बेहतर पुलिस व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध है राज्य सरकार

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सुशासन में जहां कानून व्यवस्था की स्थिति बेहतर रहना अनिवार्य है वहीं इसके लिए पुलिस व्यवस्था का दुरुस्त होना सबसे महत्वपूर्ण है। पुलिस व्यवस्था को सुदृढ़ किये बिना अपराध और अपराधियों पर लगाम नहीं लगाया जा सकता है और न प्रशासन के प्रति आम लोगों का भरोसा हासिल किया जा सकता है। इस महत्वपूर्ण मुद्दे को ध्यान में रखकर सरकार द्वारा निरंतर पुलिस व्यवस्था को सुदृढ़ और आम लोगों के लिए इसकी सेवा सुलभ बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इस दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाये जा रहे हैं जिसका अनुकूल प्रभाव भी आज पहले की अपेक्षा काफी सकारात्मक नजर आने लगा है।थाने में शिकायत दर्ज कराने समेत विभिन्न कामों के लिए आने वाले लोग वहां जरुरत पड़ने पर आराम से बैठ सकें इस मकसद से राज्य सरकार ने वहां आगंतुक कक्ष बनाने का निर्णय लिया है। राज्य के सभी थानों में आगंतुक कक्ष बनेंगे। हर एक कक्ष पर 5.17 लाख रुपये खर्च किये जायेंगे इस तरह अभी 660 थानों के लिए 34.16 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी सरकार द्वारा दे दी गयी है। भौगोलिक सीमा को लेकर अक्सरहां थानों में विवाद का सामना लोगों को करना पड़ता है। मामला मेरे थाने के क्षेत्र में नहीं है इसलिए एफआईआर दर्ज नहीं हो सकता ये शिकायत बहुत आम है। इससे बहुत सारे मामले थाने में दर्ज ही नहीं हो पाते है और लोगों को न्याय नहीं मिल पाता है। इस समस्या के निदान के लिए बिहार सरकार ने बहुत बड़ी पहल की और पुलिस के आला अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि किसी भी थाने में किसी भी क्षेत्र के लोग अपना एफआइआर दर्ज करा सकें जिसे जीरो एफआईआर कहते हैं और ये थाने की जिम्मेदारी होगी कि वो एफआईआर को जांच और कार्रवाई के लिए सम्बंधित थाने को आगे भेज सके। नए पुलिस वाहन खरीदने के लिए 58.73 करोड़ रुपये की भी स्वीकृति सरकार द्वारा दी गयी है। विशेष आधारभूत संरचना योजना के अंतर्गत वामपंथ उग्रवाद प्रभावित जिलों में 28 नक्सल पुलिस थाना निर्माण के लिए प्रति थाना 2.5 करोड़ के हिसाब से 70 करोड़ रुपये आवंटित किये गए हैं। समस्तीपुर जिले के बिथान थाना के तहत लरक्षा घाट में थाने की स्वीकृति के साथ 24 पदों के प्रस्ताव की भी मंजूरी मिली है। वहीं राज्य के आठ जिलों में अनुसूचित जाति, जनजाति सह महिला थाना, आवासीय भवन और बैरक के निर्माण के लिए प्रति थाना 4.70 करोड़ रुपये की दर से 37.62 करोड़ रुपये सरकार द्वारा स्वीकृत किये गए हैं। वहीं चार जिलों में अनुसूचित जाति जनजाति विशेष थाना, आवासीय भवन और बैरक के निर्माण के लिए 2.94 करोड़ प्रति थाना के हिसाब से 11.78 करोड़ की स्वीकृति दी गयी है। बिहार पुलिस ने क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) के क्रियान्वयन के लिए छह सितम्बर को टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस (टीसीएस) के साथ एकरारनामा किया। इस परियोजना के तहत प्रदेश के 849 थानों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा जायेगा। इससे आम आदमी को पुलिस से मिलने वाली सात प्रकार की सेवाएं जैसे अनलाइन शिकायत दर्ज करना, चरित्र सत्यापन, आवश्यक पुलिस अनुमति, खोये-पाये लापता सामग्रियों की सूचना, खोये अथवा चोरी हुए सामानों की जानकारी आदि ऑनलाइन मिल जाएगी। सीसीटीएनएस के प्रयोग से अपराधियों के फिंगरप्रिंट का एक डेटाबेस तैयार हो जायेगा। इन्टरनेट से जुड़े होने के कारण कहीं के भी अपराधी के बारे में जानकारी उसके फिंगरप्रिंट से की जा सकेगी। इसकी सुविधा और क्षमता का अंदाज इसीसे लगाया जा सकता है कि सीसीटीएनएस के माध्यम से सिर्फ 89 सेकंड में फिंगरप्रिंट डेटाबेस से अपराधी की पहचान हो सकती है। इसके अलावे थानों में गुंडा रजिस्टर, एफआईआर रिकॉर्ड आदि सभी डिजिटल रूप में रिकॉर्ड में रहेंगे जिससे राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी एक थाने से दूसरे थाने में सूचना के आदान प्रदान में काफी सुविधा और पारदर्शिता हो जाएगी। इस व्यवस्था के आने से एक बहुत बड़ा फायदा ये होगा कि थानों में पुलिस डायरी में हेर फेर करना बहुत मुश्किल हो जायेगा ।सीसीटीएनएस व्यवस्था लागू होने से स्थानीय पुलिस स्टेशन और जिला पुलिस मुख्यालय राज्य पुलिस मुख्यालय से जुड़ जायेंगे और ये सभी स्टेट क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो (एससीआरबी) से जुड़े हुए होंगे, साथ ही ये राष्ट्रीय स्तर पर नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) से जुड़ जोंगे। इससे फिंगरप्रिंट द्वारा देश के कहीं के भी अपराधी की पहचान जल्द से जल्द हो पायेगी। सीसीटीएनएस पर 250 करोड़ खर्च होंगे, 206 करोड़ रुपये बिहार सरकार देगी और बाकी केंद्र सरकार वहन करेगी। प्रदेश में 1326 कार्यालयों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा जायेगा। इसमें 894 पुलिस स्टेशन के आलावा 380 उच्चाधिकारियों के भी कार्यालय भी शामिल हैं, सभी का डाटा स्टेट डाटा सेंटर में रहेगा। स्टेट डाटा सेंटर का जुड़ाव नेशनल डाटा सेंटर से रहेगा। इससे पूरे देश में किसी भी मामले में जांच करने वाले पुलिस अधिकारी अपराध और अपराधी के बारे में सूचनाएं तत्काल आदान प्रदान कर सकेंग। सीसीटीएनएस के मुख्य उद्देश्य में प्रत्येक पुलिस स्टेशन द्वारा अपने वरीय अधिकारियों को घटना के तुरंत बाद अपराध और अपराधियों के बारे में जानकारी देने के साथ साथ जांच और सेवा की कार्य पण्राली में पारदर्शिता लाना है। इस पण्राली के बेहतर परिणाम के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को अपराध पर नियंतण्रकरने और त्वरित निर्णय लेने के लिए सुविधाओं से लैस किया जायेगा । इससे पुलिस स्टेशन के स्टाफ को कार्य पण्राली ठीक करने में बड़ी मदद मिलेगी । सबसे बड़ी सुविधा आम लोगों को होगी उन्हें अपने द्वारा की गई शिकायतों की स्थिति की सूचना पाने में आसानी होगी ।

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