मुख्यमंत्री नीतीश ने राजगीर में ऐतिहासिक मलमास मेले का किया शुभारंभ

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राजगीर सर्व धर्म समभाव की स्थली है. सभी प्रमुख धर्मों के पूजा स्थल यहां मौजूद है. हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध, सिख, जैन सभी धर्म के लिए यह बहुत ही पवित्र स्थल है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मलमास मेला के उद्घाटन के अवसर पर उक्त बातें कही. उन्होंने कहा की मलमास में कुंड तथा वैतरणी एवं सरस्वती नदी के प्रति लोगों में असीम श्रद्धा है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार के नालंदा जिले में बुधवार को मलमास मेले का शुभारंभ किया। इस मौके पर कई साधु-संत मौजूद थे। ऐसी मान्यता है कि एक महीने यहां 33 करोड़ देवी देवता प्रवास करेंगे। एक माह के दौरान शादी, विवाह, मुंडन, गृहप्रवेश सहित किसी प्रकार का शुभ कार्य नहीं होता है। मलमास मेले में इस बार 4 शाही स्नान होंगे। हिंदू तिथि के मुताबिक तीन साल पर एक माह अधिक होता है जिसे अधिमास, मलमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। देश-विदेश से श्रद्धालु राजगीर आते हैं। कुंभ की तरह इसका धार्मिक महत्व है। कुछ दिनों पहले ही नीतीश कैबिनेट की बैठक में मलमास को राजकीय दर्जा दिया गया है।

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क्या है मलमास मेला ?
जब दो अमावस्या के बीच सूर्य की संक्रांति अर्थात सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश नहीं करते हैं तो मलमास होता है। मलमास वाले साल में 12 नहीं, बल्कि 13 महीने होते हैं। इसे अधिमास, अधिकमास, पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है।

मलमास मेले का महत्व
राजगीर में धार्मिक महत्व के 22 कुंड और 52 धाराएं हैं। लेकिन ब्रह्मकुंड और सप्तधाराओं में स्नान का विशेष महत्व है। देश-विदेश से श्रद्धालु यहां के कुंडों में स्नान और पूजा-पाठ कर मेले का धार्मिक लाभ उठाते हैं। ज्यादातर श्रद्धालु यहां के सभी कुंडों में विधि-विधान से पूजा-पाठ करते हैं। ऐसी मान्यता है कि भगवान ब्रम्हा के बेटे राजा बसु ने इस पवित्र स्थल पर महायज्ञ कराया था। महायज्ञ के दौरान राजा बसु ने 33 करोड़ देवी-देवताओं को आमंत्रण दिया था। लेकिन काग महाराज को न्योता देना भूल गये थे। इसके कारण महायज्ञ में काग महाराज शामिल नहीं हुए। उसके बाद से मलमास मेले के दौरान राजगीर के आसपास काग महाराज कहीं दिखाई नहीं देते हैं।

दूसरे स्थान पर पूजा-पाठ करने वालों को नहीं होती फल प्राप्ति
महायज्ञ माघ माह में हुआ था। इसी कारण देवी-देवताओं को ठंड से बचाने के लिए कुंडों की रचना भगवान ब्रह्मा ने की थी। ऐसी मान्यता है कि मलमास के दौरान राजगीर छोड़कर दूसरे स्थान पर पूजा-पाठ करने वाले लोगों को किसी तरह के फल की प्राप्ति नहीं होती है, क्योंकि सभी देवी-देवता राजगीर में रहते हैं।

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