मुजफ्फरपुर बालिका गृह में यौनशोषण मामला

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बालिका गृह मे मारपीट के कारण एक बच्ची की हुई मौत के बाद उसके शव को बालिका गृह के पिछवाड़े दफनामे जाने का मामला प्रकाश में आने के बाद पॉक्सों कोर्ट के आदेश पर प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी शीला रानी गुप्ता की उपस्थिति एवं एसडीओं पूर्वी डॉ. कुंदन कुमार तथा नगर डीएसपी मुकुल रंजन के नेतृत्व मे सोमवार को पुलिस ने बालिका के शव की बरामदगी के लिए बालिका का गृह के पीछे टंकी के समीप चार घंटे तक खुदाई कराई, परन्तु समाचार लिखे जाने तक खुदाई में कुछ भी नहीं मिला। दफनाये गये स्थल की पहचान के लिए पटना से उन तीन लड़कियों को भी जिन्होने अपने बयान में बच्ची को दफनाने का खुलासा किया था, पटना से खुदाई स्थल पर लाया गया था। लड़कियों द्वारा बताये गये स्थल की भी खुदाई करायी गयी, परन्तु कुछ नहीं मिला।

इस बीच खुदाई के क्रम मे ही स्थानीय लोगों द्वारा बालिका गृह परिसर की खुदाई कराने का स्थानीय लोगों ने विरोध किया, जिसके कारण पुलिस को बीच में खुदाई कार्य रोकना पड़ा स्थिति को देखते हुए एसएसपी हरप्रीत कौर के खुदाई स्थल पर पहुंचने के बाद पुन: खुदाई शुरू हुई। टंकी के पास खुदाई किये जाने पर कुछ नहीं मिलने की स्थिति में वहां मौजूद पदाधिकारियों ने डीएम मो. सोहैल से आदेश लेकर टंकी के अगल बगल के स्थल को भी खोदवाया, परन्तु शाम छ: बजे तक चली खुदाई में पुलिस को कुछ भी हाथ नही लगा। आगे की खुदाई के लिए स्थल चिन्हित करने के उद्देश्य से खुदाई स्थल पर खोजी कुत्ते की टीम तथा एफएसएल की टीम बुलाने का बात चल रही थी।

इसी बीच खोजी कुते की टीम भी खुदाई स्थल पर पहुंची, परन्तु खोजी कुते से भी पुलिस को कोई मदद नहीं मिली। इस स्थिति मे कुछ अन्य जगह पर खुदाई कराने के बाद पुलिस और दंडाधिकारी सहित सभी अधिकारी वापस लौट गए।

ज्ञात हो कि बालिका गृह में रह रही लड़कियों द्वारा पटना में दिये गये बयान के आधार पर बालिका गृह के पीछे दफनाई गयी बच्ची के शव की खोज के लिए पॉक्सो कोर्ट ने पलिस द्वारा दिये गये आवेदन के आलोक में दंडाधिकारी प्रतिनियुक्त कर बालिका गृह के पीछे खुदाई कराने का आदेश दिया था। इस आदेश के आलोक मेंसोमवार को चार घंटे तक चली खुदाई के बाद भी पुलिस को कुछ भी हाथ नहीं लगा है।

जानिए कब- कब क्या हुआ

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बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के बालिका गृह में हुए यौन उत्पीड़न केस में लड़की का शव निकालने के लिए वहां परिसर की खुदाई की गई. इस शेल्टर होम में पिछले दिनों 21 बच्चियों के बलात्कार का भी मामला सामने आया है. वहीं इस मामले में सेवा संकल्प एवं विकास समिति के रसूखदार संचालक ब्रजेश ठाकुर समेत 11आरोपी जेल में हैं. इनमें आठ महिलाएं भी शामिल हैं.

जानिए कब- कब क्या हुआ
जुलाई, 2017– बिहार सरकार ने राज्य के सभी बालिका गृह और अल्पावास गृहों के सोशल ऑडिट के लिए टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) के साथ करार किया.

सितंबर, 2017 – मार्च 2018– टीआईएसएस ने राज्य भर के बालिका गृह और अल्पावास गृहों में रहने वाली लड़कियों से बातचीत की (यह भी पढ़ें- मुजफ्फरपुर शेल्टर होम में हुई खुदाई, बच्ची को मारकर गाड़ने का शक).

मई, 2018– टीआईएसएस ने राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपी.

26 मई, 2018– समाज कल्याण विभाग ने मुजफ्फरपुर प्रशासन को रिपोर्ट भेजी.

28 मई, 2018– साहू रोड, मुजफ्फरपुर स्थित बालिका गृह के संचालक एनजीओ के खिलाफ एफआईआर की अनुमति मिली (यह भी पढ़ें- बालिका और अल्पावास गृह चलाने के लिए NGO को करोड़ों रुपये देती है बिहार सरकार).

30 मई, 2018- बालिका गृह की सभी 42 लड़कियों को पटना और मधुबनी भेजा गया.

31 मई, 2018- जिला बाल सुरक्षा इकाई के सहायक निदेशक देवेश कुमार शर्मा ने मुजफ्फरपुर महिला थाने में एनजीओ सेवा संकल्प एवं विकास समिति के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया.

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03 जून, 2018- एनजीओ संचालक ब्रजेश ठाकुर समेत आठ आरोपी गिरफ्तार. इनमें ब्रजेश को छोड़ कर बाकी सभी महिलाएं.

26 जून, 2018- मुजफ्फरपुर जिला बाल संरक्षण अधिकारी रवि रौशन लापरवाही के आरोप में गिरफ्तार.

14 जुलाई, 2018- छपरा में बालिका अल्पावास गृह में यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया. एक लड़की के गर्भवती पाए जाने के बाद एनजीओ संचालक गिरफ्तार (ऐसे हुआ था मुजफ्फरपुर बालिका गृह शोषण केस का खुलासा…).

19 जुलाई, 2018- पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पीटल (पीएमसीएच) ने पीड़िताओं की मेडिकल रिपोर्ट मुजफ्फरपुर पुलिस को सौंपी. कुल 21 लड़कियों के साथ बलात्कार की पुष्टि हुई.

22 जुलाई, 2018- भारी मानसिक सदमे से गुजर रहीं 30 लड़कियों को पटना और मधुबनी से मोकामा के नाजरथ अस्पताल और आश्रय में भेजा गया (मुजफ्फरपुर अल्पावास गृह यौन शोषण मामले में तेजस्वी ने फिर साधा सरकार पर निशाना).

23 जुलाई, 2018- एनफोल्ड इंडिया हैदराबाद और एम्स के डॉक्टरों की टीम लड़कियों के इलाज के लिए पटना पहुंची.

23 जुलाई, 2018- लड़कियों ने एक साथी की हत्या और बालिका गृह में ही दफनाए जाने का बयान दिया था. इसे देखते हुए मुजफ्फरपुर बालिका गृह परिसर में खुदाई की गई. मिट्टी को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया.

टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंस (TISS) की ऑडिट रिपोर्ट

पिछले दिनों बिहार के मुजफ्फरपुर, छपरा, हाजीपुर के शेल्टर होम में 21 बच्चियों के साथ रेप की घटना सामने आई. यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया, जब टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंस (TISS) की ऑडिट रिपोर्ट सामने आई. 31 मई को बिहार सरकार को सौंपी गई. इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि कैसे इन बालिका गृह में छोटी-छोटी बच्चियों का शोषण किया जाता रहा है.

TISS की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक बच्चियों की मेडिकल जांच में उनके शरीर के कई हिस्सों पर जलने और कटने के निशान भी मिले हैं. ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक बच्चियों का रोज यौन शोषण होता था. मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक, यौन शोषण से पहले बच्चियों को नशे की दवाइयां दी जाती थीं या फिर नशे का इंजेक्शन लगाया जाता था.

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आपको बता दें कि टीआईएसएस ने 7 महीनों तक 38 जिलों के 110 संस्थानों का सर्वेक्षण किया. इस सर्वेक्षण में एक और चौंकाने वाला तथ्य यह है कि शोषण की शिकार हुई सभी बच्चियां 18 साल से कम उम्र की हैं. इनमें भी ज्यादातर की उम्र 13 से 14 साल के बीच है. इस रिपोर्ट से साफ पता चलता है कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह में हुए यौन उत्पीड़न में बाल कल्याण समिति के सदस्य और संगठन के प्रमुख भी बच्चियों के शोषण में शामिल थे. (मुजफ्फरपुर अल्पावास गृह परिसर में आज होगी खुदाई, लोकसभा में कार्यस्थगन प्रस्ताव लाने की तैयारी)

कैसे हुआ खुलासा
दरअसल जिले में सरकार द्वारा संचालित बालिका गृह में गड़बड़ी की खबरें प्रदेश सरकार को काफी समय से मिल रही थीं. सरकार द्वारा संचालित बालिका गृह में रहने वाली बालिकाओं ने अपने ही संस्थान के लोगों पर यौन शोषण और हिंसा का आरोप लगाया था. इस खबरों को पुख्ता करने के लिए सरकार ने मुंबई की प्रतिष्ठित संस्था ‘टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस’ को ऑडिट का काम दिया. 7 महीने तक रिसर्च करने के बाद आईएसएस ने 31 मई को सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें ये चौंकाने वाले खुलासे हुए.(मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन शोषण कांड में नया खुलासा, पिटाई से हुई थी लड़की की मौत)

इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के आधार पर जिला बाल कल्याण संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक ने महिला थाने में बालिका गृह का संचालन करने वाले एनजीओ ‘सेवा संकल्प एवं विकास समिति’ के कर्ता-धर्ता और पदाधिकारियों पर केस दर्ज कराया गया था

 

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