मास्टर ट्रेनर किसान पाठशाला में देंगे ज्ञान

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Patna-Jan.22,2019-Bihar Agriculture Minister Prem Kumar is inaugurating Kisan Call Centre at Mithapur in Patna

राज्य के कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि टाल विकास योजना को सफल बनाने के लिए मास्टर ट्रेनरों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाएगा। तभी वे किसान पाठशाला में जाकर किसानों को उपयोगी जानकारी दे सकेंगे। कृषि मंत्री डॉ. कुमार आज रसायन भवन, मीठापुर,पटना के सभागार में आयोजित एक प्रशिक्षण कार्यक्रम का संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाये रखने एवं वातावरण की सुरक्षा की आवश्यकता को ध्यान में रखकर राज्य सरकार द्वारा इस योजना को अपनाया जा रहा है। कृषि उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ कृषि उपज की गुणवत्ता एवं पर्यावरण संरक्षण आदि में सुधार लाया जा सकता है। टाल विकास योजना राज्य के छह जिलों यथा पटना, नालंदा, भागलपुर, मुंगेर,लखीसराय एवं शेखपुरा में संचालित की जा रही है। इस योजना के जिला कार्यान्वयन पदाधिकारी के रूप में सहायक निदेशक, पौधा संरक्षण को नामित किया गया है। चूंकि, टाल क्षेत्र में रबी दलहन ही महत्वपूर्ण फसल के रूप में उत्पादित किये जाते हैं, इसलिए वित्तीय वर्ष 2014-15, 2015-16, 2016-17 एवं 2017-18 की भांति वित्तीय वर्ष 2018-19 में भी टाल क्षेत्र के प्रत्येक प्रखंडों में दलहनी फसल पर 4-4 कृषक प्रक्षेत्र पाठशाला (एफएफएस) कुल 116 एफएफएस चलायी जा रही हैं तथा किसानों के बीच अनुदानित दर पर खरपतवारनाशी, फफूंदनाशी एवं कीटनाशी दवा का भी वितरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों, पटना प्रमंडल के उप निदेशक, पौधा संरक्षण एवं सहायक निदेशक, पौधा संरक्षण द्वारा मास्टर ट्रेनर को कृषक प्रक्षेत्र पाठशाला के माध्यम से समेकित कीट प्रबंधन कार्यक्रम अपनाकर कीट-व्याधि पर नियंतण्रकरने हेतु प्रशिक्षित करेंगे। कृषि मंत्री ने कहा कि टाल विकास योजनांतर्गत किसानों द्वारा कृषक प्रक्षेत्र पाठशाला के माध्यम से समेकित कीट प्रबंधन कार्यक्रम अपनाकर कीट-व्याधि का नियंतण्रकरेंगे। अनावश्यक एवं अंधाधुंध कीटनाशी के प्रयोग से कीटों में प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि, जैविक नियंतण्रके कारकों का विनष्टीकरण, कृषि परिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बिगड़ना, पर्यावरण प्रदूषण एवं उत्पादन में खर्च की बढ़ोतरी के कारण कृषि में शुद्ध लाभ की कमी के साथ-साथ उपज की गुणवत्ता में भी भारी कमी आयी है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य कम खर्च में अधिकतम फसल का उत्पादन कर किसानों के शुद्ध लाभ में वृद्धि करना, विषरहित खाद्यान्न का उत्पादन कर पर्यावरण प्रदूषण को कम करना, मानव जीवन में रसायनों के प्रयोग से स्वास्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को कम करना, पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करना, ताकि इकोलॉजिकल संतुलन बना रहे, फसल सुरक्षा में रासायनिक कीटनाशियों को अंतिम शस्त्र के रूप में प्रयोग करना तथा दलहनी फसल को खरपतवार विभिन्न तरह के कीटों तथा रोगों से मुक्त कर उत्पादन बढ़ाना है। डॉ. कुमार ने कहा कि आईपीएम आधारित यह कृषक प्रक्षेत्र पाठशाला 14 सप्ताह का होगा। प्रत्येक कृषक प्रक्षेत्र पाठशाला में समेकित कीट प्रबंधन प्रत्यक्षण सह प्रशिक्षण के लिए 30 कृषकों को पांच प्रगतिशील कृषक/ एनजीओ/एईओ के साथ चयन करने के उपरान्त कृषि पारिस्थितिकी तंत्र विश्लेषण (एईएसए) के द्वारा प्रशिक्षित किया जायेगा। प्रत्येक एफएफएस के लिए दो मास्टर ट्रेनर होंगे।

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