रेल होटल घोटाला: लालू यादव के वकील ने सीबीआइ से मांगा दो सप्ताह का समय

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चारा घोटाले में जनवरी 1997 में हुई पूछताछ के बाद ये दूसरा मौका है जब एजेंसी विधिवत रूप से किसी मामले में लालू यादव और उसके बाद उनके परिवार के किसी और सदस्य के साथ पूछताछ करेगी.

 राजद अध्यक्ष लालू यादव से आज रेलवे के होटल के बदले पटना में तीन एकड़ ज़मीन लेने के मामले में आज सीबीआइ ने लालू यादव को पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन सीबीआइ सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक लालू यादव के वकील सीबीआइ कार्यालय पहुंचे हैं और पूछताछ के लिए दो सप्ताह का समय मांगा है।

एेसे में लालू यादव से सीबीआइ आज पूछताछ नहीं करेगी। वहीं लालू के छोटे बेटे और बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव को भी सीबीआइ ने पूछताछ के लिए कल का समय दिया है, अब देखना है कि तेजस्वी से कल पूछताछ होती भी है या नहीं?

राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू यादव के साथ सोमवार को सीबीआई पूछताछ करेगी. ये रेलवे के होटल के बदले पटना में तीन एकड़ ज़मीन लेने का मामला है. लालू यादव इस पूछताछ के लिए शनिवार को ही दिल्ली पहुंच गए हैं. वहीं उनके बेटे और बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव पिछले कई दिनों से दिल्ली में कैम्प कर रहे हैं. चारा घोटाले में जनवरी 1997 में हुई पूछताछ के बाद ये दूसरा मौका है जब एजेंसी विधिवत रूप से किसी मामले में लालू यादव और उसके बाद उनके परिवार के किसी और सदस्य के साथ पूछताछ करेगी. सोमवार को ये पूछताछ सीबीआई के दिल्ली मुख्यालय पर होगी. ये मामला उनके रेल मंत्री काल का हैं जब पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत रेलवे के दो होटेल जो ओडिशा के पुरी और रांची में थे, उन्हें पटना के सुजाता ग्रुप को दिया गया.

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लेकिन सीबीआई का आरोप है कि लालू ने इसके बदले मामूली क़ीमत देकर अपने पार्टी के सांसद प्रेम गुप्ता की पत्नी द्वारा संचालित एक कंपनी डिलाइट मार्केटिंग के नाम उस समय दो एकड़ ज़मीन ली और बाद में इस कम्पनी में राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव निदेशक हुए. फिर इस कम्पनी का नाम भी बदल डाला. हालांकि इस कम्पनी में तेज प्रताप यादव भी निदेशक थे लेकिन उनके नाम शेयर नहीं था.

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ये मामला इस साल मार्च महीने में उस समय उजागर हुआ जब पटना चिड़ि‍याघर में एक निर्माणाधीन मॉल से मिट्टी की सप्लाई पर विवाद खड़ा हुआ. कुछ समय में इस बात का ख़ुलासा हुआ कि इस मॉल की ज़मीन का मालिकाना हक़ अब लालू यादव के परिवार के पास है.

पहले इस मामले की जांच आयकर विभाग ने शुरू की लेकिन प्रारम्भिक जांच के बाद सीबीआई ने जुलाई के पहले हफ़्ते में प्राथमिकी दर्ज की और 9 जुलाई को लालू यादव के घर पर छापेमारी की. इस छापेमारी के बाद नीतीश कुमार इस ज़िद पर अड़ गये कि तेजस्वी यादव को इस मामले में सार्वजनिक रूप से सफ़ाई देनी चाहिए. लेकिन ना लालू और ना ही तेजस्वी इसके लिए तैयार हुए. हालांकि तेजस्वी यादव का कहना था कि जब ये ज़मीन और होटल का सौदा हुआ तब उनकी मूंछ भी नहीं थी.

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लेकिन इसको मुद्दा बनाकर नीतीश ने महागठबंधन से अपना नाता तोड़ा फिर भाजपा से रिश्‍ते क़ायम करते हुए नई सरकार बनायी. हालांकि लालू यादव का कहना है कि ये पूरा मामला राजनीति से प्रेरित है. चूंकि वो केंद्र सरकार के खिलाफ सबसे ज़्यादा मुखर हैं इसलिए इस मुद्दे पर सीबीआई राजनीतिक दबाव में उन्हें फंसा रही है. ये मुद्दा सबसे पहले 2008 में नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड ने उठाया था. उस समय इस विवाद के काग़ज़ात पार्टी के दो तत्कालीन सांसद शरद यादव और ललन सिंह ने तब के प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह को दिया था लेकिन उस समय ये ज़मीन लालू यादव या उनके परिवार वालों के नाम नहीं थी.

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