भाजपा के खिलाफ दूसरी पार्टियों के साथ मिलकर लड़ेगी चुनाव माकपा

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देश की वामपंथी राजनीति के लिए 18 से 30 अप्रैल काफी मायने रखता है। 18 से 22 अप्रैल तक माकपा का 22वां राष्ट्रीय महाधिवेशन संपन्न हुआ है तो 26 से 30 अप्रैल तक केरल के कोल्लम में भाकपा का 23वां राष्ट्रीय महाधिवेशन होने जा रहा है। भाकपा पहले ही अगले लोकसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए अलग-अलग राज्यों में वाम और धर्मनिरपेक्ष पार्टियों के साथ चुनावी दंगल में उतरने का ऐलान कर चुकी है। वहीं माकपा के राष्ट्रीय महाधिवेशन में भी भाजपा को नम्बर एक दुश्मन मानते हुए 2019 में सत्ता से हटाने का निर्णय लिया है। इस फैसले को अंजाम तक पहुंचाने के लिए माकपा अलग-अलग पार्टियों के साथ समझौते कर चुनावी दंगल में उतरने का मन बना ली है।वर्षो बाद देखने को मिला है कि माकपा भाकपा के रास्ते पर चली है। भाकपा पहले ही वाम और धर्मनिरपेक्ष दलों के साथ गठबंधन करने को तैयार थी। वहीं माकपा केंद्रीय कमेटी की बैठक में पार्टी महासचिव सीताराम येचुरी का वामदलों और अन्य धर्मनिरपेक्ष पार्टियों से समझौते का प्रस्ताव गिर गया था। हालांकि अब यह प्रस्ताव पार्टी महाधिवेशन में पारित हो गया है। इससे भाकपा के राष्ट्रीय नेता भी राहत की सांस लेंगे। माकपा पर लगा पिछलग्गू होने का धब्बा भी कुछ साफ हुआ है। माकपा महाधिवेशन में दूसरी बार सीताराम येचुरी महासचिव चुने गये। साथ ही 95 सदस्यीय केंद्रीय कमेटी और 17 सदस्यीय पोलित ब्यूरो का चुनाव भी किया गया। हरवक्त दलितों की बातें करने वाली माकपा के 17 सदस्यीय पोलित ब्यूरो में एक भी दलित को नहीं रखा गया है जिसकी र्चचा जोर-शोर से शुरू हो गयी है। माकपा से पहले भाकपा माले का 10वां राष्ट्रीय महाधिवेशन 23 से 29 मार्च को पंजाब के मानसा में संपन्न हुआ। महाधिवेशन से पहले भाकपा और माकपा का राज्य सम्मेलन मधुबनी में हुआ। भाकपा के राज्य सम्मेलन में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एस सुधाकर रेड्डी ने स्पष्ट कहा कि पार्टी अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में वाम-जनतांत्रिक दलों के साथ उतरेगी। भाकपा का अलग-अलग राज्यों में अलग अलग दलों के साथ समझौता होगा। बिहार में भी भाकपा ने राजद के साथ समझौते के संकेत दिये हैं। भाकपा के राष्ट्रीय महाधिवेशन में बिहार से करीब एक सौ प्रतिनिधि शामिल होंगे। वहीं माकपा कांग्रेस के साथ समझौते के खिलाफ थी। पार्टी कांग्रेस-भाजपा को एक समान मान कर चल रही है। भाकपा के राष्ट्रीय महाधिवेशन में नयी राष्ट्रीय परिषद, राष्ट्रीय कार्यकारिणी और राष्ट्रीय सचिव मंडल का चुनाव होना है। पार्टी के राष्ट्रीय सचिव व सांसद डी राजा और अतुल कुमार अंजान राष्ट्रीय महासचिव के दौर में बताये जा रहे हैं। हालांकि एस सुधाकर रेड्डी को फिर से महासचिव बनाये जाने की र्चचा भी जोर-शोर से चल रही है। कुछ लोग के नारायणा के पक्ष में भी दिख रहे हैं।

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