बिहार में कला व शिल्प की समृद्ध विरासत :राज्यपाल

0
170
PATNA ART AND CRAFT COLLEGE ME ALUMNI MEET PROGRAM KO ADDRESS KERTE GOVORNOR STYA PAL MALIK

प्रदेश के राज्यपाल सह कुलाधिपति सत्यपाल मल्लिक ने कहा कि बिहार में कला व शिल्प की विरासत काफी गौरवपू़र्ण एवं समृद्ध रही है। पाटलिपुत्र प्राचीन महानगर के रूप में पूरी दुनिया में विख्यात रहा है। पटना कलम शैली की भी ख्याति पूरी दुनिया में रही है। उन्होंने ये बातें स्थानीय कला व शिल्प महाविद्यालय परिसर में आयोजित प्रथम पूर्ववर्ती छात्र सम्मेलन, 2018) के उद्घाटन समारोह में कहीं। राज्यपाल ने कहा कि पटना ‘‘सुलेख कला’ का भी प्रमुख केन्द्र रहा है। बिहार की कला का इतिहास यह बताता है कि 1790 में चित्रकारों का एक दल मुर्शीदाबाद से आकर तत्कालीन बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में बसा। ये चित्रकार यूरोपीय और भारतीय दोनों कला की बारीकियों को समझते थे। मुल शैली और कंपनी शैली के समन्वय से बनी बिहार की प्रान्तीय कला शैली की शुरुआत बिहार में हुई। कालान्तर में यहां ‘‘ पटना कलम’ शैली विकसित हुई जिसने पूरी दुनिया में ख्याति अर्जित की। उन्होंने कहा कि मुखाकृति चितण्रऔर मुक्त चितण्रदोनों शैलियां यहां विकसित हुईं। बिहार में यह पहला अवसर था, जब कला दरबारी संस्कृति से मुक्त होकर धीरे-धीरे आम जन-जीवन की ओर भी मुड़ने लगी।राज्यपाल ने कहा कि बिहार की मधुबनी पेंटिंग और मिथिलांचल की भित्ति चितण्रकी कला भी काफी आकर्षक व विश्वविख्यात है। उन्होंने कहा कि सन् 1939 में स्थापित बिहार व झारखंड के एकमात्र इस कला व शिल्प महाविद्यालय के पूर्ववर्ती छात्रों ने बिहार व भारत को पूरे विश्व में कला की दुनिया में काफी प्रतिष्ठा दिलायी है। राज्यपाल ने कहा कि पूर्ववर्ती छात्रों को इस महाविद्यालय के विकास के लिए बराबर अपने सुझाव देते रहना चाहिए। अपने कॉलेज के दिनों को आदमी कभी नहीं भूलता और इन्हें आजीवन याद रखता है। कॉलेज के दिन दरअसल अविस्मरणीय होते हैं जिनके आगे आदमी सारी खुशियां वार देता है।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पटना विविद्यालय के कुलपति प्रो रासबिहारी प्रसाद सिंह ने कहा कि 70 के दशक में पटना विविद्यालय में शामिल इस महाविद्यालय की कला की दुनिया में काफी प्रतिष्ठा है। राज्य के पूर्व मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि आधुनिक बिहार की ऐतिहासिक विरासतों को प्रदर्शित करने के लिए बिहार संग्रहालय व पटना संग्रहालय में विशेष दीर्घाएं तैयार हो रही हैं। उन्होंने कहा कि कला व संस्कृति के विकास के लिए राज्य में बेहतर माहौल बना है। सुप्रसिद्ध समीक्षक प्रयाग शुक्ल ने कहा कि यह युग छवियों का युग है और इन सभी प्रकार की छवियों को बारीकी से चिन्हित करने की जिम्मेवारी कलाकारों पर आ पड़ी है। कार्यक्रम में स्वागत भाषण महाविद्यालय के प्राचार्य अजय पांडेय ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन पटना विविद्यालय की प्रतिकुलपति प्रो डॉली सिन्हा ने किया। कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध कलाकार श्याम शर्मा व बिहार संग्रहालय के निदेशक भी उपस्थित थे।

यह भी पढ़े  मेहबूब अली कैसर खगड़िया लोकसभा सीट से लोक जनशक्ति पार्टी के प्रत्याशी

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here