बाढ़ को लेकर विपक्षी सदस्यों का सदन के बाहर और अंदर हंगामा ,चार दिनों की बारिश ने रिकॉर्ड तोड़ दिया

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बिहार विधानमंडल के मॉनसून सत्र के दौरान विपक्षी दलों के सदस्यों ने सोमवार को सदन के बाहर जमकर हंगामा किया. राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और भाकपा-माले के सदस्य सदन शुरू होने के पहले बैनर-पोस्टर लेकर नारेबाजी की.
भाकपा-माले के विधायकों ने एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम और बाढ़ से उपजे हालात को लेकर प्रदर्शन किया. वहीं, आरजेडी के सदस्यों ने बाढ़ को लेकर सरकार को घेरा. आरजेडी के विधायक भाई वीरेंद्र ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार ने बाढ़ को लेकर किसी तरह की तैयारी नहीं की है. उन्होंने सरकार पर बिहार के बाढ़ प्रभावित नौ जिलों पर संज्ञान नहीं लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि इंजीनियर बाढ़ को लूट-खसोट का अड्डा बनाये हुए हैं.

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सदन के अंदर भी विपक्षी सदस्यों ने बाढ़ को लेकर हंगामा शुरू कर दिया. आरजेडी के सदस्यों ने सदन की कार्यवाही शुरू होते ही बाढ़ को मुद्दे बनाते हुए नारेबाजी करने लगे. आरजेडी विधायक भोला यादव ने कहा है कि दरभंगा समेत कई जिलों में बाढ़ की स्थिति भयावह हो गयी है. बाढ़ के पानी में कई लोग बह चुके हैं. सरकार का कोई रेस्क्यू ऑपरेशन जमीन पर नहीं दिख रहा है. केवल बयानबाजी और हवाई सर्वे किया जा रहा है.
वहीं, विधान परिषद के बाहर कांग्रेस सदस्यों ने बाढ़ की समस्या को लेकर जमकर नारेबाजी की. कांग्रेसी सदस्यों ने सूबे में टूटते तटबंधों की जांच की मांग कर रहे हैं. वहीं, सदन की कार्यवाही में भाग लेने पहुंची आरजेडी नेता राबड़ी देवीे के नेतृत्व में पार्टी ने बाढ़ की समस्या को लेकर सदन में कार्यस्थगन प्रस्ताव लाया है. आरजेडी सदस्यो ंने बाढ़ में करोड़ों रुपये बर्बाद करने का आरोप लगाया.

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बिहार में बाढ़ का क़हर लगातार जारी है. पिछले चार दिनों की बारिश ने साल 1987 का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. रविवार को सीएम नीतीश कुमार के हवाई सर्वेक्षण के बाद भी लगातार उन इलाक़ों में निगरानी रखी जा रही है. अब तक की बारिश ने ही साल 1987 की 54.34 mm के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है और ये आंकड़ा 54.50mm तक पहुंच गया है. उधर कोसी, महानंदा, परमान, कमला बलान, पश्चिम कनक़ई और मैंची जैसी नदियों के जलस्तर में हो रही है लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए अलर्ट रहने की चेतावनी दे दी गई है. हालांकि मौसम विभाग के मुताबिक़ सोमवार को कुछ राहत की ज़रूर उम्मीद है.

नदियां और उनसे प्रभावित क्षेत्र

बूढ़ी गंडक नदी में आए उफान से चनपटिया और आसपास के क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हैं. बाग़मती नदी से सीतामढ़ी के रुन्नीसैदपुर और बेनीबाद के आसपास का इलाक़ा प्रभावित है. कमला बलान के कई जगहों पर बांध टूटने से सबसे ज़्यादा जयनगर और झंझारपुर के लोगों को दिक्कत हो रही है. जल संसाधन विभाग के मुताबिक़ कोसी के जलस्तर लगातार बढ़ने से सुपौल, बसुआ, बलतारा और करसैला के इलाके में लोग प्रभवित हैं. इसी तरह महानंदा और परमान नदी से देगराघाट, झावा, अररिया और आसपास के क्षेत्र लोग प्रभावित हैं.

 बिहार के वो कौन से इलाके हैं जो इस वक्त सबसे ज्यादा बाढ़ प्रभावित हैं

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बिहार में मधुबनी, अररिया, मोतिहारी, रक्सौल, दरभंगा, सहरसा, समस्तीपुर, सुपौल, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी सबसे ज्यादा बाढ़ प्रभावित हैं. खास तौर पर बिहार के उत्तरी इलाकों में हाल बहुत खराब हैं.

खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं ये नदियां 

नेपाल में भी हुई बारिश के कारण वहां से आने वाली नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं. लखनदेई नदी मुजफ्फरपुर के गायघाट, बागमती मुजफ्फरपुर के औराई, कमला बलान और अधवाड़ा नदी दरभंगा में खतरे के निशाना से ऊपर बह रही है. इसके अलावा बागमती नदी हायाघाट, बेनीबाद, डुबाधार, सोनाखान और ढेंग में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जबकि कमला बलान जयनगर और झंझारपुर में, महानंदा ढंगराघाट और झावा में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है.

 

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