राहुल पर टिप्पणी से नाराज कांग्रेसियों का प्रदर्शन

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राहुल गांधी पर की गई टिप्पणी को लेकर प्रदेश कांग्रेस आज उबल पड़ा। पार्टी कार्यकर्ताओं ने जहां खिलाफ में प्रदर्शन किया वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने पलटवार किया है। राहुल गांधी पर अभद्र टिप्पणी करने को लेकर भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी के खिलाफ बिहार कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश अध्यक्ष मिन्नत रहमानी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए। सब्जीबाग चौराहा से करगिल चौक तक पार्टी कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। अध्यक्ष रहमानी ने कहा कि बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने पहली बार कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के प्रति अभद्र एवं अशाोभनीय टिप्पणी नहीं की है। इससे पहले भी वह सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी पर भी इस तरह की टिप्पणी कर चुके हैं। यह भाजपा की कुंठित मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यदि नरेंद्र मोदी अपने नेताओं पर लगाम नहीं लगाएंगे तो हम मुंहतोड़ जवाब देने को बाध्य होंगे। विरोध मार्च में उपाध्यक्ष मो. आसिफ अली, तौफीक आलम, इफ्तेखखार आलम, हीरा सिंह बग्गा, नरजीत सिंह, आरिफ गोल्डन, सेराज अली, मो जबीहउल्लाह, वसीम रिजवी, शौकत अली, प्रभाकर झा, पंकज पासवान, मो. अमानुल्लाह, सोबैर आलम आदि के अलावा सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे। उधर, बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा ने उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के बयान की कड़ी आलोचना की जिसमें उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की पार्टी को यूपी बिहार की 120 लोकसभा सीटों में से केवल दो पर विजयी बनाकर जनता ने खारिज कर दिया। डॉ. झा ने कहा कि लोकतंत्र में जीत-हार लगी रहती है। उन्होंने सुशील कुमार मोदी को स्मरण दिलाया कि 1984 के लोकसभा चुनाव में राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी को 410 से अधिक सीटों पर जीत हासिल हुई थी एवं भाजपा को केवल दो ही सीटों पर सफलता मिली थी। भाजपा के लोकप्रिय नेता अटल बिहारी वाजपेयी भी चुनाव हार गए थे। डॉ. झा ने कहा कि 1977 में कांग्रेस चुनाव हार गयी थी लेकिन 1980 में इन्दिरा गांधी के नेतृत्व में बहुमत से सरकार बनायी थी। उन्होंने कहा कि जिस संविधान की बात सुशील कुमार मोदी कर रहे हैं उसके निर्माण में कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाया थी और उस वक्त सुशील मोदी की पार्टी का कोई अता पता नहीं था। डॉ. झा ने कहा कि याद रखना चाहिये कि 2004 के लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस संसदीय दल का नेता चुने जाने के बाद भी श्रीमती सोनिया गांधी ने डॉ. मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाया। साथ ही तत्कालीन प्रधानमंत्री के कई बार अनुरोध के बाद भी राहुल गांधी ने मंत्री बनने से विनम्रतापूर्वक इनकार कर दिया था।

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