बिहार में IPL के हर मैच पर लगा सट्टा, जानिए कैसे होता है करोड़ों का खेल

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IPL ME SATTAEBAZI KERNE WALA GIRIFTAR AND BRAMAD CASH

इंडियन प्रीमियर लीग (आइपीएल) के 11वें सीजन के हर मैच में राजधानी में सट्टा लगाया गया था। बुधवार तक आइपीएल के 49 मैच खेले गए थे। हर मैच पर पटना में लगभग 50 लाख का सट्टा लगाया गया। सट्टेबाजों के ऐसे कई गैंग हैं, जो राजधानी के अलग-अलग इलाकों में सट्टा लगाने का खेल खेलते रहे हैं।

आइपीएल के इस सीजन में अब तक 25 करोड़ का सट्टा लगाया जा चुका है। बुधवार को रूपसपुर थाना क्षेत्र से पटना पुलिस के हत्थे चढ़े सात सट्टेबाजों ने ऐसे ही कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। पूछताछ में यह साफ हो गया कि सट्टे के खेल में कई गिरोह सक्रिय हैं और बड़ी मछली दूसरे राज्य में बैठी है। सट्टेबाजी के बड़े खिलाड़ी युवा कारोबारी हैं।

दस में आठ की हार तय

पकड़े गए सटोरियों की मानें तो मुनाफे का गणित ऐसा होता था कि सट्टा लगाने वाले दस में आठ की हार तय होती है। हार के बाद सटोरिये जीत का प्रलोभन देकर फिर सट्टा खेलने को उकसाते हैं। हार की रकम ज्यादा होने पर सट्टा खेलने वाले जब कर्ज में पूरी तरह डूब जाते हैं, तो उनसे वसूली का खेल शुरू होता है। इसमें गाडिय़ों से लेकर दुकान तक के कागज गिरवी रखवाए जाते हैं।

सट्टेबाजी में फंसा था सराफा कारोबारी

आइपीएल के दसवें सीजन में पटना का एक सर्राफा कारोबारी सटोरियों के जाल में फंस गया था। उसे अपना फ्लैट तक बेचने की नौबत आ गई थी। मामला जोनल आइजी नैय्यर हसनैन खान के संज्ञान में आया और फिर बुद्धा कॉलोनी थाने में केस दर्ज हुआ था।

पुलिस ने जांच कर कार्रवाई शुरू की और एक सट्टेबाज आलोक को शास्त्रीनगर थाना क्षेत्र से दबोच लिया गया। जांच में यह बात उजागर हुई थी कि ज्वेलर्स सहित कई छोटे और बड़े कारोबारी सट्टेबाजों के जाल में फंस लाखों रुपए गवां चुके हैं। चूंकि सट्टा खेलने वालों पर पुलिस कानूनी कार्रवाई करती है, इस डर से कई लोग सटोरियों के जाल में फंसने के बाद भी चुप रहते हैं।

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हार की भरपाई को किया अपहरण

आइपीएल के दसवें सीजन में ही 15 हजार रुपए का सट्टा हारने की भरपाई करने के लिए बाइकर्स गैंग के दो बदमाशों ने पिछले साल रेडिएंट स्कूल के छात्र का अपहरण कर लिया था। इस बात का खुलासा मई 2017 में तब हुआ था जब पुलिस ने बच्चे को अपहरणकर्ताओं से मुक्त कराया और बदमाशों की गिरफ्तारी की।

हवाला के जरिए बॉस तक पहुंचती है रकम

पिछले वर्ष शास्त्रीनगर से एक सट्टेबाज की गिरफ्तारी हुई थी। पूछताछ में उसने सात सट्टबाजों के नाम उगले थे। सट्टेबाजों के बॉस के जयपुर में होने की जानकारी मिली थी तो दो अन्य के तार मुंबई और नागपुर से जुड़े मिले। जयपुर के सट्टेबाज का कनेक्शन सीधे मुंबई के सट्टा बाजार से था। पकड़े गए सट्टेबाज के मोबाइल में आइपीएल के समय लगातार जयपुर और मुंबई में बात हुई थी।

हर शहर में ‘पंटर’ फिक्स करते हैं दांव

-हर शहर में एक प्रमुख सटोरिया होता है, जो नागपुर, राजस्थान या मुंबई में बैठे बुकी के संपर्क में रहता है। मुखिया बनने के लिए वह बुकी को एडवांस रकम जमा करता है।

-फिर शहर का यही मुखिया अपने अलग-अलग एजेंट बनाता है। वह भी अपने इन एजेंटों से एक निश्चित एडवांस रकम वसूलता है, ताकि वे रुपए खाकर भाग न जाएं।

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– ये एजेंट अपने स्तर पर लड़के तैयार करते हैं, जिन्हें एक खास भाषा में पंटर कहा जाता है। ये पंटर ही लोगों से फोन पर बातचीत करके दांव फिक्स करते हैं।

एक बॉल बदल देती है पूरा खेल

आमतौर पर टीवी पर मैच देखने वालों को लगता है कि स्टेडियम में जैसे ही बॉल फेंकी जा रही है, वैसे ही लाइव टीवी स्क्रीन पर प्रसारण हो रहा मगर ऐसा होता नहीं है। लाइव प्रसारण में भी कुछ सेकेंड का अंतर होता है। आमतौर पर इस बीच एक बॉल फेंका जा चुका होता है।

यही एक बॉल सट्टेबाजों को लाखों-करोड़ों रुपये दिलाती है। बुकी का एक आदमी सीधे स्टेडियम से हर गेंद की जानकारी तत्काल अपडेट करता है और इसके हिसाब से सटोरिये भाव बदलते रहते हैं। दूसरा अपडेट सटोरिए इंटरनेट से भी लेते हैं। मार्केट में कुछ ऐसे एप हैं जो टीवी से पहले हर गेंद का अपडेट दे देते हैं। इससे भी सटोरियों को फायदा मिलता है।

सेशन के खेल पर लगता है दांव

यदि किसी टीम ने अपने पिछले मैच में छह ओवर के दौरान 40 रन बनाए थे तो सटोरिए अगले मैच में 43 या 45 रन पर भाव तय करेंगे। यानि किसी ने एक हजार रुपए लगाए हैं और यदि टीम ने छह ओवर में 43 या 45 रन बना लिए तो उसे दो हजार रुपए मिल जाएंगे लेकिन यदि ऐसा नहीं होता है तो पूरी राशि सटोरिए के खाते में चली जाएगी।

खेलने वालों को पहले सेशन में कितने भी रुपए लगाने की छूट दी जाती है। सेशन के दौरान यदि टीम तेज खेलने लगे और ऐसा लगे कि छह ओवर में 45 रन या उससे अधिक बन जाएंगे तो भाव बढ़ जाता है, मतलब एक हजार लगाने वाले को सटोरिए की ओर से ढाई हजार रुपए का भुगतान करने का प्रलोभन दिया जाता है।

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फेवरेट टीम पर भी लगाई जाती है रकम

फिक्सिंग के दूसरे खेल में सटोरिए टीम बेचते हैं। यानि की मैच शुरू होने से पहले ही सटोरियों की ओर से फेवरेट टीम जारी हो जाती है। जो टीम कमजोर होती है उसके भाव तेज होते हैं। उदाहरण के तौर पर पंजाब और केकेआर का मैच चल रहा है। इसमें पंजाब का प्रदर्शन पिछले मैचों में कमजोर रहा तो उसके भाव तेज रहेंगे।

मतलब यदि किसी ने केकेआर पर एक हजार रुपए लगाए हैं और भाव 70/20 का चल रहा है तो उसे महज दो सौ रुपए बढ़ोतरी के साथ कुल 1200 रुपए का भुगतान किया जाएगा, जबकि यदि किसी ने पंजाब पर एक हजार रुपए लगाए हैं तो सात सौ रुपए के साथ कुल 1700 रुपए दिए जाएंगे। अंत तक भाव में चढ़ाव-उतार का क्रम चलता रहता है। मैच के अगले दिन सटोरियों द्वारा तयशुदा किराना दुकानों, जनरल स्टोर्स, मोबाइल शॉप या चाय-पानी की दुकान से भुगतान कर दिया जाता है।

कहा-एसएसपी पटना, मनु महाराज ने

पकड़े गए सटोरियों से पूछताछ के बाद कई और लोगों के नाम सामने आए हैं। पुलिस शहर के आधा दर्जन इलाकों में दबिश दे रही है। कुछ अन्य ठिकानों पर भी नजर रखी जा रही है। पकड़े गए सटोरियों के पास से बरामद मोबाइल की जांच की जा रही है। बरामद डायरी में कई लोगों का हिसाब दर्ज है। इसमें पिछले वर्ष हुए आइपीएल का लेखाजोखा भी मिला है। पूरे मामले की जांच की जा रही है।

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