बिहार आपदा पीड़ित राज्य है, इसके लिए भी विचार करे आयोग : नीतीश

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Patna-Oct.3,2018-Bihar Chief Minister Nitish Kumar is honouring 15th Finance Commission chairman N.K. Singh at CM Secretariat in Patna.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार आपदा पीड़ित राज्य है यहां नेपाल, उत्तराखंड एवं मध्यप्रदेश की नदियों से बाढ़ आती है, जिससे 70 प्रतिशत क्षेत्र प्रभावित रहता है। हम लोग भूकंप जोन में भी आते हैं और इसका असर दिख सकता है। आपदा के लिए केंद्र सरकार 500 करोड़ देती है। वर्ष 2017 में आयी भयानक बाढ़ में 18 लाख पीड़ित परिवारों को 6 हजार रुपये प्रति परिवार सहायता राशि उनके खाते में भेजी गई। इस मद में 2400 करोड़ रपए राज्य सरकार ने अपनी तरफ से व्यय किया था। मेरा मानना है कि राज्य के खजाने पर पहला अधिकार आपदा पीड़ितों का है। हमलोग दुर्घटनाओं एवं आपातकालीन घटनाओं के लिए मुआवजे के तौर पर 4 लाख रपए 24 घंटे के अंदर उपलब्ध करा देते हैं। बिहार आपदा पीड़ित राज्य है, इसके लिए भी विचार कीजिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपलोग अपने बजट प्रावधान में वन क्षेत्र को अहमियत देते हैं। झारखंड से बंटवारे के समय बिहार में वनक्षेत्र लगभग शत प्रतिशत था, जो अब लगभग 15 प्रतिशत हो गया है। इसके लिए हरियाली विकास मिशन की स्थापना की गई। 22 करोड़ से ज्यादा पौधे लगाए गए। राज्य में हरित आवरण क्षेत्र आनुपातिक दृष्टिकोण से 17 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में आर्कियोलॉजिकल साइट भरी पड़ी है। नालंदा विविद्यालय, विक्रमशिला विविद्यालय, तेलहाड़ा में भी विविद्यालय का पता चला है। लखीसराय में मिली जगह की खुदाई राज्य सरकार ने अपने खर्च से की है। मधुबनी में बलराजगढ, वैशाली एवं इस तरह के कई पुरातात्विक स्थल उत्तरी बिहार में भरे पड़े हैं। राज्य सरकार ने अपने खर्च से विश्वस्तरीय बिहार संग्रहालय का निर्माण कराया है। पटना में अनेक कन्वेंशन केंद्रों का निर्माण कराया गया। राजगीर में साइक्लोपियन वॉल, जरासंध का अखाड़ा, पांडु पोखर सब दर्शनीय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र प्रायोजित योजनाओं में राज्य सरकार को भी राशि खर्च करनी पड़ती है, यह उचित नहीं है। राज्य सरकार स्टेट हाइवे के निर्माण एवं बेहतर रखरखाव के लिए खर्च कर रही है। एनएच को ठीक करने के लिए 970 करोड़ रपए की राशि पहले खर्च कर चुकी है जो राज्य सरकार को अभी तक नहीं मिली है। प्राइमरी हेल्थ सेंटर पर 2006 में जहां एक माह में 39 मरीज इलाज के लिए जाया करते थे, आज उनकी संख्या 11 हजार तक पहुंच गई है। बिहार का विकास दूसरे राज्यों से अलग है। यहां जमीनी स्तर पर हाशिए पर रह रहे लोगों को मुख्यधारा में लाने के लिए कार्य किया जा रहा है। बिहारी बिहार के बाहर भी अपना बेहतर योगदान सभी क्षेत्रों में दे रहे हैं। यहां व्यक्तिगत काम से आमदनी बढ़ी है लेकिन परकैपिटा इन्कम एवं जीएसडीपी में उतनी वृद्धि नहीं है क्योंकि हमारे राज्य की परिस्थिति अलग है।

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