राम राजनीति नहीं, देशनीति हैं : देवकीनंदन

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पटना – भागवत और रामकथा वाचक देवकीनंदन ठाकुर ने कहा है कि प्रभु राम राजनीति नहीं हैं, राम तो देश नीति हैं। देश के हर वर्ग और हर धर्म के लोगों की आस्था के प्रतीक हैं राम। हर तबका चाहता है कि अयोध्या में राम मंदिर बनना चाहिए। मथुरा और काशी में भी मंदिर बनना चाहिए। मैं तो कहता हूं कि तुम इन तीन जगहों पर मंदिर बनने दो मैं तीन सौ जगहों पर मंदिर बनवा कर दूंगा, चाहे मुझे भीख ही क्यों न मांगनी पड़े। देवकीनंदन ने बुधवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में एक प्रश्न के जवाब में कहा कि पिछले पांच वर्षो से पटना कथा कहने आ रहा हूं। पटना के भक्तों की लगातार तादाद बढ़ती जा रही है। लोग तिलक-चंदन लगाकर कथा सुनने आ रहे हैं। खास बात ये है कि बड़ी संख्या में युवा वर्ग भी पहुंच रहा है। एक अन्य प्रश्न के जवाब में कहा कि सनातन धर्म कट्टरता नहीं सिखाता है। रामकथा या भागवत कथा से जीवन जीने का तरीका सीखने को मिलता है। धर्म कभी भी कट्टरता की बात नहीं कहता। पश्चिमी सभ्यता के खराब प्रभावों को लेकर कहा कि अपनी सभ्यता- संस्कृति को त्याग कर आधुनिक बनना सही नहीं है। देखिये समाज में किस तरह की घटनायें हो रही हैं। घर में भी मां-बहन सुरक्षित नहीं हैं। जबकि पहले लोग मां-बहनों की इज्जत की रक्षा के लिए अपनी जान तक दे देते थे। यह शोचनीय विषय है। जहां पहले रिश्ते ही सब कुछ होते थे आज रिश्तों का कोई मोल नहीं। अपने धर्म व संस्कारों को जीवन में उतारने की जरूरत है, तभी जीवन सुधरेगा। इच्छा मृत्यु पर सुप्रीम कोर्ट के आए फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि कोर्ट के फैसले का मैं सम्मान करता हूं। मैं नहीं जानता कि यह फैसला किस परिप्रेक्ष्य में दिया गया। मगर शास्त्र के मुताबिक ये गलत है। सनातन धर्म में इच्छा मृत्यु का कोई जिक्र नहीं, बल्कि इसकी संज्ञा अकाल मृत्यु दी जा सकती है। प्रभु श्री राम की आठवीं भक्ति है, जितना भी लाभ हो उसमें ही संतोष कर लेना चाहिए दूसरी ओर, विश्व शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट और विश्व शांति सेवा समिति, पटना के तत्वावधान में संजय गांधी स्टेडियम में आयोजित नौ दिवसीय श्री राम कथा के आठवें दिन हजारों की संख्या में भक्तों ने महाराज के श्रीमुख से कथा का श्रवण किया। उन्होंने कथा की शुरुआत करते हुए कहा कि प्रभु श्री राम की आठवीं भक्ति है जितना भी लाभ हो, उसमें ही संतोष कर लेना चाहिए।

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