राज्य सरकार ने बदला बिहार उत्पाद सेवा का नाम ,मंत्रिपरिषद की बैठक में 20 एजेंडों पर लगी मुहर 

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बिहार सरकार ने उत्पाद कानून में संशोधन करने का संकेत तो दिया है परंतु इससे पहले इसके कैडर का नाम बदला है। इसके तहत राज्य में लागू नयी उत्पाद नीति-2015 के अंतर्गत बिहार उत्पाद सेवा का नाम बदलते हुए इसे बिहार मद्य निषेध सेवा कर दिया है़ । इसी तरह बिहार उत्पाद अराजपत्रित संवर्ग का नाम बदल कर बिहार मद्य निषेध अवर सेवा कर दिया गया है।महिला सिपाहियों को विशेष तौर पर प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए चार केंद्रों को विकसित करते हुए इनमें तमाम मूलभूत सुविधाएं मुहैया करायी जायेंगी। पहले चरण में जिन चार केंद्रों में सुविधाएं विकसित की जायेंगी, उनमें डेहरी स्थित बीएमपी-2, मुजफ्फरपुर स्थित बीएमपी-6, पटना स्थित बीएमपी-5 और सासाराम में मौजूद महिला बटालियन शामिल हैं। इनमें निर्माण कार्य कराने के लिए 53 करोड़ 21 लाख रुपये जारी किये गये हैं। ई-चालान से जमा होने वाले गैर-न्यायिक स्टांप के रुपये होंगे वापस, इसके लिए बिहार स्टांप नियमावली, 2018 का गठन नये सिरे से किया गया है।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मुख्य सचिवालय में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में यह निर्णय लिया गया है। बैठक में लिये सभी महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी देते हुए कैबिनेट प्रधान सचिव अरुण कुमार सिंह ने बताया कि 20 महत्वपूर्ण मुद्दों पर मुहर लगी इसके तहत राज्य में लागू सातवें वेतनमान के मद्देनजर बिहार उत्पाद सेवा का नया नामकरण करने का निर्णय लिया गया है। इससे पदों का पुनर्गठन होने से पदों में समानुपातिक वृद्धि होने से कर्मियों को प्रोन्नति के अधिक अवसर मिलेंगे साथ ही संपूर्ण मद्य निषेध तंत्र सुदृढ़ हो सकेगा। मुजफ्फरपुर जिले में दो रेल पीपी (पुलिस पोस्ट) को उत्क्रमित करते हुए इन्हें रेल थाना बनाने की मंजूरी दी गयी है। हाजीपुर पीपी को रेल थाना बनाते हुए यहां 43 पदों और सीतामढ़ी पीपी को रेल थाना में उत्क्रमित करते हुए 38 पदों के सृजन की स्वीकृति दी गयी है। उन्होंने कहा कि तीन मेडिकल कॉलेजों में बहाल होंगे 54 कर्मी, प्रत्येक कॉलेज में 18-18 कर्मी बहाल होंगे। इसमें बेतिया स्थित राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, मधेपुरा राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय और पावापुरी स्थित वर्द्धमान आयुर्विज्ञान संस्थान शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बंद पड़े लोक उपक्रमों के कर्मियों को मिलेगा बकाया वेतन, साथ ही ऐसे उपक्रमों के कर्मियों के बकाये वेतन का आकलन करने और इसका भुगतान किस तरह से किया जाये। इसके लिए संबंधित विभागों को प्रस्ताव तैयार करने के लिए कहा है । एक अनुमान के मुताबिक राज्य में ऐसे बंद पड़े उपक्रमों की संख्या 35-40 के करीब है। श्री सिंह ने बताया कि उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश पर त्वरित कार्रवाई करने हेतु विधि विभाग के अन्तर्गत महाधिवक्ता के कार्यालय में नोडल पदाधिकारी के रूप में बिहार सचिवालय सेवा के दो प्रशाखा पदाधिकारी के पद सृजन की स्वीकृति प्रदान की गयी। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के तहत बिहार राज्य मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त मदरसों/ सरकारी मदरसों में शैक्षणिक सुधार हेतु मूलभूत सुविधाएं एवं आधारभूत संरचना उपलब्ध कराये जाने से संबंधित राज्य संपोषित ‘‘बिहार राज्य मदरसा शिक्षा सुदृढ़ीकरण योजना’ एवं इससे संबंधित मार्ग निर्देशिका की स्वीकृति प्रदान की गयी। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के तहत किशनगंज जिलान्तर्गत एसएसबी कैम्प 12वीं बटालियन, डुबाटोली में बीओपी निर्माण हेतु जमीन हस्तांतरण की स्वीकृति प्रदान की गयी। जल संसाधन विभाग के अन्तर्गत मुहाने नदी बहुद्देशीय मध्यम सिंचाई योजना, प्राक्कलित राशि की प्रशासनिक एवं व्यय की स्वीकृति तथा तियरा पम्प हाउस का निर्माण एवं इसके वितरण पण्राली का जीर्णोद्धार कार्य की स्वीकृति दी गयी। बटेश्वरस्थान गंगा पम्प नहर योजना की प्रशासनिक तथा व्यय की स्वीकृति प्रदान की गयी। उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग के अन्तर्गत उच्च शिक्षा निदेशालय अन्तर्गत संचालित बांग्ला अकादमी, पटना में कार्यरत कर्मियों को अन्य अकादमियों की भांति पंचम वेतन पुनरीक्षण के समतुल्य वेतनानुदान तात्कालिक प्रभाव से स्वीकृति दी गयी है। बिहार राज्यान्तर्गत कटिहार में निजी क्षेत्र में अल-करीम विविद्यालय की स्थापना एवं संचालन की अनुमति प्रदान करने की भी स्वीकृति प्रदान की गयी। बिहार लोक सेवाओं का अधिकार अधिनियम, 2011 के तहत श्रम संसाधन विभाग के अधीन दो नयी सेवाओं बिहार राज्य प्रवासी मजदूर दुर्घटना अनुदान योजना (दुर्घटना मृत्यु की स्थिति में अनुदान) बिहार राज्य प्रवासी मजदूर दुर्घटना अनुदान योजना (पूर्ण स्थायी अपंगता एवं स्थायी आंशिक अपंगता की स्थिति में अनुदान) को समावेशित करने की स्वीकृति प्रदान की गयी। पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग अन्तर्गत 324 पदों के विरुद्ध संविदा के आधार पर नियोजित पशु चिकित्सकों की नियोजन अवधि का विस्तार आदेश निर्गत की तिथि से एक और वर्ष के लिए अथवा उक्त पद पर पशु चिकित्सकों के नियमित नियुक्ति होने तक, जो पहले हो, तक के लिए विस्तार के संबंध में भी आज के मंत्रिपरिषद की बैठक की निर्णय लिया गया है।

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