राफेल सौदे में ‘मीडियापार्ट’ के नये खुलासे के बाद दसॉल्ट ने दी सफाई, कहा- हमने बिना दबाव के रिलायंस को चुना

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राफेल सौदे को लेकर सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि फ्रांस में भी हलचल है. राफेल सौदे को लेकर विपक्षी दल मोदी सरकार पर लगातार घोटाले का आरोप लगा रहे हैं. कांग्रेस राफेल विमान के दाम और इस सौदे में एचएएल को हटाकर रिलायंस को पार्टनर चुनने पर लगातार सवाल उठा रही है. राफेल सौदे को लेकर फ्रांस की खोजी खबरों की वेबसाइट ‘मीडियापार्ट’ के नये खुलासे के बाद अब दसॉल्ट की ओर से भी बयान आ गया है. दरअसल, ‘मीडियापार्ट’ वेबसाइट ने अपने हाथ लगे दसॉल्ट के एक दस्तावेज के हवाले से दावा किया है कि राफेल सौदे के बदले दसॉल्ट को रिलायंस से डील करने को कहा गया. मगर अब इस मुद्दे पर दसॉल्ट की तरफ से क्या सफ़ाई आई है. गौरतलब है कि बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार से राफेल डील के फैसले की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी मांगी है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कोई नोटिस जारी नहीं किया है, बल्कि कहा है कि वह जानकारी से खुद को संतुष्ट करना चाहता है.
मीडियापार्ट के दावे के बाद दसाल्ट की ओर से कहा गया है कि भारत और फ्रांस के सरकार के बीच यह समझौता हुआ है और बिना दवाब के दसॉल्ट ने रिलायंस को चुना. इतना ही नहीं, कई कंपनियों के साथ समझौता हुआ है. कंपनी ने कहा कि भारत और फ्रांस के बीच 36 रफ़ाल विमानों की ख़रीद की डील हुई है और भारत सरकार के नियमों के तहत समझौता है. कंपनी का दावा है कि क़ीमत का 50% भारत में ऑफ़सेट के लिए समझौता हुआ है. ऑफ़सेट के लिए भारतीय कंपनियों से समझौता हुआ है, जिनमें महिंद्रा, बीटीएसल, काइनेटिक आदि शामिल हैं.

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कंपनी का स्पष्टीकरण है कि उसने भारतीय नियमों (डिफेंस प्रॉक्यूरमेंट प्रोसीजर) और ऐसे सौदों की परंपरा के अनुसार किसी भारतीय कंपनी को ऑफसेट पार्टनर चुनने का वादा किया था. इसके लिए कंपनी ने जॉइंट-वेंचर बनाने का फैसला किया. दसॉल्ट कंपनी (दसॉ कंपनी) ने कहा है कि उसने रिलायंस ग्रुप को अपनी मर्जी से ऑफसेट पार्टनर चुना था और यह जॉइंट-वेंचर दसॉल्ट रिलायंस एयरोस्पेस लिमिटेड (DRAL) फरवरी 2017 में बनाया गया.

कंपनी अपने बयान में कहती है कि रिलांयस के अलावा, बीटीएसएल, DEFSYS, काइनेटिक, महिंद्रा, मियानी, सैमटेल.. कंपनियों के साथ भी दूसरे समझौते किए गए हैं. वहीं, सैकड़ों संभावित साझेदारों के साथ अभी बातचीत जारी है.
मीडिया पार्ट के दावे के बाद दसाल्ट की ओर से कहा गया है कि भारत और फ्रांस के सरकार के बीच यह समझौता हुआ है और बिना दवाब के दसॉल्ट ने रिलायंस को चुना. इतना ही नहीं, कई कंपनियों के साथ समझौता हुआ है. कंपनी ने कहा कि भारत और फ्रांस के बीच 36 रफ़ाल विमानों की ख़रीद की डील हुई है और भारत सरकार के नियमों के तहत समझौता है. कंपनी का दावा है कि क़ीमत का 50% भारत में ऑफ़सेट के लिए समझौता हुआ है. ऑफ़सेट के लिए भारतीय कंपनियों से समझौता हुआ है, जिनमें महिंद्रा, बीटीएसल, काइनेटिक आदि शामिल हैं.

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राफेल डील पर दसॉल्ट की सफाई

गौरतलब है कि पहले भी दसॉल्ट ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा था राफेल सौदा दो सरकारों के बीच हुआ है. लेकिन नए खुलासे ने इस दावे पर सवाल खड़ा कर दिया है और एक तरह से यह ओलांद के दावे की पुष्टि करता है. इससे पहले मीडिया पार्ट को दिए इंटरव्यू में फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने खुलासा किया था कि किस तरह रिलायंस को पार्टनर बनाने के लिए फ्रांस की सरकार को भारत सरकार ने कहा था.

मीडियापार्ट के अनुसार राफेल लड़ाकू विमान बनाने वाली कम्पनी दसॉल्ट के एक आंतरिक दस्तावेज के मुताबिक भारत से 36 राफेल विमान सौदे में अनिल अम्बानी की कंपनी रिलायंस डिफेंस को भारत में आफसेट पार्टनर बनाना आवश्यक था. मीडियापार्ट ने अपने लेख में कहा है कि दसॉल्ट के दस्तावेज में रिलायंस को आफसेट पार्टनर बनाने के लिए फ्रेंच शब्द ‘contrepartie’ का उपयोग किया. इस शब्द का अंग्रेजी में अर्थ “counterpart” है.

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