बिहार के विकास के लिए केंद्र वचनबद्ध: राधामोहन सिंह

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‘‘केंद्र की भाजपा नीत नरेंद्र मोदी सरकार ने कृषि के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति दर्ज करते हुए न केवल उत्पादन एवं उत्पादकता की ओर ध्यान दिया है, बल्कि किसानों की आय में बढ़ोतरी के लिए कई नीतिगत निर्णय भी लिये हैं। बिहार के विकास के लिए केंद्र सरकार पूरी तरह से वचनबद्ध है और इस दिशा में कई कदम उठाये जा रहे हैं।’ ये बातें केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह ने शनिवार को कही। भाजपा के वरिष्ठ नेता ने यहां संवाददाता सम्मेलन में मोदी सरकार के चार वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धियां गिनवाते हुए कहा कि 48 महीने के कार्यकाल में किसानों के हित के लिए कई कदम उठाये गये हैं। चार साल पहले केंद्र की तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार में वर्ष 2010 से 2014 तक खाद्यान्न उत्पादन करीब 25 करोड़ 50 लाख टन था, जिसके वर्ष 2017-18 में बढ़कर 28 करोड़ टन पर पहुंचने का अनुमान है। इसी तरह बागवानी फसलों में वर्ष 2010-14 का औसत उत्पादन 26 करोड़ 50 लाख टन था जबकि उसके बढ़कर 2017-18 का द्वितीय अनुमान 30 करोड़ 70 लाख टन है। श्री सिंह ने कहा कि इसी तरह मत्स्य उत्पादन में वर्ष 2010-14 में कुल उत्पादन की तुलना में वर्ष 2014-18 के उत्पादन से की जाये, तो 26 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह दूध के उत्पादन में 23.69 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि कृषि सहकारिता के क्षेत्र में भी ऋण एवं सहायता राशि में 155.58 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि धान और गेहूं के अलावा दलहन, तिलहन एवं कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) जब नीचे आता है, तब इसकी खरीद के लिए राज्य सरकार प्रस्ताव देती है तथा राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफेड) से समन्वय स्थापित कर इसकी खरीददारी की जाती है। यह सरकार की मूल्य समर्थन योजना है, जिसका लाभ वर्ष 2017-18 के खरीफ सीजन में 2018 के रबी सीजन में 10 राज्यों ने लिया है। उन्होंने कहा कि पशुपालन एवं डेयरी के विकास के लिए गोकुल मिशन, मत्स्य उत्पादन के लिये नीली क्रांति, शहद के लिए मधु क्रांति, मृदा हेल्थ कार्ड, कृषि वानिकी, कृषक उत्पादक संगठन, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम, नारियल विकास बोर्ड और राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड ने भी संप्रग सरकार के चार वर्षो की तुलना में मोदी सरकार के केवल 48 माह के कार्यकाल में कई कीर्तिमान स्थापित किये गये हैं। श्री सिंह ने कहा कि बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी में महात्मा गांधी केंद्रीय विविद्यालय, महात्मा गांधी राष्ट्रीय समेकित अनुसंधान केंद्र मोतिहारी, पूसा में डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विविद्यालय, वैशाली के गोरौल में राष्ट्रीय केला अनुसंधान केंद्र, पटना में नारियल विकास बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय, पटना में कृषि विज्ञान केंद्र का एक क्षेत्रीय कार्यालय तथा मधुमक्खी पालन विकास केंद्र की स्थापना की गई है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इसी तरह मोतिहारी एवं पिपराकोठी में गुड़ प्रसंस्करण संयां एवं पशुपालन विकास केंद्र, बक्सर जिले के डुमरावं में देसी नस्ल की गाय के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए एक गोकुल ग्राम की स्थापना की गई है। वहीं, मुजफ्फरपुर में केंद्रीय मत्स्यिकी शिक्षण संस्थान, छह जिलों में एक-एक अतिरिक्त कृषि विज्ञान केंद्र स्थापित करने की स्वीकृति दी गई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत पूर्णिया जिले में देश के सबसे बड़े फ्रोजन सिमेन स्टेशन का शिलान्यास किया गया है। श्री सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार जैविक कृषि के विकास और परम्परागत कृषि विकास योजना को बढ़ावा देने में लगी है। इस मद में वर्ष 2015-16 से 2017-18 के लिए कुल 2962.52 लाख रुपये का आवंटन किया गया है। यह राशि 327 क्लस्टर के निर्माण के लिए जारी की गई है। उन्होंने कहा कि इनमें से कुल 1714.63 लाख रुपये की राशि राज्यों को जारी कर दी गई है। राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम द्वारा सहकारी समितियों को सुदृढ़ करने के लिए संप्रग सरकार के समय 208.63 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था, जबकि केंद्र की मोदी सरकार ने इसके लिए 391.13 करोड़ रुपये का आवंटन किया है।

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