बिहार में भारी बारिश के बाद नदियां उफान पर, 11 जिले सबसे ज्यादा प्रभावित, 50 लाख लोग बाढ़ की चपेट में

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 बिहार में भारी बारिश के बाद नदियां उफान पर हैं. प्रदेश के 11 जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जिनमें से 6 जिलों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं. इन इलाकों में पानी भरने से अब लोगों की हिम्मत जवाब देने लगी है. सीमा पार नेपाल में भी भारी बारिश के चलते राज्य पर दोहरी मार पड़ गई है. बिहार का जो हिस्सा नेपाल से सटा हुआ है.वहां सबसे संकट पैदा हो गया है. यहां के ज्यादातर इलाके पानी में डूबे हुए हैं. कोसी, गंडक और बागमती नदियों का स्तर खतरे के निशान के पास पहुंच गया है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज बाढ़ से संबंधित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद दरभंगा,मधुबनी, शिवहर, सीतामढ़ी एवं मोतिहारी के बाढ़ प्रभावित इलाकों का विस्तृत हवाई सव्रेक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित सभी क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य तेज करने का निर्देष दिया है। राहत एवं बचाव कार्य केलिये एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टुकड़ियॉ तैनात की गयी हैं। विगत तीन-चार दिनों से नेपाल के तराई इलाकों में पिछले बहुत ज्यादा वष्ा होने के कारण बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुयी है। मुख्यमंत्री ने आवष्यकतानुसार रिलिफ कैम्प और कम्युनिटी किचेन की समुचित व्यवस्था करने का निर्देष दिया है। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता और साफ-ंसफाई पर समुचित ध्यान रखने का भी निर्देश दिया है। मानव एवं पशु दवा की समुचित व्यवस्था के साथ-ंसाथ पशुओं के लिये चारा इत्यादि की भी समुचित व्यवस्था के लिये निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री सम्पूर्ण स्थिति पर स्वयं नजर बनाये हुए हैं । सव्रेक्षण के दौरान जल संसाधन मंत्री श्री संजय झा, मुख्य सचिव दीपक कुमार, जल संसाधन विभाग के अपर मुख्य सचिव अरूण कुमार एवं आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत उपस्थित थे।

नेपाल के तराई क्षेत्र और बिहार में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण उत्तर बिहार की सभी नदियां उफान पर हैं और कई नये इलाकों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। आपदा प्रबंधन विभाग ने रविवार को बताया कि नौ जिलों दरभंगा, मधुबनी, शिवहर, सीतामढ़ी, अररिया, पूर्वी चंपारण, किशनगंज, सुपौल और मुजफ्फरपुर में 352 पंचायतों के 17 लाख 96 हजार 535 लोग बाढ़ की चपेट में हैं। इन जिलों में कुल 152 राहत शिविर बनाये गये हैं, जहां 45053 लोगों ने शरण ली है। बाढ़ की चपेट में आने से अररिया में दो, शिवहर और किशनगंज जिले में एक-एक व्यक्ति की मौत हो गई है। उधर कमला, कोसी, बागमती, भुतही बलान और अधवारा समूह की नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे मधुबनी, दरभंगा, सुपौल, शिवहर, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण, अररिया व किशनगंज सहित कई जिलों के 50 लाख से अधिक की आबादी बाढ़ की चपेट में आ गयी है। नेपाल से छोड़े गए पानी के कारण कमला बलान का पश्चिमी तटबंध तारडीह प्रखंड के कैथवार पंचायत एवं झंझारपुर के निकट नरूवार में चार जगहों पर टूट गया, जिसके कारण करीब नौ प्रखंडों में बाढ़ का पानी घुस गया है।

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CM NITISH KUMAR FLOOD KA HAWAI SERVEKSHAN KERTE

रविवार को उत्तर बिहार और नेपाल में बारिश नहीं होने के कारण बचाव कार्य में तेजी आयी है, लेकिन बाढ़ ग्रस्त कई इलाकों में 24 घंटे से अधिक समय बीतने के बावजूद राहत सामग्री नहीं पहुंची है। जल संसाधन मंत्री संजय झा के इलाके में ही कमला तटबंध दो स्थानों पर टूट गये वहीं आपदा प्रबंधन मंत्री लक्ष्मेश्वर राय के इलाके में भूतही बलान का तटबंध क्षतिग्रस्त हो गया। सीतामढ़ी, दरभंगा, मधुबनी, चंपारण व किशनगंज सहित जगह-जगह तटबंध टूटे हैं। मधुबनी जिले में कमला बलान झंझारपुर में खतरे के निशान से तीन मीटर ऊपर बह रही है। कमला बलान का बायां तटबंध के 7.00 से 7.50 किमी के बीच 80 फीट की लंबाई एवं 36.60 एतवारी गांव के पास 200 मीटर की दूरी में बांध टूट गया है। भूतही बलान का दायां तटबंध 12 किमी से 13 किमी के बीच खुटौना के पास 70 मीटर की लंबाई में क्षतिग्रस्त हो गया है। कमला नदी का दायां तटबंटध 40.60 किमी के निकट 30 मीटर में की लंबाई में दीपालखा स्थल पर क्षतिग्रस्त हो गया है। इसी तरह कमला का तटबंध 47.30 किमी से 48 किमी के बीच 30 मीटर की लंबाई में नरवार के पास टूट गया है। भूतही बलान का दायां तटबंध 10 किमी से 11 किमी के बीच राजपुर के पास क्षतिग्रस्त हो गया है।

दरभंगा जिले के तारडीह प्रखंड के ककोढ़ा एवं कैथवार के पास कमला नदी का बायां तटबंध और घनश्यामपुर के कुमरौल के पास दायां तटबंध रविवार की सुबह टूट गया। उधर, सीतामढ़ी में पटना को नेपाल से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण पुल टूट गया। कोसी प्रमंडल में तटबंध के भीतर अचानक पानी के प्रवेश के बाद वहां से लोगों का पलायन शुरू है। कोसी तटबंध पर पानी का भयानक दबाव है। कोशी बराज से चार लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। बराज के सभी 56 फाटक खोल दिए गये हैं। सीतामढ़ी में सुप्पी प्रखंड के जमला गांव के पास बागमती नदी का बांध टूट गया है। इस करण सुप्पी प्रखंड के एक दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी तेजी से घुस रहा है। बांध टूटने से सोनबरसा और परिहार के नए इलाकों में बाढ़ का पानी घुसने से भी लोग दहशत में हैं।

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सीतामढ़ी का पूर्वी चंपारण जिले से सड़क संपर्क भी भंग है। बागमती में उफान के कारण सीतामढ़ी के मेजरगंज में पटना को सीतामढ़ी से जोड़ने वाली सड़क पर स्थित पुल शनिवार की देर रात बह गया। इस कारण पटना का सीतामढ़ी से सड़क संपर्क टूट गया है। यही सड़क पटना को नेपाल से जोड़ती है। इस कारण पटना का सीतामढ़ी होकर नेपाल से सड़क संपर्क टूट गया है।

कोसी नदी अपना रौद्र रूप दिखाने लगी है। डेढ़ दशक बाद इसका डिस्चार्ज चार लाख क्यूसेक पार गया है। इससे पूर्व 2004 में यहां का डिस्चार्ज चार लाख के करीब पहुंचा था। रविवार घरों में पानी घुस जाने से तटबंध के अंदर के गांवों में अफरा-तफरी मच गई है। लोग सुरक्षित ठिकानों की तलाश में निकलने लगे हैं। देर रात से ही अफरा-तफरी का माहौल है। किसी के घर बह गए हैं तो किसी के मवेशी। सुपौल के सरायगढ़ भपटियाही प्रखंड अंतर्गत गढ़िया सुरक्षा बांध टूट जाने से वहां बसी एक हजार आबादी के लिए विकट समस्या खड़ी हो गई है।

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सहरसा में तटबंध के अंदर बसे गांवों में बाढ़ का पानी फैलने लगा है। वहां स्थिति भयावह है। नवहट्टा, महिषी, सलखुआ आदि प्रखंडों के तटबंध के अंदर बसे गांवों के निचले इलाकों में पानी फैल गया है। मधेपुरा में तिलयुगा व बिहुल नदी भी उफान पर है। बिहुल नदी में पानी बढ़ने से बेलही से ललमिनिया जाने वाली सड़क दो भागों में विभक्त हो गई। वहीं, तिलयुगा नदी ने बसखेरा गांव के समीप मरौना-निर्मली मुख्य सड़क पर दबाव बना रखा है। किसनपुर प्रखंड क्षेत्र के नौआबाखर में ग्रामीणों द्वारा बनाए गए सुरक्षा बांध के टूटने से कई गांव जलमग्न हो गए।

गोपालगंज के भोरे थाना क्षेत्र के पड़ौली गांव में तेज बारिश के बीच एक तीन मंजिला मकान भरभरा कर गिर गया। मकान झुकते देख समय रहते घर के सदस्यों ने घर से बाहर निकल कर अपनी जान बचाई। हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ। पूर्वी चंपारण में बंजरिया प्रखंड के घोड़मरवा गांव के पास दुधौरा नदी पर बना तटबंध टूट गया। आसपास के गांवों में तेजी से पानी फैलने लगा है। पताही व ढाका में बागमती का पानी कई गांवों में प्रवेश कर गया है। डीएम रमण कुमार ने खुद रेनकट की मरम्मत की लिए बालू की बोरियां भरीं। गुरहनवा स्टेशन के ट्रैक पर पानी के बढ़ रहे दबाव को लेकर सीतामढ़ी- रक्सौल रेलखंड पर परिचालन ठप कर दिया गया है।

समस्तीपुर और सीतामढ़ी जिले में बागमती, लखनदेई, झीम, रातो, मरहा और लालबकेया नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। सोनबरसा-नेपाल सड़क पर चार फीट पानी बह रहा है। बाढ़ को देखते हुए सीतामढ़ी-बैरगनिया-रक्सौल रेलखंड पर ट्रेनों के परिचालन पर रोक लगा दी गई मुजफ्फरपुर जिले के कटरा और औराई प्रखंड में स्थिति भयावह होती जा रही है। शिवहर- पिपराही पथ (एसएच 54) पर करीब दो फीट पानी चढ़ गया है। मंडल कारा परिसर में भी पानी प्रवेश कर गया है।

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