राजनीति में नहीं आते तो बड़े साहित्यकार होते राजेंद्र बाबू

0
127

अद्भुत मेधा के विलक्षण महापुरु ष थे देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद। विद्वता और विनम्रता के पर्यायवाची थे वे। हिन्दी भाषा और साहित्य की उन्नति में उनके योगदान को भुला नहीं जा सकता। बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन की स्थापना और उसके विकास में उन्होंने अविस्मरणीय योगदान दिया। सम्मेलन के अध्यक्ष भी रहे और संपूर्ण भारतवर्ष में भ्रमण कर हिन्दी का प्रचार किया। उनकी आत्म-कथा, हिन्दी साहित्य में एक प्रशंसनीय स्थान रखती है। यदि वे राजनीति में नहीं होते तो हिन्दी भाषा और साहित्य के महान उन्नायक के रूप में स्मरण किये जाते। यह बातें रविवार को यहां भारत के प्रथम राष्ट्रपति देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती की पूर्व संध्या पर ‘‘हिन्दी साहित्य सम्मेलन में हिन्दी में आत्मकथा-साहित्य और डॉ. राजेंद्र प्रसाद’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए सम्मेलन अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने कहीं। उन्होंने कहा कि, हिन्दी में आत्मकथा साहित्य एक विशेष स्थान रखता है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से लेकर साहित्य सम्मेलन के वर्तमान प्रधानमंत्री डॉ. शिववंश पाण्डेय तक अनेक विद्वानों के नाम आते हैं, जिन्होंने आत्मकथा-साहित्य को उन्नत किया है। यह साहित्य की एक ऐसी विधा है, जो नई पीढ़ी का प्रचुर मार्गदर्शन करती है। संगोष्ठी का विषय प्रवेश कराते हुए सम्मेलन के प्रधानमंत्री डॉ. शिववंश पाण्डेय ने कहा कि राजेंद्र बाबू की आत्मकथा पढ़ने से केवल उनके जीवन का ही नहीं उस समय के संपूर्ण भारतवर्ष की दशा-दिशा दिखाई देती है। वरिष्ठ साहित्यकार नृपेंद्रनाथ गुप्त ने कहा कि राजेंद्र बाबू यदि संविधान-सभा में नहीं होते तो हिन्दी देश की राजभाषा नहीं हो पाती। डॉ. शंकर प्रसाद ने कहा कि महापुरु षों की आत्मकथाएं सदा से ही पाठकों को आकर्षित करती रही है। संगोष्ठी में, ओम प्रकाश पाण्डेय, डॉ. उमेशचंद्र शुक्ल, डॉ. नागेश्वर प्रसाद यादव, सुनील कुमार दूबे, आचार्य आनंद किशोर शास्त्री, डॉ. आर प्रवेश, डॉ. विनय कुमार विष्णुपुरी, डॉ. मनोज गोवर्द्धनपुरी, शुभचंद्र सिन्हा, रमेश कुमार मिश्र, अजरुन प्रसाद सिंह, जय प्रकाश पुजारी, विभा अजातशत्रु, निशिकांत मिश्र ने भी अपने विचार व्यक्त किए। संचालन योगेन्द्र प्रसाद मिश्र तथा धन्यवाद-ज्ञापन कृष्ण रंजन सिंह ने किया।

यह भी पढ़े  ‘मोदी है तो मुमकिन है महंगाई पर नियंत्रण

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here