बाढ़ राहत के लिए राज्य सरकार ने केन्द्र को भेज दिया मेमोरेंडम

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि बाढ़ राहत के लिए मेमोरेंडम तैयार कर केन्द्र सरकार को आज भेजा गया है। हमने केन्द्र सरकार से 7,636 करोड़ रुपये की आशा प्रकट की है, जो मिलना चाहिये। व्यावहारिक रूप से नियम एवं परम्पराओं के आधार पर केन्द्र सरकार से सीमित राशि की मांग की है। बाढ़ प्रभावित क्षषत्रों में आने वाले समय में और काम होगा। जिनके मकान को नुकसान पहुंचा है, उन्हें भी नियमानुसार अनुदान की राशि दी जायेगी। साथ ही फसल क्षति के लिए भी इनपुट सब्सिडी दी जायेगी। बाढ़ में जो बुनियादी ढांचा को नुकसान हुआ है, उसको भी रिस्टोर कर रहे हैं। यह बातें मुख्यमंत्री ने लोक संवाद कार्यक्रम के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कही। उन्होंने कहा कि बिहार में बाढ़ से बहुत नुकसान हुआ है। राज्य के 19 जलों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुयी, जहां 187 प्रखण्डों की 2371 पंचायतों के अन्तर्गत एक करोड़ 71 लाख 64 हजार लोग प्रभावित हुये। राज्य सरकार की तरफ से युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव कार्य चलाये गये। लोगों के लिये राहत शिविरों का संचालन किया गया। कम्यूनिटी किचेन की व्यवस्था की गयी। फूड पैकेट्स की एयर ड्रापिंग की गयी एवं लोगों के बीच फूड पैकेट और सूखा राशन का वितरण किया गया। बाढ़ प्रभावित परिवारों को प्रति परिवार 6 हजार रुपये का नगद अनुदान आरटीजीएस के माध्यम से दिया जा रहा है। अब तक 13 लाख परिवारों को आरटीजीएस से अनुदान भेजा जा चुका है। अगले 7 से 8 दिनों के अन्दर बाकी बचे हुये परिवारों को भी अनुदान उपलब्ध करा दिया जायेगा।उन्होंने कहा कि रिहैब्लिटेशन और रेस्टोरेशन का भी कार्य तेजी से चल रहा है। प्रधानमंत्री ने भी 26 अगस्त को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का हवाई सव्रेक्षण किया था साथ ही पूर्णिया में बैठक भी की थी। बैठक में उन्हें बिहार में बाढ़ से हुयी बर्बादी की जानकारी दी गयी थी। हमने कहा था कि इस संबंध में एक मेमोरेंडम तैयार कर भेजेंगे। मेमोरंडम तैयार हो गया है और आज भेजा गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने आपदा पीड़ितों के बीच राहत वितरण हेतु अपने खजाने से 2451 करोड़ रुपये अतिरिक्त उपलब्ध कराये थे। व्यावहारिक नजरिया अपनाते हुये हमने केन्द्र सरकार से 7,636 करोड़ रुपये की आशा प्रकट की है, जो मिलना चाहिये।बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में हो रहा है डीडीटी का छिड़काव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि बाढ़ के बाद जलजमाव से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में डीडीटी का छिड़काव किया जा रहा है। जब बाढ़ के पानी में कमी होती है तो जलजमाव होता है, इससे कई तरह की बीमारियां होती हैं। इसके लिए पानी में डीडीटी का छिड़काव किया जाता है तथा लोगों को दवाइयां उपलब्ध करायी जाती है। आपदा विभाग इन सभी चीजों को को-आर्डिनेट कर रहा है। हम एक-एक पहलू की जानकारी लेते हैं, प्रतिदिन की रिपोर्ट आती है।हर घर में गांधी जी के विचारों के साथ दी जायेगी दस्तक मुख्यमंत्री ने आज पटना में कहा कि हम चम्पारण सत्याग्रह का शताब्दी वर्ष मना रहे हैं। हर घर में गांधी जी के विचारों के साथ दस्तक दी जायेगी। खादी के प्रयोग को भी बढ़ावा देने पर बल दिया जाएगा। गांधी जी के विचारों से नई पीढ़ी को अवगत कराने के लिए कहानी संग्रह प्रकाशित करने की कोशिश की गयी है। वर्ग 4 से 8 तथा वर्ग 9 से 12 तक के लिएअलग-अलग कहानी प्रकाशित की गयी है। इसका वाचन स्कूलों में प्रार्थना के बाद होगा। गांधी जी के विचारों को कहानियों के जरिये छात्र-छात्राओं को सहज ढ़ंग से परिचित कराया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी नई पीढ़ी के बच्चे शतरंज के साथ-साथ चरखा को भी समझ लेंगे।दहेज प्रथा व बाल विवाह के खिलाफ शुरू होगा अभियान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि 2 अक्टूबर को बापू के जन्म दिवस पर बाल विवाह एवं दहेज प्रथा के खिलाफ सशक्त अभियान की शुरुआत करेंगे। सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर में नया सभागार जिसे बापू सभागार का नाम दिया गया है, का उद्घाटन भी होगा।ात्रकार गौरी लंकेश हत्या मामला पर पूछे गये प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह घटना निन्दनीय है। इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिये और दोषियों को कानून के कठघरे में खड़ा करना चाहिये।लोकसंवाद कार्यक्रम में आठ लोगों ने सीएम को दिये सुझावमुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लोक संवाद कार्यक्रम में आठ लोगों ने सुझाव दिये। पटना के रणविजय सिंह ने कहा कि बंटवारा एवं वंशावली में बेटी की सहमति लिया जाना चाहिए। बेटियों को बराबर का अधिकार है। संपत्ति में बेटी की हिस्सेदारी को कानूनी स्वरूप दिया जाए। मुख्यमंत्री ने सुझाव पर अमल किया जाएगा। मधुबनी के नीतीश रंजन आए। उन्होंने मुख्यमंत्री को उनके द्वारा बनाये गये कानून को लेकर कठघरे में खड़ा कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा लोक शिकायत निवारण अधिनियम को और मजबूत बनाया जाएगा। दरभंगा के मोहम्द रिजवान औरंगाबाद के धीरेन्द्र कुमार, नालंदा के सीताराम प्रसाद, सीतामढ़ी के रंधीर कुमार ने भी अपने-अपने सुझाव सीएम को दिये।

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