‘राजधानी की फिजां आयी नहीं रास मुझे’

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GANDHI MAIDAN ME IPTA DAWARA NUKKAR NATAK PET KI BHOOK KA MANCHAN

‘पांव सरयू में अभी राम ने धोये भी ना थे, कि नजर आये वहां खून के गहरे धब्बे/ पांव धोये बिना सरयू के किनारे से उठे, राजधानी की फिजां आई नहीं रास मुझे/ छह दिसम्बर को मिला दूसरा वनवास मुझे।’- कैफी आजमी की यह नज्म तनवीर अख्तर ने बुधवार को भिखारी ठाकुर रंगभूमि में पढ़ी। बाबरी मस्जिद के विध्वंस के 25 वर्ष को चिह्नित करते हुए इप्टा, प्रेरणा, स्टग्र्लर, नव सांस्कृतिक विहान द्वारा ‘‘आवाज दो .. रंगभूमि नाट्य जमघट, 2017 का आयोजन किया गया । कार्यक्रम का प्रारंभ जोगीरा से किया गया और तनवीर अख्तर ने कहा कि रंग-रूप, बोली-बानी, धर्म-कर्म, कपड़ा-लत्ता, खान-पान के नाम पर फैलायी जा रही नफरत, झूठ, अफवाह और हिंसा को ना कहें। हम संस्कृतिकर्मी प्रेम, करुणा, अहिंसा और भाईचारे के पक्षधर हैं। इप्टा ने श्रीकांत के आलेख पर आधारित ‘‘मैं बिहार हूं’ की प्रस्तुति दी। नव सांस्कृतिक विहान की कलाकार वारु णी ने साहिर लुधियानवी की नज्म ‘‘ये किसका लहू है कौन मरा..’ का गायन किया और नाटक ‘‘पेट की भूख’ की प्रस्तुति की। भिखारियों के शोषण पर आधारित इस नाटक में सामाजिक और राजनैतिक अंतर्विरोध को दर्शाया । हसन इमाम द्वारा लिखित और निर्देशित नाटक ‘‘पोल खोल पोर-पोर’ प्रेरणा नाट्य समूह ने पेश किया। वर्तमान राजनैतिक अवस्था पर कटाक्ष करते हुए इस नाटक ने सरकार की नीतियों की समीक्षा की। कोरस नाट्य समूह की समता ने कहा कि एक राष्ट्र, एक टैक्स लगाया गया तो हमारे समाज में एक जैसा व्यवहार क्यों नहीं हो रहा है। संविधान के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है। हमें संविधान में जो अधिकार प्राप्त है उसके लिए सजग रहें और एकजुट रहें। कार्यक्रम के अंत में रेनबो होम, महिला जागरण की बच्चियों ने मिडास नाटक की प्रस्तुति सुमित ठाकुर के निर्देशन में की।

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