राज्यसभा से पास नहीं हुआ तीन तलाक

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संसद का गत 15 दिसंबर से शुरू हुआ शीतकालीन सत्र आज अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। इस दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित हुए लेकिन एक बार में तीन तलाक को फौजदारी अपराध बनाने के प्रावधान वाला महत्वपूर्ण विधेयक लोकसभा में पारित होने के बाद राज्यसभा में लंबित हो गया क्योंकि एकजुट विपक्ष इसे प्रवर समिति में भेजने की मांग पर अड़ा रहा। लोकसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने से पहले अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने बताया कि सोलहवीं लोकसभा के इस तेरहवें सत्र में व्यवधानों और उसके परिणाम स्वरूप स्थगनों के कारण 14 घंटे और 51 मिनट का समय नष्ट हुआ तथा सभा ने 8 घंटे 10 मिनट देर तक बैठकर विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर र्चचा की। राज्यसभा में इस सत्र के दौरान 34 घंटे विभिन्न मुद्दों पर हुए हंगामे की भेट चढ़ गये। उच्च सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने से पहले सभापति वेंकैया नायडू ने कहा, हम सभी के लिए यह समीक्षा, स्मरण और आत्मावलोकन करने का विषय है कि हमने सदन की कार्यवाही का संचालन कैसे किया। उन्होंने सभी सदस्यों को राजनीतिक प्रक्रि या का हिस्सा बताते हुये कहा आप मुझसे इस बात से सहमत होंगे कि भले ही संसद राजनीति का एक महत्वपूर्ण संस्थान है, किन्तु यह विशिष्ट अर्थो में राजनीति का विस्तार नहीं हो सकता, जो गहरे विभाजन और विद्वेष से भरी होती है। लोस में वर्ष 2017- 18 के लिये अनुदान की अनुपूरक मांगों के दूसरे और तीसरे बैच पर छह घंटे से अधिक र्चचा हुई और संबंधित विनियोग विधेयक पारित किये गए। सत्र के दौरान लोकसभा में पारित होने वाले महत्वपूर्ण विधेयकों में केंद्रीय सड़क निधि संशोधन विधेयक 2017, स्थावर संपत्ति अधिग्रहण और अर्जन संशोधन विधेयक 2017, दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्य क्षेत्र विधियां विशेष उपबंध दूसरा संशोधन विधेयक 2017, माल एवं सेवाकर राज्यों को प्रतिकर संशोधन विधेयक 2017, मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक 2017, उच्च एवं उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश वेतन एवं सेवा शर्त संशोधन विधेयक 2017 शामिल हैं । लोकसभा ने एक बार में तीन तलाक या तलाक ए बिद्दत को फौजदारी अपराध बनाने के प्रावधान वाले मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। किन्तु रास में यह लंबित हो गया क्योंकि एकजुट विपक्ष इसे प्रवर समिति में भेजने की मांग पर अड़ा रहा। उच्च सदन में नेता सदन अरुण जेटली ने कहा कि इस विधेयक को जल्द पारित करना इसलिए जरूरी है क्योंकि उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले में छह माह के भीतर कानून बनाकर तीन तलाक को प्रतिबंधित करने को कहा है। सत्र के दौरान कंपनी संशोधन विधेयक, भारतीय प्रबंध संस्थान और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली विधि (विशेष उपबंध) संशोधन विधेयक सहित नौ सरकारी विधेयक पारित किये गये।

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