मिशन 2019 के पहले शरद यादव पर फैसला एनडीए के लिए शुभ संकेत

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जदयू के बागी शरद यादव खेमे को केन्द्रीय चुनाव आयोग और अब राज्यसभा से जोरदार झटका मिलने पर प्रदेश में एनडीए को ही बढ़ने का स्पेस मिलेगा। जदयू के बागी खेमे के मजबूत होने से एनडीए के समीकरण पर असर पड़ सकता था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एनडीए घटक में आने के बाद जदयू का बागी खेमा प्रदेश में एकमुश्त जदयू को नहीं, बल्कि एनडीए को ही नुकसान पहुंचाने की स्थिति में दिख रहा था। रमई राम हों या अजरुन राय ये सभी नेता मूल जदयू के ही हिस्सा हैं, भले ही इनका जुड़ाव शरद यादव के साथ हो गया हो। ऐसे में जदयू के बागी नेता शरद यादव व अली अनवर की राज्यसभा से सदस्यता जाना बागी समर्थकों को हतोत्साहित करने वाला है। चाहे केन्द्रीय चुनाव आयोग से जदयू पर दावेदारी का मामला हो या शरद यादव की सदस्यता का मामला मिशन 2019 के पहले फैसला आ जाना एनडीए के लिए शुभ संकेत माना जा रहा है। सदन से लेकर सड़क तक जदयू के बागी खेमे को झटका लगा है। हालांकि शरद गुट की मौजूदगी थोड़ा बहुत एनडीए को नुकसान कर सकती है।एनडीए को फिलहाल जदयू, भाजपा, लोजपा, रालोसपा व हम समेत पांच दलों का समर्थन प्राप्त है। प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक दलों का समर्थन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पक्ष में है। नीतीश, सुशील, रामविलास पासवान, उपेन्द्र प्रसाद कुशवाहा व जीतन राम मांझी सभी एनडीए के बैनर तले हैं। एनडीए के इसी समीकरण का मुकाबला अगले लोकसभा चुनाव में लालू की अगुवाई वाले राजद, कांग्रेस, वामपंथी दल व कुछ क्षेत्रीय पार्टियों से होगा। यूं कहा जाए मिशन 2019 का चुनावी महाभारत इन्हीं सत्तापक्ष व विरोधी दलों के बीच तय दिख रहा है। विरोधी खेमे में शरद यादव की प्रस्तावित पार्टी भी हिस्सा हो सकती है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए ने प्रदेश की कुल 40 सीटों में 31 सीटें लाकर विरोधी दलों की हवा निकाल दी थी। इस चुनाव में भाजपा को 29.40 प्रतिशत मत मिले थे, जबकि लोजपा को 6.40 प्रतिशत तथा रालोसपा को 3 प्रतिशत मत मिले थे। इस तरह वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में एनडीए को करीब 39 प्रतिशत मत मिले। इसी चुनाव में राजद को 15.80 प्रतिशत मत मिले थे और कांग्रेस को 8.40 प्रतिशत तथा एनसीपी को 1.20 प्रतिशत मत मिले। यदि ये तीनों दल चुनाव मिलकर लड़े तो इनका मत प्रतिशत करीब 25 प्रतिशत पहुंचता है। ध्यान रहे कि वर्ष 2014 के चुनाव में एनडीए को 39 प्रतिशत मत उस स्थिति में मिले जब जदयू उसके साथ नहीं था। जदयू (16 फीसदी से अधिक) के साथ आ जाने के बाद अब परिस्थितियां अलग होंगी। लोकसभा पिछले लोकसभा चुनाव यानी कि वर्ष 2009 में जदयू को 24.04 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे, जबकि उस समय उसके सहयोगी रहे भाजपा को 13.93 प्रतिशत वोट मिले थे। वर्ष 2009 के चुनाव में जदयू ने अपने हिस्से आई 25 सीटों में 20 तथा भाजपा ने 15 सीटों में 12 सीटों पर जीत हासिल की थी। कांग्रेस ने 37 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और उसके दो उम्मीदवार जीतकर संसद पहुंचे थे। कांग्रेस को 10.26 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे। लालू प्रसाद की अगुवाई वाले राजद ने 28 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे, जिसमें मात्र चार उम्मीदवार ही जीत कर कर आए। वर्ष 2009 के चुनाव में सीपीएम, सीपीआई, एनसीपी और लोजपा के एक भी उम्मीदवार नहीं जीते थे। वर्ष 2009 के चुनाव में लोजपा को 6.55 प्रतिशत, एनसीपी को 1.22 प्रतिशत, सीपीएम को 0.51 प्रतिशत और सीपीआई को 1.4 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे। वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में जदयू ने 24 सीटों पर भाग्य आजमाया था और उसे 6 सीटें हाथ आई थीं। जदयू को 22.36 मत प्राप्त हुए थे। भाजपा 16 सीटों पर चुनाव लड़ी और उसके पांच उम्मीदवार संसद पहुंच सके। उस समय भाजपा को 14.57 प्रतिशत मत मिले थे। वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल ने 26 उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारा और उसके 22 उम्मीदवार जीत कर संसद पहुंचे थे। राजद को उस समय 30.67 प्रतिशत मत मिले थे। भाकपा माले ने 21 उम्मीदवार खड़े किए थे, किंतु उसके एक भी उम्मीदवार जीत नहीं पाए। उसे 2.41 प्रतिशत मत मिले थे।

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