 5 जुलाई 1995 में निर्माण के बाद से इस पार्टी पर बड़े-बड़े संकट आए फिर भी टूटफूट की घटनाएं नहीं हुईं। लालू के आठवीं बार जेल जाने के बाद पार्टी का सारा दारोमदार नेता प्रतिपक्ष और लालू के उत्तराधिकारी तेजस्वी यादव पर है। तेजस्वी पर पार्टी को संभालने, अटूट रखने और लालू को कानूनी पचड़ों से निकालने की जिम्मेवारी है। विरोधियों के हमले से खुद की हिफाजत की जिम्मेदारी भी तेजस्वी और तेज प्रताप पर ही है। तेजस्वी की अग्निपरीक्षा तय है, क्योंकि अवैध संपत्ति के मामले में उनके ऊपर भी जांच एजेंसियों की तलवारें लटकी हुई हैं।

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