भाषा और लिपि देश की सांस्कृतिक विविधता : वीसी

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Patna-June.2,2018-Vice Chancellor of Patna University Raas Bihari Prasad Singh and others are sitting in symposium on “Bihar Ki Vilupt Hoti Lipiyan” at Patna Museum auditorium in Patna. Photo by – Sonu Kishan.

पटना संग्रहालय में बिहार की विलुप्त हो रही लिपियों के संरक्षण एवं प्रोन्नति विषय पर कार्यशाला आयोजित हुई। पटना विविद्यालय के कुलपति प्रो रासबिहारी प्रसाद सिंह ने कहा कि भाषा और लिपि भारत की सांस्कृतिक विविधता हैं और एकता की प्रतीक भी है। एक लिपि के विलुप्त होने से सांस्कृतिक आघात को रोकने के लिए पटना विविद्यालय द्वारा लिपि का शिक्षण कराया जायेगा। डॉ. रत्नेश्वर मिश्र ने कहा कि मिथिलाक्षर में संस्कृत पांडुलिपियों की संख्या करीब पचास हजार है, जिनमें से अधिकांश अब तक पढ़ी नहीं गयी है। कैथी की उपयोगिता की र्चचा करते हुए उन्होंने कहा कि 1953 में बिहार-बंगाल के बड़े भू-भाग को बंगाल-उड़ीसा जाने से बचा लिया गया। अतिथियों का स्वागत डॉ शिव कुमार मिश्र ने किया। उन्होंने कहा कि जब तक राज्य सरकार एवं सांस्कृतिक संस्थायें लिपियों को बचाने के लिए अपने स्तर से प्रयास नहीं करेगी, उसे बचाना संभव नहीं है। समारोह में प्रो आनंद मोहन शरण, उच्च न्यायालय के अधिवक्ता रूदल प्रसाद, डॉ रंजना झा, प्रेम शरण ने भी विचार व्यक्त किये। संचालन फेसेस की सचिव सुनीता भारती ने किया। अध्यक्षीय भाषण डॉ चितरंजन प्रसाद सिन्हा, धन्यवाद ज्ञापन डॉ किरण कुमारी ने किया। इस अवसर पर आनंद वर्धन सिन्हा, लेखनाथ मिश्र, चेतना समिति के अध्यक्ष विवेकानंद झा, सुधीर मोची, अशोक सिन्हा मौजूद थे।

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