राज्य के लोग पढ़ें- आगे बढ़ें, यही मेरी ख्वाहिश है : मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शिक्षा ऋण चुकाने में असमर्थ छात्रों को बड़ी सौगात देते हुए कहा कि उनकी सरकार शिक्षा ऋण चुका सकने में असमर्थ छात्रों का ऋण माफ करने पर भी विचार करेगी। श्री कुमार ने बुधवार को मुख्यमंत्री सचिवालय के संवाद कक्ष में बिहार राज्य शिक्षा वित्त निगम का उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते कहा कि आज स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को गति प्रदान करने के लिए राज्य सरकार ने बैंकों के बजाय बिहार राज्य शिक्षा वित्त निगम की शुरूआत की। स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का लक्ष्य ग्रॉस इनरॉलमेंट रेशियो को बढ़ाना है। 12वीं कक्षा के बाद शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों की संख्या मात्र 13.9 हुआ करती थी, लेकिन इस योजना के लागू होने के बाद यह बढ़कर 14.3 प्रतिशत हो गई है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह लगभग 24 प्रतिशत है। हमलोगों ने इसमें कम से कम 30 प्रतिशत तक की वृद्धि का लक्ष्य रखा है और आगे 35 से 40 प्रतिशत तक ले जाना है। लोग पढ़ें और आगे बढ़ें, यही हमारी ख्वाहिश है। उन्होंने कहा कि बिहार के लोगों में बैंकों से ऋण लेने की प्रवृत्ति कम रही है। लोग घबराते हैं लेकिन इस वित्त निगम की स्थापना के बाद अधिक से अधिक विद्यार्थी इसका लाभ उठाएं। डरने की कोई बात नहीं है। यह सरकार का वित्त निगम है और सरकार आपकी है। पढ़ाई पूरी करने के बाद ऋण को लौटाना है। अगर जरूरत हुई तो जो लौटाने में असमर्थ होंगे, भविष्य में सरकार ऋण माफी के लिए विचार करेगी। डेढ़ वर्ष में किए गए काम के अनुभव के बाद जरूरी संशोधन किए गए हैं ताकि यह ठीक ढंग से काम कर सके। धनराशि का प्रबंध किया गया है। मिशन मोड में काम किया जा रहा है। बिहार विकास मिशन द्वारा इसकी मॉनिटरिंग की जाती है। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ को भी उपलब्ध कराया जाता है। मुझे विास है कि इसके बेहतर नतीजे आयेंगे। शिक्षा विभाग अधिक से अधिक छात्र-छात्राओं को इसकी जानकारी उपलब्ध कराएगा। समाज में बुनियादी तौर पर परिवर्तन लाने वाली चीजों को प्रमुखता मिलनी चाहिए। हमारा उद्देश्य है कि जीईआर बढ़े और ज्यादा से ज्यादा छात्रों को इसका लाभ मिले। उच्च शिक्षा में विकास से समाज में बहुत बड़ा परिवर्तन आएगा। वित्त विभाग और शिक्षा विभाग को इस उपलब्धि के लिए बधाई देता हूं। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना उच्च शिक्षा प्राप्त करने में महत्वपूर्ण साबित होगी। बैंकों से मिलने वाले शिक्षा ऋण में तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को ही लाभ होता है। स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना में 12वीं पास विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ जनरल एजुकेशन प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को ऋण उपलब्ध होगा। इस योजना में मैट्रिक पास करने के बाद पॉलिटेक्निक पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भी लाभ मिलेगा। बैंकों की जरूरी शत्रे मानने के बावजूद बैंकों द्वारा इस योजना के अंतर्गत स्वीकृत किए जाने वाले ऋण में काफी विलम्ब होता था। 18 हजार 242 आवेदन स्वीकृत किए गए हैं, जिसमें से 12,050 आवेदकों का ऋण स्वीकृत किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोगों ने इस योजना को गति देने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के तहत अपना वित्त निगम बनाने का फैसला लिया। इसके लिए शिक्षा विभाग और वित्त विभाग ने काफी मेहनत की है और आज इस वित्त निगम का उद्घाटन हुआ है। इसके माध्यम से मिलने वाले ऋण पर ब्याज की दर मात्र 4 प्रतिशत है। दिव्यांगों, छात्राओं एवं ट्रांसजेंडर को सिर्फ 1 प्रतिशत ब्याज पर ऋण मुहैया कराया जाएगा। इस वित्त निगम में कार्यपालक पदाधिकारी सह प्रबंध निदेशक की नियुक्ति की गयी है। इसके साथ जरूरी स्टाफ की भी नियुक्ति की गयी है। इस निगम के साथ जिला केन्द्र के डीआरसीसी को भी जोड़ दिया गया है। कोई भी छात्र डीआरसीसी में जाकर आवेदन करेगा और वहीं से उसका आवेदन वित्त निगम चला जाएगा। स्वीकृति के बाद उसे राशि मिलनी शुरू हो जाएगी। विद्यार्थियों को पढ़ने में सहुलियत होगी। बिहार से सटे राज्यों में बिहार के पढ़ने वाले विद्यार्थी भी इसका लाभ उठा सकते हैं। पहले से जो छात्रवृत्ति योजना चलाई जा रही थी, पोस्ट मैट्रिक योजनाएं, जो अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अति पिछड़े वर्ग, अल्पसंख्यक वगोर्ं को लाभ मिलता रहेगा।

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