मुख्यमंत्री पर हमला पूर्व निर्धारित योजना के कारण नहीं बल्की परिस्थितिजन्य कारणों से घटित हुई : कांग्रेस

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पटना : बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रभारी अध्यक्ष कौकब कादरी द्वारा बक्सर जिला के नन्दन गांव में मुख्यमंत्री के काफिले पर पथराव की घटना पर बक्सर जिला कांग्रेस अध्यक्ष तथागत हर्षवर्धन के नेतृत्व में गठित जांच दल ने अपनी रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को सौंप दी है। प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रवक्ता एचके वर्मा ने बताया कि रिपोर्ट में कहा गया है कि घटना किसी पूर्व निर्धारित योजना के कारण नहीं घटित हुई है, बल्कि यह परिस्थितिजन्य कारणों से घटित हुई लगती है। नन्दन गांव जिसका चयन सात निश्चय योजना के अन्तर्गत आदर्श ग्राम के तौर पर विकसित करने को हुआ है, में विकास कायरे को देखकर यही लगता है कि विकास का मात्र दिखावा हुआ है, धरातल पर विकास के मात्र लूट का बोलबाला है।ग्राम नन्दन में हुए विकास कायरे की हकीकत को मुख्यमंत्री तक पहुंचाने की सोच और मुख्यमंत्री के रूप में सरकार के मुखिया के आगमन पर मिलकर अपना दुख व्यक्त करने की उत्कट अभिलाषा ने ग्रामीणों को संभवत: प्रोटोकाल के बाहर जाने को बाध्य किया। ग्राम नन्दन के ग्रामीणों के इसी उत्साह अथवा आग्रह को समक्ष पाने में प्रशासनिक अधिकारियों से चूक हुई है और ग्रामीणों के प्रोटोकाल से बाहर जाने के एवज में उन पर बल प्रयोग किया गया, जिसका लाभ कतिपय लोगों द्वारा उठाकर इस गंभीर और दुखद घटना को अंजाम दिया गया। इस दुखद घटना में ग्राम नन्दन के ग्रामीणों का कोई हाथ स्पष्टत: नहीं है और यह तय है कि यह बाहरी उपद्रवी तत्वों के द्वारा किया गया। इस दुखद और अमर्यादित घटना में सीधे सीधे प्रशासनिक अमला जिम्मेवार है, जब विगत कई दिनों से नन्दन ग्राम में कथित तौर पर विकास कायरे में हुए भेदभाव को गुणवत्ता के प्रति जनता के आक्रोश की स्पष्ट जानकारी प्रशासन के पास मौजूद थी वैसी परिस्थिति में मुख्यमंत्री जैसे अतिविशिष्ट व्यक्ति के भ्रमण कार्यक्रम के पूर्व जनता के मिजाज को नहीं भांपकर उपद्रवियों को मौका मुहैया कराया गया और यह शर्मनाक घटना संभव हो पाया। नन्दन ग्राम में सात निश्चय योजना के अन्तर्गत हुए विकास कार्य की गुणवत्ता अत्यंत ही निम्न स्तरीय है और उसके खराब गुणवत्ता की जांच के लिए किसी एजेंसी की आवयकता नहीं है सीधे और खुली आंखों से देखा जा सकता है। इस घटना को किसी भी प्रकार से उचित नहीं ठहराया जा सकता किन्तु घटना के बाद की परिस्थितियां ग्रामीणों के लिए अत्यंत ही भयावह हैं और लोकतांत्रिक राज्य में यह बेहद दुखद वो पीड़ा दायक है। नन्दन ग्राम घटना के पचात बियाबान हो चुका है, दलित बस्ती के अधिकांश घरों पर ताला लटका है वो गृह स्वामी नहीं दिख रहे। मौजूद महिलाओं से हुए र्चचा अनुसार घटना के पश्चात पुलिस बल का दमन अपने शीर्ष पर है, बिना सूचना के किसी भी घर में प्रवेश कर किसी को हिरासत में लिया जा रहा है, शारीरिक प्रताड़ना व अपमानजनक व्यवहार जारी है। नन्दन ग्राम में अधिकांशत: दैनिक मजदूर व गरीब गुरबा की आबादी है, वर्तमान स्थिति में सारा कारोबार व रोजगार ठप पड़ा है, बिलखती आंखों से बच्चों की भूख दिखाई दे रही है जो खतरनाक स्तर तक आक्रोश का माहौल का निर्माण कर रही है। प्रशासन का रवैया बदले का है और घटना के पचात नंदन ग्राम का माहौल जनहित में नहीं है। जांच दल ने राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि जनता में विास स्थापित करने के लिए प्रशासन जनता से संवाद कर वातावरण सामान्य करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाये।

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