बिहार में विपक्षी दलों ने बजट को जुमलेबाजी करार दिया

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केन्द्र सरकार के बजट से निराशा हाथ लगी : उपेंद्र

राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने नरेंद्र मोदी सरकार के अंतरिम बजट को उनका अंतिम बजट बताया है। उन्होंने कहा कि बजट युवा विरोधी और किसानों को गुमराह करने वाला है। इस बजट में गरीब बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की कोई कोशिश नहीं की गई है। साथ ही न तो रोजगार सृजन के उपायों का कोई प्रस्ताव है और न किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए कृषि उत्पादन पर आधारित उद्योगों की स्थापना का कोई प्रावधान किया गया है। वर्तमान मोदी सरकार का यह बजट आखिरी बजट सिद्ध होगा। क्योंकि इसमें देश की 95 फीसद आबादी वाले एससी, एसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यक, शोषित, वंचित एवं गरीब लोगों के लिए कुछ भी नहीं है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव व प्रवक्ता फजल इमाम ने कहा कि पार्टी इस बजट को भरमाने वाला मानती है। उपेंद्र कुशवाहा का मानना है कि यह चुनावी जुमलेबाजी है।

बजट में केंद्र सरकार ने की बाजीगरी : मांझी
हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (से) के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि चुनावी वर्ष का यह केंद्रीय बजट जुमलों की बाजीगरी मात्र है। पांच सौ रुपये महीने में कैसे चलेगा किसानों के पांच लोगों का परिवार। लगभग 16 रुपये एक दिन के खर्च कर एक परिवार कैसे जीवन बसर कर सकता है। यह अपने आप में ही हास्यास्पद है। श्री मांझी ने कहा कि केंद्रीय बजट पूर्णत: चुनावी बजट है। केंद्र की मोदी सरकार ने फिर से चुनावी जुमलेबाजी का पांसा फेंका। युवाओं के लिए तो बेरोजगारों के लिए बजट में कुछ नहीं है। यह बजट रेगुलर बजट नहीं । यह जानते हुए कि नयी सरकार आने वाली है, यह जानबूझकर आने वाली नयी सरकार को आर्थिक बोझ डालने वाला बजट है। सिर्फ वोट लेने के लिए यह बजट को पेश किया गया है।

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किसानों,मजदूरों,नौजवानों को कोई फायदा नहीं : कांग्रेस
बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा ने केन्द्रीय मंत्री पीयूष गोयल द्वारा पेश बजट को दिशाहीन बताया है। डॉ. झा ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा पेश यह अंतरिम बजट है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने बजट अपने कार्यकाल के केवल दो महीने बचने पर पेश किया है। डॉ. झा ने कहा कि मध्य प्रदेश, राजस्थान एवं छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में भाजपा को भारी पराजय का सामना करना पड़ा और अब केन्द्र की भाजपा सरकार का कार्यकाल समाप्ति पर है, इसी कारण किसानों, छात्रों, नौजवानों, मजदूरों को बजट में लुभाने की कोशिश की गयी है। डॉ. झा ने कहा कि इस बजट सेकिसानों,मजदूरों, नौजवानों को कोई फायदा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की हार की आहट से केन्द सरकार ने यह बजट पेश किया है।

केन्द्रीय बजट चुनाव को लेकर महज छलावा : राजद
राजद प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा कि पीयूष गोयल द्वारा बजट में केवल जुमलेबाजी की गई है। लोगों को उम्मीद थी कि बजट में पिछले 56 महीनों में देश की जनता से किये गये वादों को मूर्त रूप दिया जायेगा परन्तु चुनाव को देखते हुए पूर्व की तरह केवल जुमलेबाजी ही की गई है।अपने चुनावी घोषणा पत्र में भाजपा द्वारा यह वादा किया गया था कि किसानों को उनकी लागत का दोगुना मूल्य दिया जायेगा और स्वामीनाथन आयोग के अनुशंसा को लागू किया जायेगा। परन्तु किसानों को भ्रमित करने के लिए प्रतिदिन 16 रुपये 66 पैसे का बिना बजने वाला झुनझुना थमा दिया गया। फिर भी इस बजट में रोजगार सृजन और युवाओं के रोजगार के बारे में कुछ नहीं किया गया है। जबकि प्रतिवर्ष दो करोड़ युवाओं को रोजगार देने का वादा किया गया था।

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केन्द्र सरकार का बजट जुमलेबाजी : रामानुज
राजद विधायक सह प्रदेश प्रवक्ता डॉ. रामानुज प्रसाद, राष्ट्रीय परिषद सदस्य भाई अरुण कुमार, अत्यंत पिछड़ा प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव उपेन्द्र चन्द्रवंशी ने केन्द्र सरकार अंतरिम बजट पर जिस प्रकार अपनी पीठ थपथपा रही है वह कुछ नहीं बल्कि पूर्व में की गयी जुमलेबाजी एवं किये गये कारनामों को ढंकने, जनता एवं किसानों की आंखों में धूल झोंकने की कोशिा है। यह अंतरिम बजट है न कि आम बजट। इस बजट से न आम मध्यम वर्गीय परिवारों को फायदा होगा न ही गरीब परिवारों व किसानों को। इन वगरे के लोगों को सरकार लॉलीपॉप दिखाने का काम कर रही है। मोदी सरकार ने बजट को भी जुमला बना दिया : वामदल वाम नेताओं ने बजट पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कि मोदी सरकार ने बजट को भी जुमला बना दिया है। देश भर के एक करोड़ स्किम वर्करों,रसोइया, आशा, आंगनवाड़ी सेविका-सहायिका व अन्य को न्यूनतम मजदूरी आधारित मानदेय देने से इनकार कर दिया गया है।आर्थिक संस्थाओ की स्वायत्तता को समाप्त किया जा रहा है और 45 वर्षो में सबसे ज्यादा बेरोजगारी के आंकड़े को सरकार छुपा रही है। सरकार किसानों के कर्जमाफी के जरूरी एजेंडा से सरकार भाग खड़ी हुई है।

बजट कृषि संकट के साथ क्रूर मजाक : माकपा
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्‍सवादी) की राज्य कमिटी ने केंद्र सरकार द्वारा पेश अंतरिम बजट को देश के सामने मौजूद कृषि संकट, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्य जैसे जनपक्षी सवालों का हल ढूढ़ने में पूरी तरह असफल करार दिया है। माकपा राज्य सचिव अवधेश कुमार ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दो हेक्टेयर जमीन वाले किसानों को सलाना 6 हजार रुपये की घोषणा हास्यापद है। यह कृषि संकट के साथ क्रूर मजाक है। मजदूरों के पेंशन की योजना को लागू करने के संबंध में बजट प्रावधानों की घोषणा नहीं की गयी है। इसका लागू होना संदिग्ध है। इस बजट में एक तरफ मध्यवर्ग को बहलाने के लिए टैक्स स्लैब को ढाई लाख से 5 लाख किया गया, लेकिन इसी आड़ में कारपोरेट टैक्स 20 फीसद से घटाकर 15 फीसद कर दिया गया है। अमीरों पर वेल्थ टैक्स नहीं लगाया गया है। तमाम बजटीय घोषणाएं जनता को भ्रमित करने का प्रयास है।

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बजट मजदूर-किसानों व आम लोगों से छलावा : माले
भाकपा माले के राज्य सचिव कुणाल ने कहा कि केंद्र का अंतरिम बजट देश के आंदोलनरत मजदूरों-किसानों-बेरोजगारों-स्कीम वर्करों के साथ छलावा है। बजट में 2 हेक्टेयर यानी 5 एकड़ तक के किसानों को 6000 रुपये वार्षिक अनुदान का आश्वासन दिया गया है जबकि देश के किसान सीटू प्लस आधार पर लागत मूल्य के डेढ़ गुणा कीमत और तमाम कजरे की माफी पर लंबे समय से आंदोलित थे। बजट में इसकी घोर उपेक्षा करके मोदी सरकार ने अपने किसान विरोधी चरित्र का ही परिचय दिया है। इस सीमा निर्धारण से छोटे-सीमांत किसान एकदम से बाहर ही हैं। खेती आज बुनियादी तौर से बटाईदारों के जरिये हो रही है लेकिन सरकार अभी भी बटाईदारों को किसान नहीं मान रही है। और उन्हें इस अनुदान से बाहर रखा गया है। बटाईदार किसानों के लिए तमाम प्रकार की सरकारी सहूलियतों की मांग एक लोकप्रिय मांग रही है, लेकिन अंतरिम बजट इस पर एक शब्द भी नहीं बोलता। ग्रामीण विकास के भी मद में कटौती कर दी गई है। मध्य वर्ग के लिए कर में छूट की बात तो की गई है लेकिन उन समुदायों से आने वाले बेरोजगार युवाओं के लिए बजट में कुछ भी नहीं कहा गया है।

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