युग प्रवर्तक साहित्यकार थे जयशंकर प्रसाद

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SAHITAYA SAMMELAN ME JAISHANKAR PRASAD KI JAYANTI PER PAG PAG PARIKSHA BOOK RELESE PROGRAM EDUACTION MINITER KRISHNANDAN VERMA

हिंदी साहित्य के महान सेवक जयशंकर प्रसाद सच्चे अर्थो में महाकवि थे। उन्होंने अपनी अचंभित करने वाली साहित्यिक प्रतिभा से यह सिद्ध किया कि किसी कवि को महान बनाने के लिए जो गुण होते हैं वे सब उनमें थे। उनको स्मरण करना अपने गौरव को स्मरण करने के समान है। यह बातें बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन में महाकवि जयशंकर प्रसाद की जयंती पर आयोजित समारोह में वरिष्ठ कथाकार छट्ठू ठाकुर की पुस्तक पग-पग परीक्षा का लोकार्पण करते हुए बिहार के शिक्षा मंत्री कृष्ण नंदन वर्मा ने कहीं। श्री वर्मा ने कहा कि श्री ठाकुर एक कर्मठ अधिकारी भी हैं और साहित्य के एक प्रमुख हस्ताक्षर भी। उनकी पुस्तक का लोकार्पण कर, और विशेष रूप से साहित्य सम्मेलन भवन में आकर अत्यंत गौरव की अनुभूति हो रही है। अध्यक्षता करते हुए सम्मेलन के अध्यक्ष डा. अनिल सुलभ ने कहा कि महाकवि जयशंकर प्रसाद आधुनिक हिंदी साहित्य के सर्वाधिक चर्चित छायावादी-युग के एक महत्वपूर्ण स्तम्भ ही नहीं, अपितु युग-प्रवर्तक साहित्यकार थे। उनकी कालजयी कामायनी विश्व-महाकाव्य में परिगणित होती है। उन्होंने काव्य में ही नहीं, बल्कि नाटक, कहानी, उपन्यास समेत साहित्य की प्राय: समस्त विधाओं में लिखा। वरिष्ठ कथाकार जियालाल आर्य, सम्मेलन के प्रधानमंत्री आचार्य श्रीरंजन सूरिदेव, भगवती प्रसाद द्विवेदी, प्रो. वासुकी नाथ झा, डा. कल्याणी कुसुम सिंह, युगलकिशोर प्रसाद, कवि अमियनाथ चटर्जी, उमाशंकर शर्मा, चंद्रदीप प्रसाद, डा. मेहता नगेंद्र सिंह, ओमप्रकाश पांडेय प्रकाश, अमर कांत मिश्र, कवि जय प्रकाश पुजारी तथा रमेश कंवल ने भी अपने विचार व्यक्त किए। अतिथियों का स्वागत सम्मेलन के उपाध्यक्ष डा. शंकर प्रसाद, धन्यवाद-ज्ञापन डा. नागेश्वर यादव एवं संचालन कवि योगेन्द्र प्रसाद मिश्र ने किया।

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