राज्य के सांस्कृतिक विकास में कला-संस्कृति का है महत्वपूर्ण योगदान

0
168
PATNA - MANTAREE KALA SASKARITE KRISHAN KUMAR RISHE PRESS CONFRANCE KARTA

कला, संस्कृति एवं युवा विभाग सरकार के महत्वपूर्ण विभागों में से एक है जो राज्य की संस्कृति के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। इसको विस्तारित करने के लिए इसे चार निदेशालयों में विभाजित किया गया है। ये हैं- छात्र एवं युवा कल्याण निदेशालय, सांस्कृतिक कार्य निदेशालय, संग्रहालय निदेशालय व पुरातत्व निदेशालय। छात्र एवं युवा कल्याण निदेशालय विभाग का एक महत्वपूर्ण निदेशालय है, जो राज्य में खेलकूद और युवा कार्य के प्रोत्साहन के लिए कार्य करता है। निदेशालय के अंतर्गत एक स्वशासी संस्था बिहार राज्य खेल प्राधिकरण भी है। निदेशालय के द्वारा योजनाओं का कार्यान्वयन कराया जाता है। इसके तहत खेल सम्मान एवं प्रोत्साहन, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट, विद्यालय स्तर पर 29 खेल विधाओं में जिला स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। राष्ट्रीय विद्यालय खेल प्रतियोगिता से पूर्व राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले चयनित खिलाड़ी, दल के खिलाड़ियों के लिए ट्रेनिंग शिविरों का विभिन्न स्थानों पर आयोजन किया जाता है। खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए अलग से सहायता राशि स्वीकृत की जाती है। खिलाड़ियों के प्रैक्टिस के लिए प्रखंड स्तर पर स्टेडियम का निर्माण करने का काम किया जाता है। आवासीय प्रशिक्षण के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्र के खिलाड़ियों को प्रोत्साहित किया जाता है।निदेशालय के जरिए राज्य में सांस्कृतिक विरासत को गति प्रदान की जा रही है। विभाग इसके जरिए राज्य की सुदूर पंचायतों तक पहुंचने और गांवों में अपनी लोक संस्कृति की अलख जगाने वाले गुमनाम, प्रतिभाशाली कलाकारों को तलाशने का कार्य कर रहा है। विभाग की ओर से संस्कृति के विकास के लिए संस्थागत संरचनात्मक निर्माण, नियमित उत्सव-महोत्सव का आयोजन और विभिन्न योजनाओं का कार्यान्वयन कराया जाता है। इसके तहत बिहार कला पुरस्कार, कला कल्याण कोष, कला के प्रोत्साहन हेतु कला संस्थाओं को सहायता, चाक्षुष एवं प्रदर्श कला से संबंधित डॉक्यूमेंटेशन एवं प्रकाशन, बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम, प्रेक्षागृह-सह-आर्ट गैलरी का निर्माण कराना इसकी प्राथमिकताओं में शामिल है।बिहार राज्य ने गंगा घाटी में सभ्यता के प्रादुर्भाव से लगभग 1000 वर्षो तक पूरे भारतीय भू-भाग को राजनीतिक और सांस्कृतिक नेतृत्व प्रदान किया। फलत: पूरे बिहार राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में सांस्कृतिक विरासत की बहुलता है। इस विरासत को संरक्षित, सुरक्षित करने, सुरुचि पूर्ण ढंग से दर्शकों के लिए प्रदर्शित करने और अक्षुण्ण रूप से आने वाली पीढ़ी को सौंपना संग्रहालय निदेशालय का दायित्व है। इस उद्देश्य से सरकार ने पूरे राज्य में 23 संग्रहालय स्थापित किये हैं। राज्य के संग्रहालयों को आधुनिक तकनीक और नव-संग्रहालयवाद की अवधारणा के अनुरूप पुनर्सयोजन के लिए संग्रहालय कटिबद्ध है। आमजन को संग्रहालय से जोड़ने के उद्देश्य से राज्य के लगभग सभी संग्रहालयों में विरासत क्विज, संग्रहालय देखो-जवाब दो, स्थल चित्रांकन, लोकप्रिय व्याख्यान आदि कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। संग्रहालय विकास विषयक रोडमैप, पटना में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के संग्रहालय की स्थापना, वैशाली में बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय-सह-स्मृति स्तूप की स्थापना, चंद्रधारी संग्रहालय दरभंगा व गया संग्रहालय, गया का विकास, सिताब दियारा (जिला-सारण) में लोक नायक जय प्रकाश नारायण स्मृति भवन व पुस्तकालय का निर्माण, राज्य में संग्रहालयों के सुदृढ़ीकरण, संग्रहालयों को संस्कृति के जीवंत केंद्र केरूप में स्थापित करना, उद्यान का विकास, संग्रहीत पुरावशेषों का शत-प्रतिशत डिजिटल अभिलेखीकरण, चेचर संग्रहालय, चेचर (वैशाली) का अधिग्रहण और सुदृढ़ीकरण, पटना संग्रहालय, पटना का विकास, बिहारशरीफ संग्रहालय का विकास, महात्मा गांधी के चंपारण सत्याग्रह के वर्ष 2017 में 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन प्रमुख है।वर्ष 1988 में पुरातत्व निदेशालय एक पृथक निदेशालय के रूप में अस्तित्व में आया। इसके पहले पुरातत्व एवं संग्रहालय निदेशालय (संयुक्त रूप से) की स्थापना वर्ष 1971-72 में की गई थी। पुरातत्व निदेशालय के पृथक अस्तित्व के पीछे राज्य के समृद्ध एवं विपुल पुरातात्विक और ऐतिहासिक धरोहर की खोज, अन्वेषण, उत्खनन व संरक्षण जैसे कायरे को संपन्न किया जाना था। इन कायरे के अतिरिक्त पुरातत्व निदेशालय संगोष्ठियों, कार्यशालाओं और उपयोगी धरोहर से संबंधित पुस्तकों- प्रतिवेदनों के प्रकाशन के माध्यम से धरोहर के प्रति लोगों की जागरूकता को बढ़ाने का काम करता रहा है। इसके अंतर्गत उत्खनन, अन्वेषण और सव्रेक्षण का कार्य है। राज्य में पुरातत्व निदेशालय की ओर से पूर्व में कई महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों के उत्खनन करवाए गए हैं जिनमें चिरांद, सोनपुर, ताराडीह, बलिराजगढ़, कटरागढ़ आदि प्रमुख हैं। हाल के 4 वर्षो में चार प्रमुख स्थलों -चौसा (बक्सर), सलेमपुर (मधुबनी), तेल्हाड़ा (नालंदा) के उत्खनन निदेशालय द्वारा करवाए गए हैं। चौसा में गुप्तकालीन मंदिर का स्थापत्य तो चेचर में प्रागैतिहासिक अवशेष बड़ी संख्या में प्राप्त हुए हैं। वहीं तेल्हाड़ा में एक प्राचीन विविद्यालय और बौद्ध मठ का पता चला, जो नालंदा विविद्यालय से भी 400 साल अधिक पुराना है। राज्य में गत वर्ष 20 स्थलों का पुरातात्विक अन्वेषण कर कार्य किए जाने का प्रयास जारी है। पुरातत्व निदेशालय के अंतर्गत प्रकाशन एवं मुद्रण, संगोष्ठी और कार्यशालाओं का आयोजन, पुरास्थलों एवं स्मारकों का संरक्षण व सौंदर्यीकरण, पुरातत्व भवन, पुरास्थलों की घेराबंदी और अन्य नई संरचनाओं, पुरातात्विक स्थलों की सुरक्षा व रख-रखाव से संबंधित दायित्व, बिहार विरासत विकास समिति को अनुदान आदि कार्य आते हैं।

यह भी पढ़े  जीतन राम मांझी की मुश्किलें बढ़ी, बागी बने नरेंद्र सिंह ने ठोका 'हम' पर दावा

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here