यूपीएससी परीक्षा में हैदराबाद के अनुदीप बने टॉपर ,बिहार के अतुल प्रकाश को 4th रैंक

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यूपीएससी सिविल सर्विसेज 2017 की परीक्षाओं के परिणाम की घोषणा हो गई है. इस परीक्षा में हैदराबाद के दुरीशेट्टी ने देशभर में टॉप किया है. वहीं अनु कुमारी ने दूसरा और सचिन गुप्ता ऑल इंडिया रैंकिग में तीसरे स्थान मिला है. बिहार के अतुल प्रकाश ने इस परीक्षा में चौथा स्थान हासिल किया है. 

यूपीएससी ने सिविल सर्विसेज परीक्षा का अंतिम परिणाम शुक्रवार को जारी कर दिया। इस बार के टॉपर हैदराबाद के अनुदीप दुरिशेट्टी हैं जबकि दूसरे नंबर पर अनु कुमारी और तीसरे नंबर पर सचिन गुप्ता का नाम है।बिहार के अतुल प्रकाश ने इस परीक्षा में चौथा स्थान हासिल किया है.

अतुल बिहार के बक्सर के रहने वाले हैं और वो फिलहाल उनका परिवार फिलहाल पटना में रह रहा है. उनके पिता अशोक कुमार राय रेलवे में इंजीनियर हैं. उनका कहना है कि मेरा परिवार आर्थिक रुप से ठीक है लिहाजा मेरे दिमाग में बात की थी मुझे कुछ ऐसा करना है कि ताकि मैं समाज को वापस कुछ दे सकूं. सिविल सेवा के जरिए समाज के लिए बहुत कुछ किया जा सकता है. इस सफलता के लिए मैं टीचर और पैरेंट्स सभी को धन्यवाद देता हूं. अतुल के पिता अशोक राय ने न्यूज 18 से फोन पर बात कर खुशी जाहिर की हैं. उन्होंने कहा कि बेटी की सफलता ने बिहार का मान बढ़ाया है.

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बिहार में कहलगांव के जगन्नाथ प्रसाद गुप्ता की पुत्री ज्योति कुमारी ने इस परीक्षा में दूसरी बार सफलता प्राप्त की है तथा इस बार उनकी रैंक 53 है। आरा के बड़हरा गांव के नीतीश कुमार ने 67 वीं रैंक प्राप्त की है, जबकि दरभंगा के दयानंद झा के पुत्र ज्ञानेश्वर झा ने इस परीक्षा में 212 वां स्थान प्राप्त किया। मेरिट लिस्ट में कुल 990 लोगों के नाम हैं, जिसमें 476 प्रतिभागी सामान्य वर्ग के हैं जबकि 275 प्रतिभागी पिछड़ा वर्ग, 165 प्रतिभागी अनुसूचित जाति तथा 74 प्रतिभागी अनुसूचित जनजाति के हैं। अभी यह नहीं पता चल पाया है कि इस बार बिहार के कितने लोगोें ने इस परीक्षा में सफलता प्राप्त की है, लेकिन विशेषज्ञों ने उम्मीद जताई है कि इस बार बिहार समेत सभी हिंदीभाषी छात्रों का रिजल्ट अच्छा होगा। शिक्षक व इतिहासविद् डॉ. एम. रहमान ने बताया कि यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा में सी – सैट लागू किए जाने के बाद से हिंदी भाषी क्षेत्र के रिजल्ट में लगातार गिरावट आयी थी, लेकिन इस बार सी-सैट की अनिवार्यता हटाने से इसके परिणाम में सुधार हुआ है तथा अभी तक जो जानकारी मिल पा रही है, बिहार, उत्तर प्रदेश समेत हिन्दी क्षेत्र के राज्यों के रिजल्ट में सुधार आने का अनुमान है।

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संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के सिविल सेवा परीक्षा 2017 के फाइनल रिजल्ट आ गये हैं. इस परीक्षा में कुल 990 लोगों को सफलता मिली है, जिसमें 51 (5.15 फीसदी) मुस्लिम हैं. आजाद भारत के इतिहास में यह पहला मौका है, जब इतनी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग आइएएस की परीक्षा में पास हुए हैं. टॉप 100 में 6 मुस्लिम हैं, जिसमें तीन महिलाएं हैं. इनके नाम समीरा एस (28वीं रैंक) जमील फातिमा जेबा (62वीं रैंक) और हसीन जेहरा रिजवी (87वी रैंक) हैं. वर्ष 2016 में शीर्ष 100 उम्मीदवारों में 10 और 2015 में मात्र एक मुस्लिम उम्मीदवार जगह बना पाया था.

शुक्रवार की शाम UPSC की आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जारी रिजल्ट में हैदराबाद के अनुदीप डुरीशेट्टी ने ऑल इंडिया लेवल पर टॉप किया. उत्तर प्रदेश के बिजनौर के रहने वाले साद मियां खान ने 25वीं रैंक हासिल की, जो कि मुस्लिम उम्मीदवारों में सबसे ऊंची रैंकिंग है. मेरिट लिस्ट में कुल 990 लोग हैं, जिसमें 476 कैंडिडेट जनरल केटेगरी के हैं, 275 ओबीसी, 165 एससी और 74 एसटी श्रेणी के हैं. ज्ञात हो कि वर्ष 2016 में 50, 2015 में 37, 2014 में 40 और 2013 में 34 मुस्लिम अभ्यर्थियों ने सिविल सेवा की परीक्षा पास की.

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यहां बताना प्रासंगिक होगा कि वर्ष 2011 में हुई जनगणना के अनुसार, मुसलमानों की कुल आबादी 14.23% है, लेकिन वे शिक्षा और संसाधनों की कमी के कारण अक्सर शीर्ष सरकारी सेवाओं में बहुत कम प्रतिनिधित्व करते हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सरकारी नौकरियों में मुसलमानों का प्रतिशत 8.57 है. 2006 में भारतीय मुसलमानों के हालात पर आयी जस्टिस सच्चर समिति की रिपोर्ट में बताया गया था कि सिविल सेवा में मुसलमान सिर्फ तीन प्रतिशत हैं, जबकि पुलिस सेवा में यह संख्या चार प्रतिशत है.

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