मनुष्यों में रोग फैलाने वाले रोगाणुओं में 70 फीसद पशुजनित

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DELHI MEIN AYOJIT SEMINAR MEIN BHAG LETE AGRICULTURE MINISTER PREM KUMAR

राज्य के पशु व मत्स्य संसाधन मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि अबतक 1400 ऐसे रोगाणु प्रकाश में आए हैं जो मनुष्यों में बीमारी उत्पन्न करते हैं, उनमें से 70 प्रतिशत पशु जनित होते हैं। बढ़ती हुई आबादी, जंगलों की अंधाधुंध कटाई आदि से रोज नए-नए तरह की बीमारियां पैदा हो रही हैं। उन्होंने इस प्रकार के रोगों की रोकथाम हेतु अनुसंधान करने एवं जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. प्रेम कुमार आज भारतीय पशु चिकित्सा संघ के बैनर तले ‘‘ जंतु जनित बीमारियों की उत्पत्ति एवं निदान’ विषय पर बामेती सभागार में आयोजित एक सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस सेमिनार में आए हुए वैज्ञानिकों, पशु चिकित्सकों आदि से आह्वान किया कि इन रोगों की रोकथाम पर सार्थक र्चचा करें ताकि आपके सुझावों के आलोक में राज्य सरकार इसके लिए एक अलग से रणनीति बना सके। उन्होंने राज्य में पशुपालन के विकास में महती भूमिका निभाने हेतु राज्य के पशु चिकित्सकों की प्रशंसा की एवं ऐसे ही आगे भी कार्य करने का आह्वान किया। इस क्रम में उन्होंने आगामी 11 सितम्बर, 2019 को मथुरा से भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा ब्रुसेलोसिस एवं खुरहा-मुंहपका रोग के नियंतण्रसे संबंधित कार्यक्रम का शुभारम्भ करने की जानकारी भी दी। विभाग की सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने बताया कि राज्य में लेयर मुर्गीपालन को बढ़ावा दिया गया है जिसका परिणाम है कि राज्य अंडा उत्पादन एवं उपलब्धता के क्षेत्र में काफी तेजी से प्रगति कर रहा है। इसी प्रकार दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में भी भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद् के मानक से उपर की ओर राज्य अग्रसर हो रहा है। उन्होंने कॉम्फेड की र्चचा करते हुए बताया कि दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में महिलाओं का समूह बन रहा है। महिलाओं का योगदान इन क्षेत्रों में 70-80 प्रतिशत तक है। उन्होंने राज्य के पशु चिकित्सकों को आास्त किया कि वे अपना कार्य मुस्तैदी पूर्वक करें।

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मौके पर बिहार पशु विज्ञान विविद्यालय, पटना के कुलपति डॉ. रामेश्वर सिंह ने सेमिनार को सम्बोधित किया एवं विविद्यालय की ओर से हर प्रकार की सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया। सेमिनार में राज्य की ओर से डॉ. संजय कुमार सिन्हा, संयुक्त निदेशक, पशुपालन, डॉ. विजय कुमार, जिला पशुपालन पदाधिकारी, दरभंगा, डॉ. कविता राउत, डॉ. जितेन्द्र प्रसाद, डॉ. रंजीत शर्मा, डॉ. सुधांशु कुमार आदि के अतिरिक्त पंजाब के पशुपालन निदेशक, डॉ. इन्द्रजीत सिंह, उत्तर प्रदेश के डॉ. सुधीर कुमार, झारखण्ड के डॉ. बिमल हेम्ब्रम, मध्यप्रदेश के डॉ. बबीता चतरुवेदी, गुजरात के डॉ. आरएस पटेल आदि उपस्थित थे।

राज्य के कृषि मंत्री प्रेम कुमार ने कहा कि बिहार में चावल उत्पादन के लिए बीज वितरण के बड़े अवसर मौजूद हैं। हम राज्य बीज नीति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। यह निजी कंपनियों को पीपीपी मॉडल के माध्यम से प्रशासनिक और वित्तीय सहायता प्रदान करने पर केंद्रित है। नई दिल्ली में सीआईआई उत्तरी क्षेत्र की ओर से सतत चावल उत्पादन के लिए बीज प्रौद्यौगिकी पर आयोजित एक सेमिनार को कृषि मंत्री डॉ. कुमार संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रतिकुल जलवायु परिस्थितियों में चावल की फसल के उत्पादन में विविधता लाने की जरूरत है। श्री कुमार ने बताया कि बिहार सरकार केवल 6.6टिंल बीज में से 6500 क्विटंल बीज की आपूत्तर्ि करने में सक्षम है। शेष बीज की आपूत्तर्ि निजी क्षेत्र के माध्यम से प्रबंधित की जाती है। डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि बिहार सरकार गंगा के डेल्टा वाले मैदानी इलाकों में जीरो टिल सीड ड्रिल मशीन के माध्यम से बीज बोने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। सेमिनार में सीआईआई उत्तरी क्षेत्र के सह अध्यक्ष और टेस्ट्रीजडेयरी प्राइवेट लि. क्षेत्रीय समिति के चेयरमैन श्री अतुल मेहरा ने कहा कि नियंतण्र कृषि में भारत की विश्व रैंकिंग में बेहतर बनाने के लिए किसानों को जागरूक और प्रशिक्षण प्रदान करने की जरूरत है। इस अवसर पर फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्रीज ऑफ इंडिया और राइसमडलक्रप ग्रुप लीड के निदेशक अजय राणा ने कहा कि चावल की फसल भारत में कृषि योग्य भूमि के लगभग एक चौथाई भाग में उगाई जाती है। लेकिन उत्पादकता के मामले में हम काफी पीछे हैं। हाईब्रीड चावल, उच्च उपज वाली किस्मों के बीज को अपनाने से भारत चावल उत्पादकता में वृद्वि कर सकता है। सेमिनार में कृषि और इससे संबंद्व क्षेत्रों के शिक्षाविदों और कृषि उद्योग से जुड़े 120 सदस्यों ने हिस्सा लिया।

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