मिशन 2019 :परिवारवाद को चुनावी एजेंडा बनाएगी भाजपा

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भाजपा ने मिशन 2019 को ध्यान में रखते हुए सूबे की अधिकतर पंचायतों में पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं को तैयार कर लिया है। पार्टी के ये पूर्णकालिक कार्यकर्ता हर गांव में जाकर केन्द्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के साथ मुख्य विपक्षी दल राजद व कांग्रेस को घेरने के लिए परिवारवाद व वंशवाद के खिलाफ हल्ला बोलेंगे। पार्टी मिशन 2019 के लिए परिवारवाद व वंशवाद को चुनावी एजेंडा बनाने जा रही है।भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने हाल ही में अपने झारखंड दौरे में वंशवाद व परिवारवाद को लेकर कांग्रेस समेत प्रादेशिक पार्टियों पर जमकर प्रहार किया। यहां प्रदेश भाजपा ने राजद नेता लालू को निशाने पर रखकर परिवारवाद व वंशवाद पर चोट करना शुरू कर दिया है। उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने पिछले तीन महीने से राजद नेता लालू प्रसाद के खिलाफ हल्ला बोल रखा है। प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय ने भी कहा है कि लालू जी को समाज की चिंता के बजाय हमेशा अपने परिवार की चिंता की है। सूत्रों के अनुसार अगले चुनाव में भाजपा परिवारवाद व वंशवाद के खिलाफ हर गांव में विगुल फुंकने जा रही है। पार्टी इसे चुनावी एजेंडा बनाएगी। कुल मिलाकर भाजपा ने वर्ष 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए चुनावी कसरत शुरू कर दी है। पार्टी वैसे पूर्णकालिक कार्यकर्ता को तैयार रही है जो संगठन को 15 दिन से लेकर अगले चुनाव तक अपने बहुमूल्य समय दे सकें। जिला व मंडल इकाई का गठन कर लिया गया है। चुनावी कसरत के तहत भाजपा विधानसभा प्रशिक्षण कार्यक्रम के साथ जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर चुकी है। दरअसल प्रदेश में गठजोड़ के हिसाब से भाजपा संग एनडीए को एडवांटेज मिल रहा है। एनडीए को फिलहाल जदयू, भाजपा, लोजपा, रालोसपा व ‘‘हम’ समेत पांच दलों का समर्थन प्राप्त है। नीतीश कुमार, सुशील मोदी, रामविलास पासवान, उपेन्द्र प्रसाद कुशवाहा व जीतन राम मांझी सभी एनडीए के बैनर तले हैं। एनडीए के इसी समीकरण का मुकाबला अगले लोकसभा चुनाव में लालू की अगुवाई वाले राजद, कांग्रेस, वामपंथी दलों व कुछ क्षेत्रीय पार्टियों से होगा। हालांकि अभी राजद से गठजोड़ को लेकर कांग्रेस दुविधा में है। ऐसे में विपक्ष को सत्तापक्ष से लोहा लेना आसान नहीं है। मिशन 2019 की तैयारी में यहां एनडीए की तरफ एक-एक कर प्रभावशाली कुर्मी-कुशवाहा नेताओं का झुकाव होने लगा है। सीएम के महागठबंधन से अलग होने के बाद प्रदेश में एनडीए को काफी मजबूती मिली है। पुरानी जातीय जनगणना के अनुसार बिहार में कोयरी (कुशवाहा) 4.1 प्रतिशत एवं कुर्मी 3.6 प्रतिशत हैं। उत्तरप्रदेश के हालिया चुनाव परिणाम से उत्साहित होकर भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व ने अपने परंपरागत वोट बैंक से इतर कुर्मी व कुशवाहा पर विशेष ध्यान देने की नीति अपनाई है। उत्तर प्रदेश में जटिल समीकरणों के बीच भाजपा ने कुशवाहा नेता केशव प्रसाद मौर्य को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था और यह फॉमरूला वहां कामयाब रहा। अब बिहार में भी लालू व कांग्रेस की काट के लिए भाजपा ने जातीय समीकरण बिठाना शुरू कर दिया है। पिछले महीने उत्तरप्रदेश के उपमुख्यमंत्री की मौजूदगी में प्रदेश के दो दिग्गज कुशवाहा नेता सतीश प्रसाद (पूर्व मुख्यमंत्री, बिहार) व सम्राट चौधरी (पूर्व मंत्री, नगर विकास व आवास मंत्री) ने भाजपा का दामन थामा था। एनडीए घटक में केन्द्रीय राज्य मंत्री उपेन्द्र प्रसाद कुशवाहा की अगुवाई वाले राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी का साथ पहले से भाजपा को है। दलित वोट को खींचने के लिए रामविलास पासवान की अगुवाई वाली लोकजनशक्ति पार्टी तथा जीतन राम मांझी के अगुवाई वाला हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा पहले से भाजपा के साथ खड़ा है। भाजपा को भरोसा है कि तीन तालाक जैसे मुद्दे को लेकर मुसलमानों का थोड़ा झुकाव पार्टी की तरफ अवश्य होगा।

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