बिहार में गरीब सवर्णों के 10% आरक्षण पर कैबिनेट की मुहर

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राज्य सरकार की नौकरियों में सामान्य वर्ग के गरीबों के लिए 10% आरक्षण की व्यवस्था लागू होगी. आरक्षण का लाभ शैक्षणिक संस्थानों में नामांकन में भी मिल सकेगा. राज्य कैबिनेट की शुक्रवार की देर शाम हुई बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी. राज्य सरकार इसके लिए अधिनियम बनायेगी.

अधिनियम को 11 फरवरी से शुरू हो रहे विधानमंडल के बजट सत्र में पेश किया जायेगा. दोनों सदनों में चर्चा के बाद इसे पास कराया जायेगा. इसके बाद राज्यपाल की सहमति से इसे लागू कर दी जायेगी. इसके बाद राज्य में कुल 60% आरक्षण का प्रावधान हो जायेगा. गौरतलब है कि  इसके पहले सीएम नीतीश कुमार ने कहा था कि राज्य सरकार सवर्ण आरक्षण को लागू करने के लिए बजट सत्र में विधेयक लायेगी.

अब आगे क्या
विधानमंडल के बजट सत्र में सरकार लायेगी विधेयक
विधानमंडल से विधेयक को पास होने के बाद राज्यपाल की सहमति से आरक्षण हो जायेगा लागू
अन्य प्रमुख फैसले
पशु चिकित्सकों को भी अब मिलेगा एमबीबीएस डाॅक्टरों का वेतन
मंत्रियों को अब दैनिक भत्ता तीन हजार, आवास भत्ता भी बढ़ा
आय के मामले में केंद्र का फाॅर्मूला होगा बिहार में लागू
 राज्य में सवर्ण आरक्षण का लाभ उन्हीं को मिल पायेगा, जो केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानक पर फिट बैठते होंगे. जिनकी वार्षिक आमदनी आठ लाख से कम, कृषि भूमि पांच हेक्टेयर से कम हो और उनका घर का रकबा हजार स्क्वायर फुट से कम होगा, उसे ही इस आरक्षण का लाभ मिल सकेगा.  इसी तरह की रियायत शहरी क्षेत्र के आर्थिक रूप से सभी समुदायों के सवर्ण गरीबों के लिए भी मिल पायेगी.
क्यों एक्ट बना रही राज्य सरकार
राज्य सरकार की मंशा है कि बिना एक्ट बनाये  इसे लागू करने पर कोर्ट में चुनौती दी सकती है. एक्ट बना कर विधानमंडल  से पास कराने के बाद यह फुलप्रुफ व्यवस्था लागू की जायेगी. बिहार पहला राज्य होगा, जिसने एक्ट बना कर सवर्ण आरक्षण को लागू करेगा. अब तक जितने भी राज्यों ने इसे लागू किया  है, अध्यादेश के जरिये लागू किया है. राज्य सरकार ने पूर्व में भी ओबीसी,  इबीसी, एससी व एसटी को आरक्षण देने के लिए एक्ट बनाया था.
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