बिहार की सियासत दिलचस्प ,आज उपवास पर बैठेंगे उपेंद्र कुशवाहा

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बिहार की सियासत इन दिनों दिलचस्प दौड़ से गुजर रही है. उपेंद्र कुशवाहा को लेकर ये कयास लगाए जा रहे हैं कि वे एनडीए का साथ छोड़ सकते हैं. हालांकि उन्होंने इस तरह का कोई एलान तो नहीं किया है लेकिन जेडीयू के साथ-साथ वे बीजेपी पर भी निशाना साध रहे हैं.केद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) के मुखिया उपेंद्र कुशवाहा बिहार सरकार की शिक्षा नीति को लेकर आज उपवास पर बैठेंगे. उन्होंने अपने शिक्षा सुधार अभियान का बिहार में मुख्यमंत्री को अवरोधक बताया है. वहीं, पार्टी ने ट्वीट ने राज्य सरकार को हठी करार देते हुए जनता से औरंगाबाद जिले के गोह प्रखंड के देवकुंड आने की अपील की है.

बिहार के औरंगाबाद जिले में केंद्रीय विद्यालय के लिए नीतीश सरकार की तरफ से जमीन नहीं उपलब्ध कराने को लेकर ये धरना देंगे. कुशवाहा की पार्टी आरएलएसपी तरफ से पोस्टर भी जारी किया गया है जिसमें लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की गई है.
दरअसल बिहार की सियासत इन दिनों दिलचस्प दौड़ से गुजर रही है. उपेंद्र कुशवाहा को लेकर ये कयास लगाए जा रहे हैं कि वे एनडीए का साथ छोड़ सकते हैं. हालांकि उन्होंने इस तरह का कोई एलान तो नहीं किया है लेकिन जेडीयू के साथ-साथ वे बीजेपी पर भी निशाना साध रहे हैं.
गुरुवार को मोतिहारी में पार्टी के खुले अधिवेशन में उन्होंने कहा कि ‘अब याचना, नहीं रण होगा.’ उन्होंने कहा कि मंत्री पद से बर्खास्त करने का अधिकार सिर्फ प्रधानमंत्री के पास है. इससे पहले उन्होंने कहा था कि अगले लोकसभा चुनाव तक वे मंत्री पद पर बने रहेंगे. ऐसे में जब कुशवाहा एनडीए से अलग नहीं हुए है और बीजेपी-जेडीयू दोनों पर निशाना भी साध रहे हैं, इसको लेकर सहयोगी दल नाराज हैं.
दरअसल कुशवाहा की सारी नाराजगी सीटों की संख्या को लेकर है. एनडीए में फिलहाल सीटों की संख्या का कोई आधिकारिक एलान नहीं हुआ है लेकिन कहा जा रहा है कि कुशवाहा को दो से ज्यादा सीटें नहीं मिलेंगी और ये उन्हें मंजूर नहीं है. अब ये देखना होगा कि कुशवाहा का अगला कदम क्या होगा, वो एनडीए में बने रहेंगे या इससे बाहर निकलेंगे. फिलहाल नीतीश कुमार से कुशवाहा की नाराजगी इस कदर बढ़ चुकी है कि अब वे धरना पर बैठने जा रहे हैं.केंद्रीय मंत्री ने बिहार में शिक्षा सुधार कार्यक्रम को लेकर मुख्यमंत्री से 25 सूत्री मांग पूरी करने की अपील की है. बिहार में शिक्षा सुधार को लेकर उन्होंने कहा था कि शिक्षा सुधार को लेकर बिहार सरकार मेरी मांग मान ले, तो सीट शेयरिंग और ‘नीच’ वाले बयान को भी जनहित में भूलने को तैयार हैं. उन्होंने नीतीश सरकार पर आरोप लगाया कि केंद्रीय विद्यालय के लिए मात्र दो प्रस्ताव दिये गये. औरंगाबाद और नवादा के लिए केंद्र को भेजे गये प्रस्ताव के बावजूद बिहार सरकार ने जमीन उपलब्ध नहीं करायी. उन्होंने बिहार सरकार को अपनी 25 सूत्री मांगों को लेकर कहा था कि सात दिसंबर तक सरकार ने जमीन हस्तांतरण की घोषणा नहीं की, तो वह आठ को औरंगाबाद जिले के गोह प्रखंड स्थित देव में आठ दिसंबर को उपवास पर बैठेंगे.

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