बातचीत के जरिए सुलझा सकते हैं हर समस्या : श्री श्री

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अयोध्या मुद्दे के बातचीत से हल करने की पहल को लेकर साधु-संतों और पक्षकारों से मिलने के बाद आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर ने शुक्रवार को आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली से मुलाकात की।श्रीश्री से मुलाकात करने के बाद मौलाना फरंगी महली ने कहा, ‘‘हम दोनों की मुलाकात काफी अच्छी रही है। दोनों ही चाहते हैं कि देश में साम्प्रदायिक सौहाद्र्र बना रहे, लेकिन मामला उच्चतम न्यायालय में है। इसकी सुनवाई पांच दिसम्बर से प्रतिदिन होनी है। ऐसे में अब बातचीत का क्या मतलब। उच्चतम न्यायालय ही इसका फैसला करेगा और वही सभी को मान्य होगा।’ रविशंकर ने बृहस्पतिवार को अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास के साथ ही कई साधु-संतों और मामले से जुड़े पक्षकारों से मुलाकात की थी।

बाबरी मस्जिद-रामजन्म भूमि विवाद का हल खोजने निकले श्रीश्री रविशंकर शुक्रवार को ईदगाह के इमाम व शहरकाजी मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली से मिले। दोनों के बीच करीब आधे घंटे की मुलाकात में अयोध्या मसले पर ही बातचीत हुई। मौलाना फरंगी महली से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में श्रीश्री रविशंकर ने कहा कि वह अयोध्या मसले का कोई एजेंडा लेकर नहीं आये हैं। थोड़ा वक्त लगेगा। जल्दबाजी से हल नहीं निकलेगा, लेकिन कोशिश जारी रहेगी। कोर्ट का फैसला हम मानते हैं, लेकिन जो दिल से हम लोग फैसला लेंगे उसकी बात ही अलग होगी।श्रीश्री रविशंकर ने इस मुलाकात को हिन्दू-मुस्लिम एकता के लिए अच्छी पहल करार देते हुए कहा कि इस तरह की मुलाकातें भविष्य में भी जारी रहेंगी जिससे दोनों कौमों में जो गलत विचारधारायें फैली हुई हैं उसको दूर किया जा सके। इन धार्मिक लीडरों के विभिन्न अवसरों पर सच्चे दिल से और बिना किसी निजी स्वार्थ के मिलने से बड़ी-बड़ी समस्याओं को आसानी के साथ हल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मेरी यही ख्वाहिश और कोशिश है कि अयोध्या की समस्या को भी दोनों कौमों की रजामन्दी से हल किया जाए तो पूरे देश के लिए अच्छा और लाभदायक होगा।ईदगाह के इमाम व शहरकाजी मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि श्रीश्री रविशंकर से सिर्फ राम मंदिर पर ही नहीं, कई मुद्दों पर हमारी बात हुई। हम भी चाहते हैं कि यह मसला हल हो जाये। श्रीश्री से हुई बातचीत के बारे में सीनियर उलमा से बातचीत करेंगे। मौलाना ने स्पष्ट किया कि इस बातचीत का कोई सम्बन्ध आल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से नहीं है। श्रीश्री रविशंकर हिन्दू कौम के बड़े धार्मिक लीडर हैं। हम लोगों ने उनका एहतिराम किया है और उनका स्वागत किया है। इस प्रकार की मुलाकातों से राष्ट्रीय एकता और हिन्दू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा मिलेगा। जरूरत इस बात की है कि धार्मिक लीडरों के मध्य इस प्रकार की मुलाकातें हर स्तर पर होती रहनी चाहिए जिससे जो गलत विचार धारायें पायी जा रहीं हैं, उनको दूर किया जा सके। दोनों धार्मिक लीडरों ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों कौमें एकजुट होकर देश को तामीर व तरक्की के मार्ग पर ले जाने का प्रयत्न करेंगी ।गौरतलब है कि अयोध्या रामजन्मभूमि और बाबरी मस्जिद का मामला देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में दोनों पक्षों को आपसी सहमति से फैसला लेने की बात कही थी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि वह मध्यस्थता के लिए तैयार हैं। इसी क्रम में श्रीश्री रविशंकर भी बुधवार को राजधानी लखनऊ पहुंचे थे, जहाँ उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। जिसके बाद श्रीश्री रविशंकर अयोध्या के दौरे पर पहुंचे थे, जहां उन्होंने राम मंदिर और रामलला के पक्षकारों से मुलाकात की थी। इसी क्रम में शुक्रवार को श्रीश्री रविशंकर ने राजधानी लखनऊ स्थित ऐशबाग ईदगाह के फरंगी महली से मुलाकात की।

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