बिहार में बाढ़ से अब तक 177 की मौत, आज सीतामढ़ी का जायजा लेंगे CM नीतीश

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बिहार में बाढ़ की समस्या विकराल होती जा रही है. बाढ़ के तांडव में राज्य भर में अब तक 177 लोगों की मौत हो गई है. मौत का यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है. आधिकारिक आंकड़ों की बात करें तो आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक बाढ़ से मरने वालों की संख्या 97 हो गई है. वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 21 जुलाई को सीतामढ़ी में बाढ़ का जायजा लेंगे. वह सीतामढ़ी के रुनीसैदपुर टोल प्लाजा के पास बाढ़ पीड़ितों के लिए चल रहे राहत केंद्र का निरीक्षण करेंगे. दूसरी ओर राज्य के जल संसाधन मंत्री संजय झा मधुबनी में बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच कैम्प कर रहे हैं.

बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने शनिवार को सीतामढ़ी में बाढ़ राहत कायरे का जायजा लिया। उप मुख्यमंत्री ने समाहरणालय में आयोजित बैठक में तथा राहत केंद्र पहुँचकर बाढ़ राहत कायरे की स्थिति की जानकारी ली। इस क्रम में उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कई निर्देश दिये। समाहरणालय विमर्श कक्ष में जिला बाढ़/आपदा राहत अनुश्रवण सह निगरानी समिति की बैठक में उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के खजाने पर पहला अधिकार बाढ़ पीड़ितों का है। उपमुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि एक भी बाढ़ पीड़ित परिवार राहत राशि से वंचित न हो। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के खजाने पर पहला अधिकार बाढ़ पीड़ितों का है। उन्होंने कहा दूसरे जिलों जहाँ बाढ़ का प्रकोप नहीं है, वहाँ से कुछ डॉक्टरों की प्रतिनियुक्ति की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिया कि 10 दिनों के अंदर सभी महत्वपूर्ण क्षतिग्रस्त सड़कों को युद्धस्तर पर मरम्मती कार्य चलाकर आवागमन को चालू करवाये। सावन का महीना को देखते हुए जिन मंदिरों में जलाभिषेक होता है, वहाँ आवागमन शुरू करवाये। बाढ़ के बाद संभावित बीमारियों से बचाव, पशुओं की दवा एवं टीकाकरण, पशु चारा, फसलों की क्षति का आकलन, फसल सहायता योजना को लेकर आवश्यक निर्देश दिये। प्रशासन की पूरी टीम की प्रशंसा करते हुए सभी दलों के उपस्थित जनप्रतिनिधियों की भी सक्रिय सहयोग के लिए भूरी-भूरी प्रशंसा किया। इससे पूर्व बैठक में पावर पॉइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से डीएम डॉ रणजीत कुमार सिंह ने जिले में बाढ़ की स्थिति एवं प्रशासन द्वारा अब तक चलाये गए बाढ़ राहत कायरे पर विस्तार से जानकारी दी। प्रभारी मंत्री सुरेश शर्मा ने कहा कि आपदा राहत कार्य को सुदूर ग्रामीण क्षेत्रो में और भी प्रभावी रूप में किये जाने की जरूरत है। स्थानीय सांसद सुनील कुमार ¨पटू सहित कई जनप्रतिनिधियों ने पूरे सीतामढ़ी जिला को बाढ़ ग्रस्त जिला घोषित करने की बात उठाई।

बिहार सरकार के जल संसाधन मंत्री संजय झा ने कहा कि आपदा से अमेरिका और चीन भी जूझ रहा है। बिहार में बाढ़ से जो आपदा आई है वह नेपाल में 6 गुना अधिक वष्ा होने के कारण हुई है। बाढ़ का समाधान नेपाल में नहीं है। इसका समाधान हमें नदियों को जोड़कर या फिर अन्य उपाय खोजकर बिहार में ही करना होगा। इस दिशा में बिहार सरकार काम कर रही है। नदियों को जोड़ना बिहार सरकार की प्राथमिकता में है। यह केंद्र सरकार के सहयोग से ही संभव हो सकता है। इसलिए उन्होंने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से भी मुलाकात किया है। नदियों को जोड़ने का काम फिलहाल सीमांचल में कोसी मेची योजना के तहत शुरू किया गया है। इसे उत्तर बिहार में भी शुरू करने की जरूरत है। मंत्री ने बाढ़ के दौरान तटबंध टूटने में किसी तरह की लापरवाही को एक सिरे से खारिज करते हुए अभियंताओं को क्लीन चिट दे दिया और कहा कि नेपाल में 6 गुना अधिक वष्ा होने के कारण बांध टूटा है। आपदा पर किसी का नियंतण्रनहीं है। मंत्री ने दरभंगा जिला प्रशासन की प्रशंसा करते हुए कहा कि विपदा के इस घड़ी में बाढ़ पीड़ितों की मदद दरभंगा जिले में बेहतर तरीके से हो रहा है। यहां 3 सौ से अधिक स्थानों पर सामुदायिक किचन चलाकर बाढ़ पीड़ितों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। वही इतिहास में पहली बार बाढ़ आने के 6 दिनों के भीतर बाढ़ पीड़ितों के खाते में 6 हजार की राशी भेज दी गई है। मंत्री ने कहा कि बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं है। अगस्त और सितंबर महीना में भी बाढ़ आते रहे हैं। इसलिए पहले तटबंधों मे और अधिक कटाव ना हो इसको सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। जहां जहां तटबंध कमजोर हुआ है उसकी भी मरम्मति के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ का संकट टलने के बाद बांध को और अधिक मजबूती किस तरह दिया जा सकता है ।इस पर निर्णय लेकर उसे बनाया जाएगा। मंत्री श्री झा ने बताया कि बिहार सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि एम्स दरभंगा में ही बनेगा। दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल को ही एम्स में अपग्रेड किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि सदन में शुक्रवार को किसी सदस्य ने एम्स का मामला उठाया गया था। और मुजफ्फरपुर में एम्स बनाने का प्रस्ताव दिया है। जिस पर सरकार ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि डीएमसीएच को एम्स के रूप में अपग्रेड करने की अनुशंसा बिहार सरकार पहले कर चुकी है। वही मंत्री ने कहा कि दरभंगा एयरपोर्ट से हवाई सेवा शुरू करने के लिए जमीन अधिग्रहण की कागजी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। बिहार सरकार को 31 एकड़ जमीन एयरपोर्ट अथॉरिटी को देना है। इसके लिए इसी सत्र में 26 जुलाई से पहले 121 करोड़ रुपया पास करने के लिए बजट को सदन में प्रस्तुत किया जाएगा। यह राशि राज्य सरकार ने पूर्व में ही स्वी.ति कर रखा है। बजट को सत्र में ले जाकर स्वी.ति कराना होता है जो 26 जुलाई से पहले हो जाएगा। उसके बाद एयरपोर्ट अथॉरिटी को जमीन अधिग्रहण कर उपलब्ध करा दिया जाएगा। ज्ञात हो कि जितनी जमीन का उपयोग दरभंगा से हवाई सेवा के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया से लिया गया है उतनी जमीन एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया को राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराना है। सनद रहे कि शुक्रवार को लोकसभा में केंद्रीय मंत्री ने दरभंगा में हवाई परिचालन शुरू होने में हो रहे बिलंब पर जानकारी देते हुए कहा था कि बिहार सरकार ने अभी तक एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया को जमीन अधिग्रहण कर नहीं दिया है। इसके कारण परिचालन शुरू होने मे विलंब हो रहा है। बिहार सरकार के मंत्री संजय झा ने संभवत: केंद्रीय मंत्री के उसी वक्तव्य का जवाब दिया है। दरभंगा एयरपोर्ट स्टेशन से उड़ान योजना के तहत हवाई परिचालन शुरू करने की तैयारी अंतिम चरण में है। रनवे का काम लगभग पूरा होने की स्थिति में है वहीं टर्मिनल भी तैयार हो चुका है। कुछ काम है बची हुई है जो चल रही है।

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बूढ़ी गंडक का जलस्तर शुक्रवार की देर शाम खतरे के निशान को पार कर गया। इसके साथ ही बूढ़ी गंडक ने अब शहर के बाहरी हिस्से को दो तरफ से अपनी चपेट में ले लिया है। नगर के कई नये मुहल्ले में बाढ़ का पानी घुस गया है और शहर के आसपास के कई प्रखंडो मुशहरी, मुरौल, बंदरा, बोचहां काँटी में बाढ़ की स्थिति और बिगड़ गई है। नगर के शेखपुर ढाब में पानी भर जाने से इस मुहल्ले के लोग अखाड़ाघाट रोड पर शरण लेने आ गए है। बाढ़ का पानी सवरेदयनगर और मिल्लत कॉलनी के दर्जनों घरो में घुस गया है।स्थिति को इन मुहल्ले के लोग जलप्लावित घरों से निकलकर सुरक्षित स्थान को पलायन करने लगे है। उधर शेखपुर, आश्रमघाट, हनुमाननगर, लुटनपुर लकड़ी ढाही, छीट भगवतीपुर, शिवपुरी चंदवारा आदि मुहल्ले में स्थिति पहले से और ज्यादा खराब हो गई है। शहरी इलाके में पर्याप्त नाव की व्यवस्था नही रहने के कारण लोगो की परेशानी और बढ़ गई है। मारवाड़ी हाई स्कूल, अखाड़ाघाट रोड सहित कई अन्य स्थानों पर शरण लिए लोग कई तरह की समस्याओं से जूझ रहे है। झीलनागर, कपरूरी नगर, न्यू बालूघाट, सकिंदरपुर आदि मुहल्ले में स्थिति को लेकर अफरा तफरी की स्थिति बनी हुई है। बूढी गंडक के खतरनाक स्थिति में पहुंच जाने से मुशहरी प्रखंड के दस पंचायतो में जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया है। प्रखंड के मुशहरी, डुमरी, रजवाड़ा, नरौली, जमालाबाद, शहबाजपुर, अब्दुलनगर, भीखनपुर, रजवाड़ा भगवान आदि पंचायतो की बड़ी आबादी पूरी तरह बाढ़ की चपेट में आ गई है। इस इलाके का आवागमन बंद है और प्रभावित लोग कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे है। मुरौल प्रखंड के महमदपुर बदल पंचायत के महमदपुर ढाब टोला बाढ़ के पानी से घिर गया है। बलुआ गांव स्थित बूढी गंडक के सलुइस गेट से पानी का रिसाव होने लगा है।इस कारण ग्रामीणों में दहशत व्याप्त है। बूढी गंडक में जारी उफान के कारण मीनापुर प्रखंड के कई पंचायत जलमग्न हो गए है। राघाई में बांध में कटाव शुरू हो गया है। विभागीय जानकारी के अनुसार बूढी गंडक का जलस्तर खतरे के निशान से दस सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है, जिसके कारण मीनापुर के राघाई, डुमरिया, बाड़ा भारती, मोतीपुर के मोरसंदी, पहाड़ चक तथा सकिंदरपुर के कुंडल में तटबंध पर भारी दबाव बना हुआ है। उधर काँटी प्रखंड के कोल्हुआ पैगम्बरपुर, लसगरीपुर, रामनाथ धमौली आदि पंचायत के लगभग एक हजार घरो में पानी घुस जाने से लगभग दो हजार परिवार बाढ़ की चपेट में है। उधर जिलाधिकारी आलोक रंजन घोष ने भी बूढ़ी गंडक के खतरनाक स्थिति में पहुंचने की पुष्टि करते हुए बताया कि जिस तेजी से नदी के जलस्तर में बृद्धि हो रही है, इससे संभावना है कि शहर के कुछ और नए इलाके बाढ़ की चपेट में आ जायें। स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

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पूर्वी चंपारण और सीतामढ़ी में सबसे ज्यादा मौत 

बाढ़ से पूर्वी चंपारण में सबसे ज्यादा अब तक 46 लोगों की मौत हुई है जबकि सीतामढ़ी में इससे 30 और मधुबनी में 18 लोगों की जान गई है. अररिया, पूर्णिया और कटिहार इन तीनों जगहों पर बाढ़ से 14-14 लोग मरे हैं जबकि शिवहर में 11 लोगों के मरने की खबर है.

सरकार ने कहा 92 की हुई मौत
सरकारी आंकड़ों की बात करें तो बिहार सरकार ने अब तक 92 लोगों के मौत की पुष्टि की है. बिहार का पूर्वी चंपारण जिला बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित है. इसके अलावा शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, अररिया, किशनगंज, सुपौल, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, सहरसा, कटिहार और पूर्णिया में भी बाढ़ है.

 

 

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