मुजफ्फरपुर बालिका गृह दुष्कर्म कांड : चुप्पी तोड़ने के बाद एक्शन में सरकार, 6 एडिशनल डायरेक्टर, 7 सीपीओ सस्पेंड

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बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप मामले में सीएम नीतीश कुमार की चुप्पी तोड़े जाने के बाद बड़ी कार्रवाई हुई है. समाज कल्याण विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए छह जिलों के सहायक निदेशक को सस्पेंड कर दिया है.

इसके साथ ही सात जिलों के बाल संरक्षण पदाधिकारियों को भी निलंबित किया गया है. जानकारी के मुताबिक इस कड़ी में और भी लोगों पर गाज गिर सकती है. समाज कल्याण विभाग के निदेशक राज कुमार ने बताया कि छह जिलों के सहायक निदेशक को निलंबित किया गया है. जिन जिलों के सहायक निदेशक को निलंबित किया गया है उनमें मुंगेर, भागलपुर, अररिया, भोजपुर, मधुबनी, मुजफ्फरपुर शामिल हैं. इसके अलावा सात जिलों के बाल संरक्षण पदाधिकारी भी निलंबित किये गये हैं.

इससे पहले सरकार ने मामले में सख्त कदम उठाते हुए समाज कल्याण विभाग के सहायक निदेशक दिवेश शर्मा को सस्पेंड कर दिया था. दिवेश शर्मा ने ही बालिका गृह रेप कांड की एफआईआर दर्ज कराई थी. दिवेश सुधार गृह कांड में भी वादी हैं. दिवेश शर्मा पर टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंस (टीआईएसएस) की सोशल ऑडिट रिपोर्ट पर कार्रवाई में देरी का आरोप है.

बालिका गृह में हुए यौन उत्पीड़न कांड को लेकर दिल्ली से पटना तक सियासत तेज हो चुकी है. विपक्ष इस मामले को लेकर सरकार पर लगातार हल्ला बोल रहा है. इसी मामले में बिहार के नगर विकास एवं आवास विभाग मंत्री सुरेश शर्मा को शनिवार को विरोध का सामना करना पड़ा. नगर निगम में योजनाओं का शिल्यान्यास करने दरभंगा पहुंचे मंत्री सुरेश शर्मा को कांग्रेस सेवा दल के जमाल हसन ने अपने समर्थकों के साथ काले झंडे दिखाए. वहीं प्रदेश में इस मामले को लेकर नेताओं के बीच खुला खत लिखे जाने की भी होड़ है.

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बिहार का यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया, जब टीआईएसएस की सोशल ऑडिट रिपोर्ट सामने आई. 31 मई को बिहार सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि कैसे इन बालिका गृह में छोटी-छोटी बच्चियों का शोषण किया जाता रहा है.

मुजफ्फरपुर बालिका दुष्कर्म कांड में सामाजिक कल्याण विभाग के सहायक निदेशक दिवेश कुमार ने टीआईएसएस सामाजिक लेखा परीक्षा रिपोर्ट के बाद कार्रवाई करने में देरी के लिए निलंबित कर दिया गया है.  दिवेश पर आरोप है कि टीआईएसएस सामाजिक लेखा परीक्षा रिपोर्ट मिलने के बाद भी कई दिनों तक उस पर न कोई कार्रवाई की गयी न ही जांच किया गया.

विदित हो कि स्वाधार गृह मामले में महिला थाना में बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक दिवेश कुमार शर्मा के बयान पर एफआइआर दर्ज की गयी है. एफआइआर के बाद पुलिस ने सहायक निदेशक से कई बिंदु पर जानकारी मांगी है. एफआइआर लेट दर्ज करने से लेकर अन्य मामलों को लेकर पूछताछ भी की गयी. उधर, दिवेश कुमार शर्मा ने पुलिस को मांगी गयी जानकारी उपलब्ध करा दी थी. उन्होंने बताया थ्का पुलिस को जांच में पूरा सहयोग कर रहे है.

दूसरी ओर, बालिका गृह कांड में जेल में बंद ब्रजेश ठाकुर के करीबी रमेश ठाकुर की सीबीआई को तलाश है. उसके दिल्ली में छिपे होने की जानकारी सीबीआई को मिली है. सेवा संकल्प एवं विकास समिति एनजीओ का वह सचिव है. समाज कल्याण विभाग से हुए एकरारनामे पर उसके ही हस्ताक्षर है. महिला थानेदार ज्योति कुमारी ने उसके बारे में काफी खोजबीन की, लेकिन उसका पता नहीं चल पाया था. सीआईडी के एसपी कमजोर वर्ग ने भी रमेश ठाकुर के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था. इस मामले में रौशनी खातून से भी पूछताछ की गयी थी. बताया जाता है कि रमेश कभी-कभी ही मुजफ्फरपुर आता था. संस्था से जुड़े कागजात, पैड और बैंक के ब्लैंक चेक पर वह हस्ताक्षर कर दिल्ली लौट जाता था. बैंक में खाता भी उसी के नाम से है. सीबीआई संस्था से जुड़े सभी खातों को फ्रीज करने के लिए बैंक से पत्राचार करेगी.

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समाज कल्याण विभाग फिर पहुंची सीबीआई
सीबीआई की टीम शनिवार को समाज कल्याण विभाग के कार्यालय पहुंची. एसपी जेपी मिश्रा एक पत्र देकर कई बिंदु पर जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है. पत्र किसके  नाम से, कौन सा एनजीओ है, कब रजिस्ट्रेशन हुआ, किस चीज पर काम कर रहा है, उसके काम की प्रक्रिया क्या है और नियम क्या है, किसको कितने दिन पर निरीक्षण करना है, निरीक्षण समय पर हुआ कि नहीं, निरीक्षण के बाद रिपोर्ट क्या दिया, यदि समय पर निरीक्षण और रिपोर्ट जमा नहीं हुआ तो संबंधित व्यक्ती पर क्या कार्रवाई हुई, किस एनजीओ को कितना फंड किस नियम के तहत किनके अनुशंसा पर दी गई, इसका जिक्र है. बताया जाता है कि सीबीआई ने जो कागजात विभाग से मांग की है, उसे देने में कम से कम 10 दिन का समय लगेगा. मांगी गयी कागजातों की जांच के बाद मिले तथ्यों के आधार पर सीबीआई फिर जरूरत के मुताबिक कागजात की मांग करेगी.

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जेल में ब्रजेश ठाकुर पर कसा शिकंजा
जेल में बंद ब्रजेश ठाकुर की निगरानी बढ़ा दी गयी है. जेल अस्पताल में इलाजरत ब्रजेश की निगरानी के लिए एक सुरक्षा प्रहरी की तैनाती की गयी है. जेल अधीक्षक राजीव कुमार झा ने बताया कि वह एक संवेदनशील मामले में आरोपित है. किसी तरह की अनहोनी न हो, इसके लिए सुरक्षा प्रहरी को तैनात किया गया है. वहीं, जेल में ब्रजेश ठाकुर के हथियार का लाइसेंस निलंबित किये जाने का नोटिस जेल प्रशासन को नगर थाने की पुलिस ने रिसीव करा दिया है. नगर थानाध्यक्ष मो. सुजाद्दीन ने बताया कि जेल अधीक्षक को नोटिस रिसीव कराये 36 घंटे बीत चुके हैं. जेल प्रशासन की रिपोर्ट आने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जायेगी.

संरक्षणदाताओं की तलाश
सीबीआई अब ब्रजेश ठाकुर के संरक्षणदाताओं के बारे में जानकारी जुटा रही है. उसके कई सफेदपोशों से बेहतर संबंध होने की जानकारी सीबीआई को मिली है. सीबीआई का कहना है कि महिला थाने की पुलिस ने इस केस में बेहतर अनुसंधान किया है. जरूरत पड़ने पर ही जेल में बंद आरोपितों को रिमांड पर लिया जायेगा.

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