मुसीबत में हैं तो अब 112 नंबर करेगा मदद

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पटना : जल्दी ही इमरजेंसी नंबर के तौर पर 112 नंबर बिहार में भी सक्रिय होगा. इस एक नंबर से पुलिस, एंबुलेंस, आपदा, समाज कल्याण, अग्निशमन सेवा आदि से संपर्क साधा जा सकता है. जिससे संबंधित समस्या होगी, उसके बाद कॉल चली जायेगी. सारा सिस्टम कंप्यूटराइज्ड होगा, ताकि कम-से-कम समय में सहायता पहुंच सके. इसकी कवायद शुरू हो गयी है. नेशनल इमरजेंसी रेस्पांस सिस्टम के तहत यह सब संभव होगा. देश के कुछ राज्यों में इस सिस्टम ने काम करना शुरू भी कर दिया है.
कई राज्यों में काम करने लगा है 112 नंबर
अभी तक पुलिस के लिए 100, फायर ब्रिगेड के लिए 101, एंबुलेंस के लिए 102, डिजास्टर मैनेजमेंट के लिए 108 नंबर डायल किया जाता है. इसके अलावा भी तमाम ऐसे नंबर हैं, जो खास तरह की सुविधा देते हैं. परेशानी में उन नंबरों को आप डायल करके मदद ले सकते हैं.
सरकार का सोचना है कि कई नंबरों की बजाय एक ही नंबर रखा जाये. इसको लेकर काफी पहले से कवायद चल रही है. केंद्र सरकार ने विदेशों की तर्ज पर 112 नंबर को चुना है. 112 नंबर पर डायल कर संबंधित परेशानियों में मदद ली जा सकती है. इसको शुरू करने की कवायद देश भर में चल रही है. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली आदि राज्यों में इसकी शुरुआत हो चुकी है. राजस्थान, हरियाणा, छत्तीसगढ़ में जल्दी ही यह सुविधा शुरू होनेवाली है.
जीपीआरएस सिस्टम से लैस होंगे वाहन
पटना में कंट्रोल रूम बनाया जायेगा, जो कॉल सेंटर की तरह काम करेगा. संबंधित विभागों की गाड़ियों में जीपीआरएस सिस्टम लगा होगा. हर एक गाड़ी का हर मूवमेंट स्क्रीन पर दिखेगा.
इसमें इस्तेमाल होनेवाला कंप्यूटर भी अलग तरह का होगा. मुख्य स्क्रीन के दोनों ओर एक-एक छोटा स्क्रीन जुड़ा होगा. कोई भी पीड़ित कॉल करेगा, तो डिस्पैच सिस्टम में कॉल जायेगी. फिर इसका डिजिटल ट्रेल होगा. हर एक सूचना को मोबाइल डाटा टर्मिनल के माध्यम से ऑपरेट किया जायेगा. कोई अगर कॉल करता है, तो उसके पासकौन सी गाड़ी पहुंच रही है, उसका पूरा ब्योरा एसएमएस के माध्यम से पहुंच जायेगा.
अंतिम तारीख भी समाप्त
पटना : देश में किसी भी आपात स्थिति के दौरान एक ही नंबर (112) को लागू करने की योजना केंद्र सरकार ने तीन वर्ष पहले ही बनायी थी. नयी दिल्ली में हुए बहुचर्चित निर्भया कांड के बाद नेशनल इमरजेंसी रिस्पांस सेंटर (एनईआरसी) को स्थापित करने की घोषणा करते हुए सभी राज्यों को इसके लिए पुरजोर कवायद शुरू करने के लिए कहा था.
वर्ष 2017 के अंत तक इस योजना को सभी राज्यों में शुरू करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन बिहार में अभी तक इसकी सुगबुगाहट तक शुरू नहीं हुई है. केंद्र की तरफ से राज्य में इस केंद्रीकृत सिस्टम को स्थापित करने को 10 करोड़ जारी भी कर दिये. फिर भी अब तक जमीन तक का चयन नहीं हो सका है.
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