राहुल गांधी का इस्तीफा: अगले अध्यक्ष के चुनाव तक मोतीलाल वोरा संभालेंगे कामकाज- सूत्र

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लोकसभा चुनाव में हार की जिम्मेदारी लेते हुए अखिरकार राहुल गांधी ने आधिकारिक रूप से कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. सूत्रों के मुताबिक, अगले अध्यक्ष के चुनाव तक पार्टी के वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा कामकाज संभालेंगे. जब मोतीलाल वोरा से राहुल के इस्तीफे को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि हम राहुल को फिर मनाएंगे. कहा जा रहा है कि राहुल गांधी नए अध्यक्ष के चयन के समय कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में शामिल नहीं होंगे.

बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष पद से राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद कांग्रेस दफ्तर और उनके घर में सन्नाटे का माहौल है. इससे पहले उनका इस्तीफा टालने के लिए पार्टी कार्यकर्ता धरना दे रहे थे. इस्तीफा वापस लेने की मांग को लेकर राहुल के घर दो से ज्यादा बड़े प्रदर्शन हो चुके थे.

इस्तीफे के बाद राहुल गांधी ने कहा, ”अध्यक्ष के तौर पर मैं 2019 की हार की जिम्मेदारी लेता हूं. जवाबदेही पार्टी के भविष्य के लिए जरूरी है. इसलिए मैं इस्तीफा दे रहा हूं. पार्टी को खड़ा करने के लिए कड़े फैसले की जरूरत है. कई और लोगों को हार की जिम्मेदारी लेनी चाहिए. भारत में सत्ता से चिपके रहने की आदत है. सत्ता पाने की चाहत से आगे बढ़ना होगा. तभी विरोधियों को हरा पाएंगे.”

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इस्तीफे के बाद राहुल ने ट्विटर हैंडल पर अपना बायो भी बदल लिया है. अब राहुल गांधी ट्विटर पर खुद को सिर्फ सांसद और कांग्रेस का सदस्य बता रहे हैं.

गौरतलब है कि राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पेशकश तो 25 मई को सीडब्ल्यूसी की बैठक में ही कर दी थी लेकिन महीने भर बाद बुधवार 3 जुलाई को उन्होंने सार्वजनिक रूप से इसका ऐलान कर दिया.

सीएसडीएस के निदेशक संजय कुमार ने यह भी कहा कि यह सोचना उचित नहीं है कि राहुल गांधी के इस्तीफा देने और गांधी परिवार के बाहर के किसी व्यक्ति के कांग्रेस अध्यक्ष बनने से कोई बड़ा संकट आ जाएगा। कुमार ने कहा, ‘‘मेरे मुताबिक यह सोचना सही नहीं है कि राहुल गांधी के इस्तीफा देने से कांग्रेस के भविष्य पर कोई बहुत बड़ा संकट है। यह जरूर है कि यह परंपरा बन गई थी कि गांधी परिवार का ही कोई व्यक्ति अध्यक्ष बनेगा।’’

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उन्होंने कहा, ‘‘ यह मानना भी उचित नहीं है कि अगर परिवार से बाहर कोई अध्यक्ष बनेगा तो पार्टी खत्म हो जाएगी। उनके इस्तीफे से शायद पार्टी को नया स्वरूप मिलने में मदद मिले। उन्हें पार्टी में सक्रिय रहना चाहिए। ऐसा होने से उनके एक लोकप्रिय नेता तौर पर उभरने में मदद मिल सकती है।’’
राजनीतिक विश्लेषक और दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर सुशीला रमास्वामी ने कहा, ‘‘कांग्रेस पर अस्तित्व का खतरा था और उसे गांधी परिवार के नियंत्रण से बाहर निकलना था। यह कहना उचित नहीं होगा कि गांधी परिवार के पार्टी का नेतृत्व नहीं करने से कांग्रेस नहीं चल पाएगी।’’ हालांकि, उन्होंने पार्टी को फिर से खड़ा करने के लिए उठाए गए कदमों को लेकर राहुल गांधी की सराहना की।

लोकसभा चुनाव के बाद से अपने इस्तीफे को लेकर एक महीने से बनी असमंजस की स्थिति पर पूर्णविराम लगाते हुए गांधी ने बुधवार को त्यागपत्र की औपचारिक घोषणा कर दी और कहा कि पार्टी के ‘भविष्य के विकास’ के लिए उन्होंने यह कदम उठाया है।

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कांग्रेस अध्यक्ष के पद के लिए संभावित उम्मीदवारों में पार्टी के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार शिंदे, मल्लिकार्जुन खड़गे, अशोक गहलोत और मोतीलाल वोरा के नाम की चर्चा है लेकिन इस पर सीडब्ल्यूसी की बैठक के बाद ही फैसला हो पाएगा। पार्टी के एक नेता ने कहा, ‘‘स्पष्ट नेतृत्व की गैर मौजूदगी में कांग्रेस अस्तित्व के संकट का सामना कर रही है और ऐसी स्थिति पार्टी के लिए ठीक नहीं है, जिसे कि अगले कुछ महीने बाद तीन राज्यों में विधानसभा चुनावों का सामना करना है।’’

कांग्रेस के एक अन्य नेता ने कहा कि गांधी परिवार के नेतृत्व में ही पार्टी एकजुट रह सकती है और परिवार के बाहर का कोई पार्टी का नेतृत्व करता है तो इससे असहमति बढ़ेगी। चुनावी हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए गांधी ने कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) को यह सुझाव भी दिया कि नया अध्यक्ष चुनने के लिए एक समूह गठित किया जाए क्योंकि उनके लिए यह उपयुक्त नहीं है कि वह इस प्रक्रिया में शामिल हों।

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