याद रहेगी बिहार की मेजबानी,अमृतसर में तब्दील हुई गुरु नगरी

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शराबबंदी के बाद दहेज प्रथा उन्मूलन और वाल विवाह रोकने को लेकर देश-विदेश तक सुर्खियों में आया बिहार दशमेश पिता श्री गुरु गोविंद सिंहजी महाराज के 350/351वें प्रकाश पर्व को लेकर भी र्चचा में रहा। नब्बे के दशक के बाद से बिहार की जो छवि देश-विदेश में बनी थी, उसे इस प्रकाश पर्व ने धो डाला। पहले खौफजदा सिख श्रद्धालुओं का जत्था बिहार आने से कतराने लगा था, लेकिन इसी साल आयोजित प्रकाश पर्व के दो समारोहों ने छवि बदल दी। इस वर्ष 3 से 5 जनवरी तक आयोजित प्रकाश पर्व और 23 से 25 दिसम्बर तक आयोजित हो रहे शुकराना समारोह में देश-विदेश से आये सिख संगतों को यहां की मेजवानी शायद हमेशा याद रहेगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की देखरेख में विधि व्यवस्था से लेकर आवास तक की ऐसी व्यवस्था हुई कि पंजाब, हरियाणा, अमृतसर, दिल्ली, मुम्बई, यहां तक कि इंग्लैंड, अमेरिका और कनाडा समेत अन्य स्थानों से आये सिख संगत प्रशंसा करते नहीं अघा रहे हैं। एक तरफ गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की व्यवस्था तो दूसरी तरफ सरकारी इंतजाम ने सिख संगतों के बीच जो छाप छोड़ी है वह वर्षो तक उनके जेहन में रहेगी। गुरु गोविंद सिंह महाराज की जन्मस्थली होने के कारण यह शहर सिख पंथ का विश्व में दूसरा तख्त है। समस्त मानवता की तीर्थभूमि पटना साहिब में आने वाले श्रद्धालुओं का मस्तक गौरव से ऊंचा होता है। गुरु महाराज की यह जन्मभूमि व्रजभूमि के रजकण की तरह है। इस भूमि की ऐतिहासिक मर्यादा को बनाये रखने के लिए शासन-प्रशासन ने श्रद्धालुओं की खातिरदारी में कोई कसर बाकी नहीं रहने दी। टेंट सिटी और आवागमन की नि:शुल्क व्यवस्था की गयी तो गंगा नदी में सैर के लिए भी तीन जहाजों की नि: शुल्क सेवा सरकार ने उपलब्ध करा दी। सिख संगतों के स्वागत में ‘‘जी आयां नू’ लोगों की जुवान पर चढ़ गया। मेजवानी देख कुछ श्रद्धालु यहां तक कह रहे हैं कि अब दोबारा ऐसा उत्सव शायद नसीब न हो। ऐसी मेजवानी तो सिख बहुल राज्यों में भी मुश्किल थी। प्रकाश पर्व और शुकराना समारोह ने गुरु महाराज की इस पंक्ति को सार्थक किया है-‘‘साच कहूं सुन लेहु सबै जिन प्रेम कियो तिनही प्रभू पायो, मानस की जात सबै एकै पहचानवो..।

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साहिब-ए-कमाल दशमेश गुरु श्री गुरु गोविंद सिंहजी महाराज के शुकराना समारोह और 351वें प्रकाशोत्सव समारोह को लेकर पटना साहिब पंजाब के अमृतसर में तब्दील हो गया है। सिख श्रद्धालु समारोह को लेकर इन दिनों पटना साहिब की सड़कों, गलियों में नजर आ रहे हैं। बाइपास टेंट सिटी में बने मुख्य द्वार को भी अमृतसर के गोल्डन टेम्पल का लुक दिया गया है। मुख्य द्वार और सजावट के लिए गुजरात से कारीगर बुलाये गये हैं। गुजरात के फॉर्म लल्लूजी एंड संस ने बाइपास टेंट सिटी में बने दरबार हॉल को भी गोल्डेन टेम्पल के समान ही बनाया है। देश-विदेश से आए हजारों सिख श्रद्धालु सेवा दे रहे हैं। भजन-कीर्तन, गुरु वंदना से शहर रससिक्त है। दरबार हॉल में श्री गुरु गोविंद सिंहजी महाराज के शस्त्रों के दर्शन कराए जा रहे हैं। शस्त्र विशेष रुप से अमृतसर से लाए गए हैं। इनकी सुरक्षा भी श्री गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी अमृतसर के सेवादार कर रहे हैं। इसके लिए इन्हें विशेष ट्रेनिंग दी गयी है। जसकरन सिंह, गुरप्रीत सिंह, हरिन्दर सिंह टेंट केशगढ़ पंजाब ने बताया कि शस्त्र में पांच तीर पर सोने की परत चढ़ायी गयी है। इसके अलावा बस में तलवार रखा गया है जो श्री गुरु गोविंद सिंहजी महाराज इस्तेमाल करते थे। अमेरिका कनाडा सहित देश-विदेश से आये सिख श्रद्धालु लंगर में भी बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं। बाइपास टेंट सिटी, गुरुद्वारा, गुरु बाललीला, गुरु का बागए कंगनघाट सहित अन्य स्थानों पर लंगर में बाहर से आये सिख श्रद्धालु सेवा में लगे हैं। 

शुकराना समारोह और 351वें प्रकाशोत्सव में निकले नगर कीर्तन से शहर निहाल हुआ। सड़कें बोले से निहाल सत श्री अकाल .., राज करेगा खालसा आकी बचे न कोय .., बाहे गुरुजी का खालसा, बाहे गुरुजी की फतेह के गगनभेदी नारे से गूंजते रहे। गायघाट बड़ी संगत से दोपहर बाद शुरु हुआ नगर कीर्तन संध्या में दशमेश पिता की जन्मस्थली तख्त हरिमंदिर साहिब पहुंचा। पंज प्यारे की अगुआई में फूलों से सुसज्जित ग्रंथ साहिब की सवारी के आगे मत्था टेकने वाले श्रद्धालुओं का तांता गायघाट से ही लग गया था। घोड़े पर सवार निहंग, हाथी, ऊंट, गतका पार्टी दर्जनों बैंड पार्टी, आरकेस्ट्रा, कीर्तन जत्था और तख्त हरिमंदिर साहिब द्वारा संचालित स्कूली बच्चों की बैंड पार्टी का एक अलग ही आकर्षक रहा। रास्ते में गतका पार्टी का करतब देखते ही बन रहा था। तलवारवाजी और अग्नि का करतब युद्ध की छद्म झांकी पेश कर रहे थे। करतब दिखाने में छोटे सरदार भी पीछे नही थे। हाथ में नंगी तलवार लिये झूलते निशान साहिब के साथ पंज प्यारे ग्रंथसाहिब की अगुआई कर रहे थे। ग्रंथ साहिब के आगे महिला-पुरु ष श्रद्धालुओं की टोली सड़कों की सफाई-धुलाई करती चल रही थी। इसके बाद पंज प्यारे की टोली थी। पंज प्यारो के अलावा आकर्षक ड्रेस में सजी लड़कियां भी हाथों में नंगी तलवार लिये कीर्तन जत्थे में शामिल थीं। सड़क किनारे बने घरों के छतों से जगह-जगह ग्रंथ साहिब पर फूलों की वष्ा की गयी। 

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