बिहार में जो जमीन नहीं बचा पाये, झारखंड में क्या करेंगे

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उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में सत्ता सम्भालने के बाद कैबिनेट की पहली बैठक में कालेधन के खिलाफ एसआईटी का गठन किया और पहले कार्यकाल में आर्थिक भगोड़ों की सम्पत्ति जब्त करने का कानून बनाया था। भ्रष्टाचार, कालाधन और टेरर फंडिंग के विरुद्ध जो चौतरफा अभियान शुरू किया गया, उसी के तहत नोटबंदी का साहसिक निर्णय भी किया गया था। श्री मोदी ने ट्विट कर कहा कि जिस कांग्रेसनीत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद एसआईटी का गठन नहीं किया, वही नोटबंदी का विरोध कर कालाधन रखने वालों का बचाव भी करती रही। नोटबंदी के बाद कई चुनावों में जनता ने इस फैसले के समर्थन में मतदान किया। नोटबंदी के बाद कालाधन और टेरर फंडिंग पर अंकुश लगाने में मदद तो मिली ही, बैंकों में जमा राशि बढ़ने से इनकी कर्ज देने की हैसियत में भी सुधार हुआ। राजनीतिक तौर पर जनता को यह फायदा हुआ कि उसे राहुल गांधी, लालू प्रसाद, मायावती और ममता बनर्जी जैसे उन नेताओं का असली चेहरा पहचानने में सहूलियत हुई, जिनकी फंडिंग कालेधन से हो रही थी। संसदीय चुनाव और हाल के उपचुनाव के बाद बिहार में महागठबंधन बिखर गया है। हम ने रास्ता अलग कर लिया और 13 नवम्बर को प्रदर्शन करने वाले विरोधी दलों ने राजद की बजाय वामदलों का साथ लेना पसंद किया। जो बिहार में अपनी जमीन नहीं बचा पाये, वे झारखंड में क्या कर पाएंगे।

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